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भाजपा पितृ पुरूष स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल की नवमी पुण्यतिथि पर विशेष
                                विचार को समर्पित एक जीवन

हरित छत्तीसगढ़
भारतीय जनता पार्टी के पितृ पुरूष कहे जाने वाले स्व. लखीराम अग्रवाल की 24 जनवरी को नवमीं पुण्यतिथी है इस समय उनके सफरनामा को याद करना सही मायने में राजनीति की उस परंपरा का स्मरण है जो आज के समय में दुर्लभ हो गयी है। वे सही मायने में उस समय के एक ऐसे नायक हैं जिसने अपने मन, वाणी और कर्म से जिस विचारधारा का साथ किया, उसे ताजिंदगी निभाया। यह प्रतिबद्धता भी आज के युग में असाधारण नहीं है। लखीराम अग्रवाल सच्चे अर्थों में राजपुरुष थे। उन्होंने राजनीति का यथेष्ठ उपयोग समाजसेवा के लिए किया और शुचिता की राजनीति की नई लकीर खींच दी। यही वजह है कि वे शिखर पर पहुंचकर भी साधारण ही बने रहे। खुद को महत्वपूर्ण मानकर असामान्य व्यवहार कभी नहीं किया, पार्टी के प्रति पूर्ण निष्ठा और समर्पण के बावजूद उनके संबंध सभी राजनैतिक दलों के नेताओं से मधुर रहे, इसलिए उन्हें सर्वमान्य नेता कहा जाता था। वे अंत तक खुद को सच्चे अर्थों में जनप्रतिनिधि साबित करते रहे।

Image result for lakhiram agrawalसमर्पित जीवन करिश्माई संगठक
स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल का सफरनामा त्याग तपस्या समर्पण और श्रेष्ठ संगठक के रूप में याद किया जंाता है खरसिया जैसे छोटे नगर से उन्होंने राष्ट्रीय छवि बनाने वाले स्व लखीराम जी को देश की जनता उन्हें दूरदृष्टा और सर्वमान्य छवि के रूप में याद करती है। स्व लखराम जी इमर्जेन्सी में अठारह महीने मीसा में बंद रहे। माता जी का देहावसान जैसे कठिन दौर में भी लखीराम ने दृढ़ता से समय और परिस्थितियों का सामना किया। आज छग में चौदह वर्षो से ज्यादा भाजपा की सरकार है इसका श्रेय उनको ही जाता है। जिस समय कांग्रेस का एकछत्र राज्य रहता था तब जनसंघ पार्टी का नाम लेने तक की हिम्मत लोग नहीं जुटा पाते थे, उस समय भी वे संघ, जनसंघ का झंडा बड़ी हिम्मत से पकड़ कर काम करते रहे जबकि ये एक प्रतिष्ठित व्यापारिक परिवार के सदस्य थे। उस दौर मे श्री अग्रवाल ने कर्मयोगी की तरह गाँव , शहर , आदिवासी अंचल में भ्रमण कर पार्टी की बुनियाद रखी और गाँव – गाँव में पार्टी को मजबूत करने के लिये उनके द्वारा अनुकरणीय कार्य किया गया ।
अनुकरणीय कार्य
जनसंघ के समय से पार्टी को विस्तार देने में लखीराम की अहम भूमिका रही। 1989 में अविभाजित म.प्र. के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने भोपाल में भाजपा का विशाल कार्यालय बनवाया। आज भी देश के किसी भी राजनैतिक दल के पास सर्व सुविधा युक्त विशाल कार्यालय नहीं है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण, रेल्वे जोन, हाईकोर्ट स्थापना की योजना लखीराम की देन है, छत्तीसगढ़ में पं.दीनदयाल जी उपाध्याय की पहली प्रतिमा की स्थापना लखीराम जी ने ही की थी। उस प्रतिमा का अनावरण तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अटल बिहारी बाजपेयी ने किया था।
कुशल संगठक और सर्वमान्य राजनेता
स्व. लखीराम कुशल संगठक और सर्वमान्य राजनेता के रूप में सदैव याद किये जाएंगे। छोटे से छोटा कार्यकर्ता भी उनसे सीधे संपर्क स्थापित कर अपनी बात रखने में संकोच नहीं करता रहा। वे प्रत्येक कार्यकर्ता की बातें धैर्य से सुनते व दिशा निर्देश देते रहे। इन्होने छत्तीसगढ़ ही नहीं वरन् मघ्यप्रदेश के अनेक युवकों को उत्साहित कर राजनीति की कटीली राहों पर सम्हल – सम्हल कर चलना सिखाया , अनेक लोग सफलता पूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। आज पूरे राज्य में कार्यकर्ताओं का पूरा तंत्र उनकी प्रेरणा से ही काम कर रहा है। वे कार्यकर्ता निर्माण की प्रक्रिया को समझते थे। उनके निर्माण और उनके व्यवस्थापन की चिंता करते थे। संगठन की यह समझ ही उन्हें अपने समकालीनों के बीच उंचाई देती है,आज लखीराम अग्रवाल की याद बहुत स्वाभाविक और मार्मिक लगती है।
मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह का खरसिया चुनाव
लखीराम का जीवन श्रेष्ठ संगठक के रूप में याद किया जाएगा। मुख्यमंत्री के रूप में अर्जुन सिंह का खरसिया चुनाव के दौरान भाजपा की ओर से कुमार दिलीप सिंह जूदेव को मैदान में उतारकर लखीराम अग्रवाल ने चुनाव का जिस कुशलता से संचालन किया उसी का परिणाम था कि आसान जीत समझकर चुनाव में उतरे अर्जुन सिंह को नाकों चने चबाने पड़े। रणनीति के तहत कुमार दिलीप सिंह जूदेव को मध्य प्रदेश के कद्दावर मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के खिलाफ मैदान में उतारा गया उसके बाद चुनाव की ऐसी रणनीति उन्होंने बनाई थी कि कद्दावर नेता अर्जुन सिंह को पसीना आ गया था। हालांकि श्री जूदेव चुनाव हार गए। लेकिन, लखीरामजी के चुनावी प्रबंधन के कारण यह चुनाव ऐतिहासिक बन गया वह उपचुनाव हारकर भी भाजपा ने छत्तीसगढ़ क्षेत्र में जो आत्मविश्वास अर्जित किया, वह एक इतिहास है। इसके बाद भाजपा ने छत्तीसगढ़ में पीछे मुड़कर नहीं देखा।
Image result for lakhiram agrawalईमानदारी के साथ राजनीति और परिवार का कुशल संचालन
लखीरामजी का पारिवारिक जीवन भी कम प्रेरणास्पद नहीं है। उन्होंने उदाहरण प्रस्तुत किया है कि किस तरह पूरी ईमानदारी के साथ राजनीति और परिवार दोनों का संचालन किया जाता है। उनके लम्बे सार्वजनिक जीवन में कोई राजनीतिक कलंक नहीं है। राजनीति में अपनी पार्टी को और व्यक्तिगत जीवन में अपने परिवार को मजबूत करने के लिए लखीरामजी ने अथक परिश्रम किया है। इनका जन्म 13 फरवरी1932 को छत्तीसगढ़ के खरसिया नगर में प्रतिष्ठित – समाजसेवी श्री मंशाराम जी अग्रवाल के सुपुत्र के रुप में हुआ , इनकी माताश्री का नाम श्रीमती रुकमणि देवी था । इनका बचपन प्रमुख रुप से छत्तीसगढ़ के खरसिया एवं बिहार प्रांत के झरिया नामक स्थान में अपनी बुआ के यहां बीता । प्राथमिक शिक्षा खरसिया में पूरी करने पश्चात् ऊपर की शिक्षा के लिये वे झरिया चले गये जहां उन्होने अपना शैक्षणिक जीवन पूर्ण किया, विद्यार्थी जीवन में ही इनका संपर्क राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से श्री बैजनाथ अग्रवाल जो झरिया के एक वरिष्ठ स्वयं सेवक थे , के प्रयास से हुआ, और वे नियमित रुप से संघ की शाखा में उपस्थित होने लगे । ये बातें 1946 की है , जब देश में अंग्रेजी हुकूमत चल रही थी क्राग्रेस की , लखीराम अग्रवाल जी 1960 के बाद के दशक में पूरी तरह राजनीति में रम गये तब से अंतिम समय तक अनेक उतार चढ़ाव देखा । इनकी क्षमता का उपयोग भाजपा में 1981 में जनसंघ , जनता पार्टी से अलग होकर भाजपा का संगठन छत्तीसगढ़ में ही नहीं वरन् मध्यप्रदेश में खड़ा किया उन दिनों कांग्रेस सत्तारुढ़ थी । सन् 1988 के एतिहासिक खरसिया उपचुनाव में तत्कालिन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह कांग्रेस के चाणक्य कहलाने वाले को व्यूह रचना में बांध दिया । दिलीप सिंह जूदेव जैसे कद्दावर नेता सामने लाया । भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं को प्रभावित किया । प्रदेश भाजपा अध्यक्ष , 12 वर्षो तक निश्कलंक राज्ससभा सदस्य के रुप में अपनी छाप छोड़ी । छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के औचित्य को सिद्ध करने एवं पिछड़े आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं का निराकरण हेतु अनेक सांसदों को साथ लेकर संसद में आवाज उठाई । राज्यसभा सदस्य में रुप में इन्होने बिलासपुर , रायगढ़ , जशपुर , सरगुजा , कोरिया , बस्तर सभी पुराना राजस्व जिले जैसे बनवायी , पिछले क्षेत्रों में विकास के लिए सतत योगदान दिया । राष्ट्रीय भाजपा नेताओं में अटल बिहारी वाजपेयी , लाल कृष्ण आडवाणी , कुशाभाऊ ठाकरे , सुन्दर लाल पटवा , उमा भारती , प्रमोद महाजन , राजनाथ सिंह , आदि नेता इनकी वाकपटुता स्पष्टवादिता से प्रभावित थे । इनकी पत्नि मरवण देवी जी समाज सेवी एवं सफल गृहणी की छाप छोड़ी हैं ।

24 जनवरी 2009 को हम सभी छोड़कर स्वर्ग सिधार गये । छत्तीसगढ़ की भाजपा के मजबूत आधार स्तंभ की पूर्ति की दिशा में अमर अग्रवाल संप्रति बिलासपुर के विधायक के साथ छत्तीसगढ़ शासन में महत्तवपूर्ण मंत्री पद पर कार्य करते हुवे  गरीब परिवारों के ईलाज व्यवस्था में अनेक योजनायें क्रियान्वित कर , उनके के छोड़े गए कार्यो को आगे बढ़ा रहे हैं। जिसमें भाजपा सरकार की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं । छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण, रेलवे जोन स्थापना व हाईकोर्ट स्थापना के साथ ही छत्तीसगढ़ में भाजपा की स्थिर प्रगतिशील सरकार बनाने में स्व. लखीराम अग्रवाल की कार्यकुशलता को जाता है। उनकी ही कार्यकुशलता से छत्तीसगढ़ में चैदह वर्षों से ज्यादा भाजपा की सरकार मजबूती से कार्य कर रही है। जनसंघ के समय से ही पार्टी को विस्तार देने में स्व. लखीराम की अहम भूमिका रही। 1989 में अविभाजित मध्यप्रदेश के अध्यक्ष के रूप में सर्व सुविधायुक्त कार्यालय का निर्माण कर पार्टी के विस्तार की शुरूवात की। छत्तीसगढ़ में पं.दीनदयाल उपाध्याय की पहली प्रतिमा की स्थापना स्व. लखीराम ने ही की थी।

कार्यकर्ता परिवार का सदस्य
लखीरामजी उन नेताओं में थे जो पार्टी-संगठन को प्रमुखता और उसके लिए समयानुकूल कार्यकर्ता तथा धन की व्यवस्था करने की परम्परागत राजनीतिक शैली में ढले थे। संगठन के पद पर कार्यकर्ता का चयन पार्टी को बढ़ाने की उसकी योग्यता के आधार पर तो होता ही था, वे यह भी देखते कि उस कार्यकर्ता की नियुक्ति से सांगठनिक संतुलन भी न बिगड़े। ऐसे में कई बार तो वे विरोध पर भी उतर आते थे। लेकिन, लखीरामजी का कौशल ऐसा था कि नाराज कार्यकर्ता उनके साथ एक बार लम्बी बातचीत के बाद फिर से पुराने उत्साह से काम पर लग जाता था। हरेक कार्यकर्ता उनके लिए अपने परिवार के सदस्य की तरह था।

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