October 19, 2021
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पालकों की नाराजगी, नोटा बटन दबाकर दिखायेंगे : क्रिष्टोफर पॉल,,छत्तीसगढ़ पैरेंटस एसोसियेशन ने चलाया निजी स्कूलों के मनमानी के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान

पालकों की नाराजगी, नोटा बटन दबाकर दिखायेंगे : क्रिष्टोफर पॉल,,छत्तीसगढ़ पैरेंटस एसोसियेशन ने चलाया निजी स्कूलों के मनमानी के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान

० अभियान में शामिल हुए राजधानी के हजारों पालक
Harit chhattisgarh रायपुर। पूरे प्रदेश में निजी स्कूलों के मनमानी के खिलाफ आज राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ पैरेंटस एसोसियेशन ने पालकों के साथ मिलकर घड़ी चौक में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। लगभग 3 घंटे चले हस्ताक्षर अभियान में बड़ी संख्या पालकों ने हस्ताक्षर अभियान में शामिल होकर निजी स्कूलों के मनमानी के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया। छत्तीसगढ़ पैरेंटस एसोसियेशन के सदस्यों द्वारा शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर उचित कार्यवाही की मांग की गयी। प्रदेश सरकार द्वारा यदि जल्द ही निजी स्कूलों के मनमानी पर लगाम नहीं लगाया जाता तो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ पैरेंटस एसोसियेशन द्वारा पूरे प्रदेश के जिला मुख्यालय में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।
इस दौरान छत्तीसगढ़ पैरेंटस एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने विगत 17 वर्षो में पालकों को हित के लिये कोई सख्त कदम नहीं उठाया, इसको लेकर भी पालक अब लामबंद होने लगे है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद से अब तक राज्य शासन द्वारा प्राईवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने कोई कानून आयोग या कमेटी नहीं बनाया गया। प्राईवेट स्कूलों के द्वारा पालकों को खुलेआम लुटा जा रहा है। पालक जो वोटर भी है, परेशान और पीड़ित है। पालकों के शिकायतों पर शिक्षा विभाग ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं किया। पूरे प्रदेश में अब तक किसी भी प्राइवेट स्कूल के खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं किया गया। प्राईवेट स्कूलों के द्वारा मांगे जा रहे डिमांडेड फीस जमा नहीं कर पाने वाले बच्चों को स्कूलों से निकाला जा रहा है, विभिन्न प्रकार से प्रताड़ित किया जा रहा है। संविधान में शिक्षा का अधिकार प्राप्त बच्चों को शिक्षा मंहगें दामों में खरीदना पड़ रहा है। सेवा के नाम से शिक्षा का व्यापार करने वाले स्कूलों को तमाम छुट प्राप्त है। बच्चों के संग्रहित फीस से मालामाल हुये स्कूल संचालकों की संपत्ति रातों-रात बढ़ रही है और पालक कर्ज लेकर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिये मजबूर है। पैसे नहीं है तो सरकारी स्कूलों में पढ़ाओं, कहने वाले अधिकारीगण खुद अपने बच्चों को बड़े-बड़े मंहगे प्राईवेट स्कूलों में पढ़ा रहे है, क्योंकि सरकारी स्कूल तो गरीब बच्चों के लिये है, जहां न शिक्षक और न शिक्षा का ठिकाना है। पॉलिटिशियन्स हो या पब्लिक सरवेंटस सभी प्राईवेट स्कूल की मनमानी के खिलाफ घुटने टेक चुके है। प्रदेश में कोई कानून न होने का बहाना कर प्राईवेट स्कूलों को संरक्षण दिया जा रहा है। छग छग पैरेंटस एसोसियेशन का कहना है कि पालकों के पास इस चुनावी वर्ष में अपनी नाराजगी दिखाने के लिये सिर्फ नोटा का सहारा बच गया है।
हस्ताक्षर अभियान के दौरान प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल के साथ प्रदेश उपाध्यक्ष एचवी रिजवी, प्रदेश सचिव कीर्ति चावड़ा, संगीता हरलालका, ललित हरलालका, सुनील बुरट, सुब्रतो काजीलाल, पंकज चावड़ा, भावेश कोठरी बड़ी संख्या में एसोसिएशन के सदस्यगण उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ शासन से हमारी निम्नलिखित मांगे है :-
1. शिक्षा का अधिकार कानून का लाभ सभी गरीब बच्चों और अलाभप्रद बच्चों को नर्सरी से लेकर कक्षा 12 तक मिलना चाहिये।
2. शिक्षा का अधिकार के तहत् गरीब बच्चों और अलाभप्रद बच्चों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तक, गणवेश, जूता-मोजा, कापी-नोटबुक, परिवहन की सुविधा आदि दिया जाये।
3. बच्चों के संग्रहित फीस से अनसिक्योड लोन बांटने, संपत्ति अर्जित करने वाले और न लाभ न हानि के सिद्धांत का उल्लघंन करने वाले निजी स्कूलों की मान्यता समाप्त किया जाये।
4. निजी स्कूलों में फीस का निर्धारण पालकों की आम सहमति और जिला शिक्षा अधिकारी की अनुमति से किया जाये।
5. निजी स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समिति, स्कूल पालक समिति का गठन पालकों और जिला शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में एवं नियमानुसार होना चाहिये।
6. प्रदेश में शिक्षा के व्यवसायिकरण को पूर्णताः बन्द करने सख्त कानून बनाया जाये।
7. निजी स्कूलों में संबंधित बोर्ड की किताबों से ही अध्यापन करवाया जाये।
8. निजी स्कूलों में शिक्षकों को सातवें वेतनमान दिया जाये।
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