September 25, 2021
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प्लास्टिक चावल महज एक अफवाह अब तक किसी भी राज्य में प्लास्टिक चावल की पुष्टि नही :ऋचा शर्मा

हरित छत्तीसगढ़ रायुपर। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव ऋचा शर्मा एफसीआई जीएम ओपी समेत विभाग के अधिकारियों ने रायुपरे मे प्रेस कांफ्रेस आयोजित कर प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत शासकीय उचित मूल्य दुकानों के अलावा खूले मार्केट मे कहीं भी प्लास्टिक चावल मिलने की बात को महज एक अफवाह बताया। उन्होने बताया कि विभाग को कथित रूप से प्लास्टिक चावल विक्रय की सूचना पर राज्य के कई इलाकों से चावल का सेम्पल लेकर ओषधि प्रशाषन की प्रयोगशाला में परीक्षण कराया गया तो अब तक 8811 मेट्रिक टन चावल का परीक्षण कराया जा चुका है परंतु किसी मे भी प्लास्टिक चावल होने की बात नही पाई गई। उन्होने बताया कि खुले मार्केट से लेकर वितरण प्रणाली की दुकानो,मध्यान्ह भोजन स्थल एंव अन्य जगहों से यहां तक की अधपका और पके चावल का भी परीक्षण किया गया किसी मे भी इस तरह की बात नही सामने आई,चावल प्लास्टिक का होना तथ्य हीन और अफवाह मात्र है जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नही है। जांच में चावल में प्लास्टिक जैसी कोई वस्तु नहीं पाई गई। सचिव ऋचा शर्मा ने कहा कि प्लास्टिक के चावल बिकने के दावे को यूनिवर्सिटी ऑफ ऐग्रीकल्चरल साइंस ने अपने टेस्ट में झूठा करार दिया है। कई दिनों से सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई जा रही थी कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड सहित कई राज्यों समेत छत्तीसगढ़ मे भी कई जगहों पर प्लास्टिक के चावल बिक रहे हैं। शासकीय उचित मूल्य की दुकान से प्लास्टिक चावल वितरण तथा मध्यान्ह भोजन में प्लास्टिक चावल मिलने की शिकायत होने पर खाद्य विभाग, पंचायत विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम, भारतीय खाद्य निगम एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों की टीम गठित कर सत्यता की जांच कराई गई।
चावल से मंहगा प्लास्टिक
सामान्य तौर पर 40-50 रुपये किलो बिकने वाले चावल को अगर प्लास्टिक का बनाया जाए तो एक किलो चावल की लागत 200 रुपये बैठेगी। ऐसे में कोई क्यों चार गुना घाटा सहकर नकली चावल बेचेगा। दूसरी ओर एक्सपर्ट्स ने पाया कि जिन चावलों को प्लास्टिक का बताया जा रहा है उनमें प्लास्टिक का कोई तत्व नहीं है,एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा कि नकली या प्लास्टिक के चावल बनाना संभव नहीं है।
साल मे दो बार होगा चावल का परीक्षण
सचिव ऋचा शर्मा ने कहा कि अब तक हुए चावल जांच के दौरान प्लास्टिक का एक भी अंश नही पाया गया उन्होने कहा कि चावल के गेंद में उछाल उसमे अमायलोज फेक्टर की वजह से होता है यह वैज्ञानिक शोध में भी सामने आ चुका है। चावल की यही खूबी से उसके बने गेंद में उछाल होता है। उन्होने कहा कि खाद्य विभाग चावल का उपार्जन करने के बाद साल में दो बार छः महीने में चावल का एफएफसीआई से परीक्षण कराएगी। प्लास्टिक तो चावल से महंगा है ऐसे में चावल की जगह प्लास्टिक का चावल का मिलना सम्भव नही। उन्होने कहा कि विभाग द्वारा इस वर्ष 1653 लाट मापदण्ड के हिशाब नही होने की वजह से रिजेक्ट किया गया,वही गोदाम में जो चावल जमा होता है वह भारत सरकार के मानक अनुसार पाए जाने पर ही जमा किया जाता है मानक से परे हटकर चावल का उपार्जन नही होता उन्होंने कहा कि चावल में कीड़े न लगे इसके लिए सतत निगरानी की जाती है

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