October 26, 2021
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शासकीय हाईस्कूल धूमा की नवनिर्मित भवन की दीवारें जर्जर। सत्र-2015 में 29 लाख की लागत से हुआ था निर्माण कार्य।

शासकीय हाईस्कूल धूमा की नवनिर्मित भवन की दीवारें जर्जर।

सत्र-2015 में 29 लाख की लागत से हुआ था निर्माण कार्य।

ठेकेदार व आरईएस के अधिकारियों के मिलीभगत से निर्माण कार्य मे हुआ भरस्टाचार।

बिजली पेयजल व शौचालय सुविधा के बगैर पढ़ रहे हैं स्कूली छात्र छात्राएं।

दिनांक:–29-01-2017

संवाददाता:– मोहम्मद जावेद खान कोटा।

करगीरोड कोटा:– वर्तमान समय में पूरे प्रदेश में निजी स्कूलों की बढ़ती हुई तादात शिक्षा के अधिकार को तरसता मिडिल क्लास परिवार साथ ही ग्रामीण अंचल में रहने वाले परिवार व उनके बच्चे जिनमें प्रतिभाएं तो होती हैं पर उन्हें अपनी प्रतिभाएं साबित करने का मौका नहीं मिल पाता वर्तमान हालत को देखते हुए निजी स्कूलों के बीच शासकीय स्कूल वह उन में पढ़ने वाले छात्र छात्राएं के लिए एक चुनौती से कम नहीं है आने वाले समय में हो सकता है बहुत सारे शासकीय स्कूल चाहे वह मिडिल हो प्राइमरी स्कूल हो निजी हाथों में चले जाए।
शासकीय स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बिजली,पानी,सौचालय की कमी से जूझते हुए कुछ नए शासकीय स्कूल तो बनाए गए हैं पर उनकी हालत भी चिंताजनक है।
कोटा विकासखंड के ग्राम धुमा में निर्मित निर्माण भवन शासकीय हाई स्कूल जो कि महज दो वर्ष ही हुये है लेकिन उस स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अभी भी पुराने स्कूल में ही पढ़ाई कर रहे हैं और शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्षरत भी है वहां ना ही बिजली, शौचालय, पेयजल कोई भी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं उन छात्र छात्राओं को को नहीं मिल पा रहा है ग्राम पंचायत धुमा हाईस्कूल जो कि नवनिर्मित है लेकिन बच्चे पुराने स्कूल में ही पढ़ाई कर रहे हैं स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे एक टेबल पर चार से पांच बच्चे बैठने को मजबूर है नवनिर्मित हाई स्कूल का निर्माण 2015 में कर दिया गया था पर उस स्कूल को शासकीय स्कूल के प्रिंसिपल को आरईएस के इंजीनियर अधिकारी व ठेकेदार की मिलीभगत से बिना जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर के जानकारी के बगैर सौंप दिया गया था जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी हेमंत उपाध्याय द्वारा शासकीय स्कूल धुमा को आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया।
शासकीय हाईस्कूल धूमा जो कि सत्र- 2015 में लगभग 29लाख की लागत से नए भवन का निर्माण कार्य किया गया था ठेकेदार मनीष गुप्ता व आरईएस विभाग के इंजीनियर अधिकारी के देख रेख में निर्माण कार्य किया गया था,अभी दो साल भी नहीं हुआ है की नवनिर्मित भवन की स्थिति जर्जर होने लगी है और कई जगह तो दीवारो में भी दरारें आने लगी है। ठेकेदार से बात करने पर पता चला कि जहां पर अतिरिक्त भवन का निर्माण कार्य किया जा रहा था वहां पर काली मिट्टी थी जिसकी वजह से दीवारों में दरारें दिखाई पड़ रही है ठेकेदार का यह तर्क देना समझ से परे है ठेकेदार द्वारा गुणवत्ता विहीन कार्य करने के बाद यह तर्क देना व आरईएस के इंजीनियर और अधिकारी की देखरेख में नवनिर्मित भवन की दीवारें पर दरारें भ्रष्टाचार की परत को दिखाता प्रतीत होता है वही पर जिला शिक्षा अधिकारी को इस बात की जानकारी नहीं की नवनिर्मित भवन को हाई स्कूल के प्राचार्य को सौंप दिया गया आरईएस के अधिकारी का यह कहना कि भवन निर्माण 2 साल पुराना है और सबसे मजे वाली बात नवनिर्मित भवन का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया है व भवन निर्माण में जो भी दरारें या कमजोरी दिखाई पड़ रही है कुछ भवन की मेंटेनेंस का कार्य ग्राम पंचायत को करना है वहीं पर ग्राम पंचायत घुमा के सरपंच से इस बारे में बात करने पर पता चला कि शासकीय हाई स्कूल को आरईएस विभाग द्वारा कब हैंडओवर किया गया उसकी जानकारी ग्राम पंचायत को नहीं दी गई कुल मिलाकर 29 लाख रुपए की लागत से नवनिर्मित भवन का निर्माण कर दिया गया हाई स्कूल भवन की जर्जर दीवारें व कमजोर नीव चीख-चीखकर कह रही है कि भ्रष्टाचार जोरों शोरों से ठेकेदार व अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया है जो कि जांच का विषय है। नवनिर्मित हाईस्कूल भवन के निर्माण कार्य में हुए अनियमितता के बारे में जिला शिक्षा अधिकारी हेमंत उपाध्याय द्वारा जनपद पंचायत कोटा के सीईओ को भी निर्देशित किये है कि शासकीय हाईस्कूल धूमा में पेयजल, बिजली,शौचालय की व्यवस्था किया जाए,ताकि वहां पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को सुविधा मिल सके।
एक तरफ पड़ोसी राज्य दिल्ली में दिल्ली के सरकार द्वारा शासकीय स्कूल को बेहतर से बेहतर बनाया जा रहा है प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर खड़ा किया जा रहा है पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को बेहतर से बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है प्राइवेट स्कूल में एडमिशन लिए हुए छात्र छात्राओं द्वारा अपना नाम कटवाकर शासकीय स्कूल में दाखिल करवाया जा रहा है प्राइवेट स्कूलों में बेवजह बढ़ती फीस के ऊपर दिल्ली सरकार द्वारा कड़ी कार्रवाई की जा रही है और ज्यादा से ज्यादा राज्य का बजट से शिक्षा का बजट बढ़ाया जा रहा है वहीं पर वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार की नियत व नीति पर सवाल उठता है जहां पर एक और पड़ोसी राज्य द्वारा शिक्षा का स्तर को बढ़ाया जा रहा है शासकीय स्कूल में वह सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है अमीर हो या गरीब सभी को अच्छी और सस्ती शिक्षा मिले यह इस देश के सभी राज्य सरकारों सहित केंद्र सरकार का दायित्व है देश के संविधान में देश के लोगों को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य पाने का मौलिक अधिकार है।

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