January 20, 2022
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स्कूल के गेट में तम्बाखू उत्पाद से मिलता जुलता,व पायुच खाने को प्रेरित करता प्रचार बोर्ड,यह है पत्थलगांव प्रशासन,स्कूल प्रबंधन,नगर पंचायत की लापरवाही

स्कूल के गेट में तम्बाखू उत्पाद से मिलता जुलता,व पायुच खाने को प्रेरित करता प्रचार बोर्ड,यह है पत्थलगांव प्रशासन,स्कूल प्रबंधन,नगर पंचायत की लापरवाही

हरितछत्तीसगढ़ विवेक तिवारी पत्थलगांव।।शिक्षण संस्थानों के आसपास 100 गज की दूरी में तंबाकू व गुटखा बेचना व उनका विज्ञापन करना प्रतिबंधित है लेकिन जशपुर जिले के पत्थलगांव शहर के बीचोबीच स्थित प्रकाश हाई स्कूल के ठीक गेट में ही तम्बाखू उत्पाद से मिलता जुलता,व पायुच खाने को प्रेरित करता  विज्ञापन बोर्ड सारे नियम कानून को चिढाता नजर आ रहा है। वही अगर शहर के अन्य स्कूलों की बात करे तो अधिकांश स्कूल परिसर के दायरे में तम्बाखू उत्पाद से सजे ठेले गुमटी शोभा बढ़ाते नजर आ रहे है। ऊपर से अम्बिकापुर मार्ग स्थिर प्रकाश हाई स्कूल के गेट में लगा तम्बाखू उत्पाद से मिलता जुलता,व पायुच खाने को प्रेरित करता यह बोर्ड तो बस हद ही है, किस तरह इस तम्बाखू उत्पाद से मिलता जुलता,व पायुच खाने को प्रेरित करने वाले विज्ञापन बोर्ड को नगर पंचायत ने अनुमति दे दी और स्कूल प्रबंधन ने भी इसे लगने दिया यह समझ से परे है शहर के कई महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थानों के आसपास किसी न किसी तरह का नशा बिक रहा है और इस तरह के प्रचार प्रसार किये जा रहे है। स्कूली बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करता यह तम्बाखू उत्पाद से मिलता जुलता,व पायुच खाने को प्रेरित करने का फ्लेक्स बोर्ड प्रशासन के साथ शिक्षण संस्थानों को भी चिढाता नजर आ रहा है।लोगो का कहना है कि लापरवाह स्कूल प्रबंधन व प्रशाशन की वजह से स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों में तम्बाखू उत्पाद जेेसी खूबी से सजे इस बोर्ड की ओर आकर्षित होकर गुटखा व तंबाकू खाने की ललक बढ़ती जा रही है। जबकि शिक्षण संस्थानों के आसपास 100 गज की दूरी में तंबाकू व गुटखा बेचना व प्रचार करना प्रतिबंधित है। राज्य शासन इसके लिए कई बार आदेश जारी कर चुके हैं। मगर सख्ती न होने से आज भी शैक्षणिक संस्थानों के आसपास धड़ल्ले से गुटखा व तंबाकू बिक व प्रचारित किये जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन, नगर पंचायत व पुलिस विभाग समेत स्कूल प्रबंधन के अफसरों ने आज तक स्कूल के नजदीक ऐसी गुमटियों व विज्ञापन बोर्ड पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

स्कूलों में लगती है लत : रिपोर्ट
एक रिपोर्ट के मुताबिक स्कूली बच्चों को स्कूली जीवन में ही गुटखा खाने व तम्बाखू उत्पाद की लत लग जाती है। इसकी अहम वजह इस तरह के प्रचारित होने वाले बोर्ड और शिक्षण संस्थानों के आसपास ये नशा आसानी से मिल जाना है। इन पर कार्रवाई करने वाली एजेंसियों के साथ-साथ शिक्षण संस्थान भी गंभीर नहीं हैं। जबकि शैक्षणिक संस्थान के परिसर को तंबाकू मुक्त घोषित है इसके लिए संस्थान के परिसर में जगह-जगह धूम्रपान निषेध के बोर्ड लगाए जाना चाहिए। परिसर से 100 गज के अंदर तम्बाकू उत्पाद बेचने वाली गुमटी या दुकान व प्रचारित बोर्ड होने पर उसे हटाने के लिए निगम व पुलिस को सूचना देना चाहिए।।
कानून है, मगर कार्रवाई नहीं होती
तंबाकू से जुड़े नशे पर रोकथाम के लिए सिगरेट एंड अदर टोबेको प्रोडक्ट्स कानून 2003 लागू तो हैं। मगर इसके तहत प्रदेश में सख्ती नहीं की जा रही। शहर में होर्डिंग से लेकर पोस्टर्स तक के जरिए खुलेआम तंबाकू उत्पादों का प्रचार हो रहा है। शैक्षणिक संस्थानों के आसपास सिगरेट व तंबाकू बेचने वाली गुमटियां तनी हुई हैं। कई स्कूलों की बाउंड्रीवाल के ऐन बाहर गुमटियां मौजूद हैं, फिर भी न तो स्कूल प्रबंधन और न ही नगर प्रशासन का अमला इन पर कार्रवाई कर रहा ,खास बात यह है कि सबसे प्रतिबंधित माने जाने वाले स्कूल परिसर के आसपास भी ऐसे उत्पादों की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। इसका असर यह कि स्कूली बच्चे तंबाकू उत्पादों की तरफ आकृष्ट हो रहे हैं।

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