October 21, 2021
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सूचना के अधिकार के तहत निर्धारित समय पर जानकारी उपलब्ध कराएं – राज्य सूचना आयुक्त  पवार       

सूचना के अधिकार के तहत निर्धारित समय पर जानकारी उपलब्ध कराएं – राज्य सूचना आयुक्त  पवार

हरितछत्तीसगढ़ रौशन वर्मा अंबिकापुर :-  छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के राज्य सूचना आयुक्त मोहन राव पवार ने कहा है कि सूचना का अधिकार आम जनता को सरकारी कामकाज की जानकारी देने का एक अच्छा माध्यम है। उन्होंने जन सूचना अधिकारियों से कहा कि वे सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त आवेदनों पर समय-सीमा में अपने कार्यालय में उपलब्ध आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं।  पवार ने यह विचार आज यहां कमिश्नर कार्यालय के सभाकक्ष में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आयोजित एक दिवसीय संभाग स्तरीय कार्यशाला में व्यक्त किये।  पवार ने  प्रारंभ में दीप प्रज्जवलित कर इस कार्यशाला का शुभारंभ किया।

राज्य सूचना आयुक्त  पवार ने कहा कि समय-समय पर कार्यशाला आयोजित करते रहने से सूचना का अधिकार की बाखूबी जानकारी जन सूचना अधिकारियों और अपीलीय अधिकारियों को हो जाती है तथा उनकी व्यवहारिक कठिनाईयों का भी समाधान इन कार्यशालाओं में हो पाता है, जिससे कार्य करने की प्रक्रिया को और गति मिलती है। उन्होंने जन सूचना अधिकारियों से कहा कि वे प्राप्त आवेदनों को गंभीरता से पढ़े और नियमानुसार आवेदकों को जानकारी उपलब्ध करायें। उन्होंने कहा कि आवेदकों को सूचना का अधिकार की जानकारी साधारण डाक के बजाय पंजीकृत डाक से भेजी जाए।  पवार ने कहा कि जन सूचना अधिकारी सूचना के अधिकार अधिनियम का मेरूदण्ड हैं। उन्होंने कहा कि एक आवेदन पर एक से अधिक विषय होने पर पहला बिन्दु की जानकारी 30 दिनों के अंदर आवेदक को उपलब्ध करायें। उन्होंने कहा कि 30 दिन का इंतजार नहीं किया जाए, बल्कि आवेदन प्राप्त होते ही यथा शीघ्र जानकारी उपलब्ध कराई जाए। यदि आवेदन उनके विभाग से संबंधित न होने पर 5 दिन के अंदर उसे संबंधित विभाग को भेज दिया जाए तथा उसकी सूचना भी आवेदक को भेजी जाए। श्री पवार ने जन सूचना अधिकारियों से कहा है कि उपलब्ध कराई गई जानकारी से आवेदकों के संतुष्ट न होने पर उसे अपीलीय अधिकारी का नाम और पता स्पष्ट रूप से लिखित में दी जाए, ताकि आवेदक को अपील करने के लिए जानकारी के अभाव में इधर-उधर नहीं भटकना पड़े।  पवार ने जिला स्तर पर इस तरह की कार्यशाला आयोजित करने की आवश्यकता व्यक्त की।

सरगुजा संभाग के कमिश्नर  अविनाश चम्पावत ने कहा कि सूचना का अधिकार का मूल धारणा आवेदकों को समय पर सूचना देना है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार एक महत्वपूर्ण अधिनियम है।  चम्पावत ने कहा कि इस तरह के कार्यशाला आयोजित होते रहने से जन सूचना अधिकारियों और अपीलीय अधिकारियों की शंकाओं का भी समाधान होता रहता है। जिससे सूचना का अधिकार अधिनियम का बेहतर क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्ति होता है। कमिश्नर  चम्पावत ने सरगुजा संभाग के सभी जन सूचना अधिकारियों और अपीलीय अधिकारियों से कहा है कि वे अपने कार्यालय का ई-मेल एड्रेस उन्हें भिजवाएं, ताकि छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग को जानकारी भेजी जा सके, जिससे छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले आदेश उन्हें मेल से प्राप्त हो सकें।

छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के उप सचिव  व्ही.के. आदिले ने कहा कि सरकार और सरकारी मशीनरी जनता के प्रति जवाबदेह हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में सूचना का अधिकार लागू हुए 12 वर्ष हो गए हैं और सूचना का अधिकार की जानकारी अब अधिकांश लोगों को हो गई है। उन्होंने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत आवेदन के साथ 10 रूपए शुल्क जमा करना होता है, किन्तु गरीबी रेखा के नीचे के आवेदकों को निःशुल्क जानकारी उपलब्ध करानी होती है।  आदिले ने कहा कि आवेदक के गरीबी रेखा के नीचे होने का प्रमाण पत्र जनपद पंचायत से प्राप्त करने के बाद ही उपलब्ध कराई जाए और राशन कार्ड को गरीबी रेखा के परिचय के रूप में मान्य न किया जाए। उन्होंने बताया कि गरीबी रेखा के नीचे के आवेदकों को 50 पृष्ठ या 100 रूपए फोटोकॉपी पर होने वाले व्यय तक की जानकारी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए। सामान्य आवेदकों को 2 रूपए प्रति पेज की दर से जानकारी के लिए जन सूचना अधिकारी के पास शुल्क जमा करना होता है। जानकारी बहुत ही विस्तृत और व्यापक होने पर अभिलेखों का अवलोकन भी आवेदकों को कराया जा सकता है और पहले एक घण्टा अभिलेखों का अवलोकन निःशुल्क किया जा सकेगा तथा उसके बाद प्रत्येक घण्टे या उसके खण्ड के लिए 5 रूपए शुल्क जमा करना होगा।  आदिले ने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत  आवेदनों के साथ प्राप्त भारतीय पोस्टल आर्डर को समय पर भुना लिया जाए और उसे मुख्य शीर्ष – 0070 – अन्य प्रशासनिक सेवाएं, उप -मुख्य शीर्ष (60) – अन्य सेवाएं, लघु शीर्ष (118) – सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अधीन प्राप्तियां में जमा कर दिए जाएं।

आदिले ने प्रथम अपीलीय अधिकारियों से कहा है कि वे अपीलकर्ता के आवेदनों और जन सूचना अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के साथ ही नियमानुसार समय-सीमा में प्रकरणों का निराकरण करें। उन्होंने कहा कि अपील के प्रकरणों में जन सूचना अधिकारी और अपीलीय आवेदक का पक्ष सुन लिया जाए और समय पर स्पीकिंग आर्डर किया जाए।  आदिले ने कहा कि सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारी को प्रमाणित भी किया जाए और अच्छा यह होगा कि एक सील बनवा लिया जाए, जिसमें सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्रदत प्रमाणित जानकारी एवं दिनांक का उल्लेख हो तथा जन सूचना अधिकारी का हस्ताक्षर हो। उन्होंने कहा कि लागत व्यय की जानकारी आवेदक को स्पष्ट रूप से दी जाए, जिसमें लगभग राशि का उपयोग न किया जाए। अपीलकर्ता आवेदक को कम से कम 7 दिन का समय अपना पक्ष रखने के लिए दिया जाए।  आदिले ने कहा कि अपीलीय अधिकारी द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की एक पंजी संधारित की जाए जिसमें कार्यालय का नाम, विभाग का नाम, अपीलीय अधिकारी का नाम हो तथा पंजी में 8 कॉलम हो जिसमें पहला सरल क्रमांक, दूसरा अपील प्रकरण क्रमांक एवं कलेण्डर वर्ष, तीसरा अपीलकर्ता का नाम, पता एवं मोबाइल नम्बर, चौथा अपील मेमो प्राप्त होने की तारीख, पांचवा अपील मेमो से संबंधित विषय संक्षेप में, छठवां जन सूचना अधिकारी का नाम जिसके आदेष के विरूद्ध अपील की गई है, सातवां अपील के निराकरण का दिनांक एवं निर्णय का संक्षिप्त विवरण और आठवा कॉलम रिमार्क का रखा जाए।

इस अवसर पर मास्टर ट्रेनर्स शासकीय कन्या महाविद्यालय अम्बिकापुर के प्राध्यापक  अखिलेश द्विवेदी और सरगुजा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक  एस.एन. उपाध्याय ने सूचना के अधिकार अधिनियम की जानकारी दी तथा जन सूचना अधिकारियों और अपीलीय अधिकारियों की शंकाओं का समाधान किया। इस अवसर पर उपायुक्त विकास  ए.पी. शांडिल्य और सरगुजा संभाग के विभिन्न विभागों के जन सूचना अधिकारी और अपीलीय अधिकारी उपस्थित थे। 

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