July 24, 2021
Breaking News

देवताओं का न्यायालय में नौ परगना के देवी-देवता आज देंगे उपस्थिति,आज भंगाराम मांई के दरबार में देवी देवताओं के कार्यों का होगा लेखा-जोखा

केशकाल :- केशकाल तेलीन सती मांई मंदिर के समीप भंगाराम देवी दरबार पर क्षेत्र के देवी देवता जात्रा आज लगेगा । देवी देवताओं को भी मिलती है सजा होनी पड़ती है कटघरे में खड़ा
 हरित छत्तीसगढ़ भीरज नाग /// आदिम संस्कृति में कई व्यवस्थायें ऐसी है जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते जिन देवी देवताओं की पूरी आस्था के साथ पूजा अर्चना की जाति है उन्हीं देवी देवताओं को भक्तों की शिकायत के आधार पर सजा भी मिलती है। यहां पर देवी देवताओं से वर्ष भर में किये गये कार्यों का हिसाब किताब लेखा-जोखा होता है वहां पर देवी देवताओं को उनके ठीक कार्य नहीं करने पर उसे सजा सुनाई जाती है जो देवताओं के कार्य ठीक रहने पर उसे उच्च कोटी का दर्जा दिया जाता है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के केशकाल नगर में स्थित  भंगाराम देवी का मंदिर में  हर साल भादवे के महीने में जात्रा आयोजित किया जाता है।  भंगाराम देवी इलाके के नौ परगना के 55 राजस्व ग्रामो में स्थापित सैकड़ों देवी देवताओं की आराध्या देवी है। हर साल लगने वाले इस जात्रे में सभी ग्रामवासी अपने अपने ग्राम के देवी देवताओं को लेकर यहाँ पहुंचते है। हर साल इसी जात्रे में एक देव अदालत लगती है जिसमे आरोपी होते है देवी देवता और फरियादी होते है ग्रामवासी। इस देव अदालत में सभी देवी देवताओं की पेशी की जाती है और जिस देवी देवता के खिलाफ शिकायत होती है उसकी फ़रियाद भंगाराम देवी से की जाती है। सुबह से लेकर शाम तक ग्रामीण भंगाराम देवी के सामने शिकायत सुनाते है।
इस जात्रा में नौ परगना के देवी देवता होते हैं शामिल, महिलाओं का जाना है मना
   यहां प्रतिवर्ष भादो माह के कृष्णपक्ष के शनिवार के दिन भादो जातरा का आयोजन किया जाता है बारह मोड़ो के सर्पीलाकार कहे जाने वाली घाटी के ऊपर आज देवी देवताओं का मेला लगेगा । जातरा के पहले छः शनिवार को सेवा (विशेष पूजा) की जाती है और सातवें अंतिम शनिवार को जातरा का आयोजन होता है । इस अंतिम शनिवार को जातरा के दिवस क्षेत्र के नौ परगना के देवी देवता के अलावा पुजारी, सिरहा, गुनिया, मांझी, गायता मुख्या भी बड़ी संख्या में शामिल होते है । यह मेला शनिवार के दिन ही लगता है, क्षेत्र के विभिन्न देवी देवताओं का भंगाराम मांई के दरबार में अपनी हाजरी देना अनिवार्य होता है । जात्रा के दिन भंगाराम मांई के दरबार पर महिलाओं का आना प्रतिबंधित होता है ।
देव देवताओं को खुश करने देते हैं जानवरों की बलि
सभी देवी देवताओं को फुल पान सुपारी मुर्गा बकरा बकरी देकर प्रसन्न किया जाता है वहीं भंगाराम मांई के मान्यता मिले बिना किसी भी नये देव की पूजा का प्रावधान नहीं है । देवी देवताओं के मेला में क्षेत्र व दूरदराज  के लोग भी काफी संख्या में उपस्थित होते है ।कहा जाता है कि बस्तर के राजा को देवी ने स्वप्न में कहा कि मैं तुम्हारे राज्य में आना चाहती हूं तब राजा मंत्री और प्रजा के साथ बस्तर से केसकाल की घाटी पर देवी के स्वागत के लिए आये। तब बड़ी जोर की आंधी चली और देवी पहले पुरुष वेश में घोडे़ पर सवार होकर आई ओर पास आते  जब लोगों ने उन्हें नमन किया तब वे स्त्री वेश में परिवर्तित हो गई। केसकाल की घाटी में सड़क के किनारे बना मंदिर ही देवी के प्रगट होने का स्थान है। इस स्थान से दो कि.मी. की दूरी पर एक दूसरा मंदिर बनवाया गया यहां पर देवी की स्थापना की गई।
भंगाराम देवी सुनती है अपना फैसला :
सबकी शिकायते सुनने के बाद शाम को भंगाराम देवी अपने फैसले सुनाती है। असल में इस पूरी प्रक्रिया में भंगाराम देवी का एक पुजारी बेसुध हो जाता है। लोगो के अनुसार उसके अंदर स्वयं देवी आ जाती हैं।  और फिर देवी उसी के माध्यम से अपने फैसले सुनाती है।भादों जात्रा में सांप्रदायिक सौहाद्र्र की मिसाल भी मिलती है। भंगाराम देवी के मंदिर के समीप डॉक्टर खान देव नामक देवता भी मौजूद हैं, जिन पर सभी नौ परगना के निवासियों को बीमारियों से बचाए रखने की जिम्मेदारी है। जानकारों का कहना है कि वर्षो पहले क्षेत्र में कोई डॉक्टर खान थे, जो बीमारों का इलाज पूरे सेवाभाव और नि:स्वार्थ रूप से किया करते थे। उन के न रहने पर उनकी सेवा भावना के कारण उन्हें यहां की जनता ने देव रूप में स्वीकार कर लिया और उनकी भी पूजा की जाने लगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *