October 22, 2021
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जंल, जंगल, जमीन परअधिकारअभियानः याकूबकुजूर

हरित छत्तीसगढ़ पत्थलगांव///  पत्थलगॉव में विगत वर्षों की तरह इस वर्षभीअंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस को जंल, जंगल, जमीन पर अधिकार अभियान दिवस के रूप में विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के संयुक्त तत्वधान में मनाया गया।वर्ष भर जल, जंगल जमीन पर जो संवैधानिक और कानूनी अधिकार आदिवासियों को प्रदतहैं उसे हासिल करने के लिए एक अभियान की तहर काम किया जाएगा।आदिवासियों को वनअधिकार मान्यता कानून (2006-2012), पेसा कानून (1996), और अन्य  कानूनों द्वारा प्रदत अधिकारों को प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करना है।अपने अधिकारों को जानकर संगठित होकर उन्हें प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना है।क्योंकि कागजों में अधिकार देने मात्र से अधिकार प्राप्त नहीं होते हैं।इस मामले में सिद्धांत और व्यवहार में गहरी खाईहै। दूसरी ओर आदिवासियों को यह जानना जरूरी है कि कोई उन्हें अधिकार देने के लिए तैयार नहीं है, उन्हें संघर्ष करके हासिल करना है। उक्त बात याकूब कुजूर ने कहा।

9 अगस्त कार्य दिवस होने के कारण 13 अगस्त रिववार को आदिवासी दिवस मानाया गया।समारोह का आरम्भ शोभायात्रा से हुआ। एक बीटीआई चौक से और दूसरा संतजेवियर्स चौक से आकर प्रकाश स्कूल के सभागर में जनसभा के रूप में तबदील हुआ। ’जय जय आदिवासी जागो ’ गाने के द्वारा समारोह का आरंभ किया गया, जिसकी अगुवाई आशादीप में अध्ययन रत बहनों ने किया।श्रीमती भलेरिया एक्का ने सबका स्वागत किया।हॉलीक्रॉस बी.टी.आई. की छात्राओं ने आदिवासी नाच द्वारा सबका स्वागत किया।मुख्य अतिथिश्री आनन्द नाग, विशिष्ठ अतिथि श्री संजय लकड़ा, सफिरा, कमला लकड़ा,अलेक्स एक्का, पास्कल पन्ना,अम्रित कुजूर, सुरेन्द्र तिर्की, अनिल पन्ना,टिकेश्वर एक्का,प्रभुनारायण ख़लखों, रूथटोप्पो, आईलिन तिर्की, फलोरेंसिया मिंज, पटेल टोप्पो, जोरसाय लकड़ा, ओस्कर तिर्की, हेनरीलकड़ा, इलिजाबेथ एक्का, सरोज लकड़ा, मेरी तिर्की, याकूब कुजूर और गणमान्य अतिथियों एवं जनप्रतिनिधियों का बैच लगाकर स्वागत किया गया।मुख्य अतिथि द्वारा आदिवासी झंण्डे का अरोहण किया गया और धूप-धुवन व पुष्पांजलि दी गई, प्रतिनिधियों के द्वारा भी।आम की पती से पानी का छिड़का (नतालिया कुजूर और बेनेदिक्ता लकड़ा द्वारा) करके सबको समारोह में शामिल किया गया।

याकूब कुजूर ने उद्देश्य, झण्डे के प्रतीक का अर्थ, तात्कालिक सामाजिक परिथितियां, जैसे विस्थापन, मानवतस्करी, हाथी समस्या, अरक्षण, खाद्य असुरक्षा, गुणवत्ता शिक्षा, संगठन आदि मुद्दों पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। इस अवसर के लिए स्वरचितक विता के माध्यम से उन्होंने आदिवासी जीवन पर चिंतन के लिए विचार प्रस्तु तकिया।श्रीमती इलिजाबेथ एक्का ने आदिवासी संस्कृति पर बोलते हुए मौसमी नाच-गान, रीति-रीवाज और अपनी भाषा को बनाए रखने पर जोर दिया।अपने ही समुदाय के लड़का-लड़की को  समझाया विशेषकर लड़कियों को गैर आदिवासी लड़कों से शादी करने से होने वाली व्यक्तिगत व सामुदायिक हानि से अवगत कराते हुए सावधान रहने को कहा।अलेक्स एक्का ने आदिवासी की समस्याओं-पलायन, विस्थापन, मानवतस्करी पर विस्तृत चिंतन प्रस्तुत किया।श्री सुंदरतिर्की ने कैरियर गाइडंस पर अपना विचार व्यक्त करतेहुए कहा कि बच्चों को प्रतियोगिता की भावना को अपना कर पढ़ाईकरनीहै, एक साकारात्मक सोच लेकरअपना लक्ष्य निर्धारितकर सतत प्रयास करनाहैसाथही नौकरी के लिए केवल नहीं पर पेशेऔर स्वरोजगार के लिए भी।टिकेश्वर ने व्यवसायिक कृषि करने परजोरदिया,किसान क्लब बनाकर एवं पत्थलगॉव एग्रो प्रोडक्ट प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड (जिसके वे स्वयं संचालक हैं), सदस्या बनकर खाद-बीज का लाभ लेने की बातों को बतलाया।सेलेस्टीना एक्का ने आदिवासी संस्कृतिऔर पास्कलपन्ना ने रीतिरीवाज को बनाए रखने पर जोरदिया, आधुनिकता की चुनौती का सामना करतेहुए।संजय लकड़ा (जशपुर) ने आयोजन के लिए बधाई देते हुए ऐसा कार्यक्रम  लगातर करते रहने की बा तकही।संतअन्ना हॉस्टल की बच्चियों ने सुन्दर नाच प्रस्तुत कर सबका मनमोह लिया।बड़ापारा, पाराघाटी, करंगाबहला की नृत्य मंडलियों ने अपनेनाच-गान द्वारा दर्शकों का मनोरंजन किया।प्रकाश स्कूल के बच्चों ने आदिवासी जीवन पर एक शिक्षा प्रद नुक्कडनाटक़ प्रस्तुत किया।मुख्य अतिथिश्रीआनन्दनाग ने एकता संगठन पर जोर दिया और कहा कि आदिवासी हिन्दू नहीं हैं, राजनीतिक लाभ के लिए उनका उपयोग किया जा रहा है, जिस आदिवासियों को समझा कर काम करने की आवश्यकता है।समाज को तोड़ने वाली ताकतों को पहचानकर मुंहतोड़ जवाब देने का समय आ गयाहै।समाज को गुमराह कर स्वर्थ की राजनीति बंद हो।समारोह कीअगुवाई महिला संघ पत्थलगॉव ने की।मंच संचालन सुरेन्द्रतिर्की व अपोलिना केरकेट्टा के द्वारा किया गया, धन्यवाद ज्ञापन आईलिन तिर्की द्वारा किया गयाऔर समारोह का संयोजन याकूबकुजूर द्वारा किया गया।समारोह के माध्यम से आदिवासियों ने निम्नलिखित मॉगें शासन के समक्ष रखीः1. 9 अगस्त को राष्ट्रीय छुट्टी की घोषणा करो2. मानव तस्करी बंद करो3. आदिवासियों काविस्थापन बंद करो4. हाथी भगाओ आदमी बचाओ5. समस्त कृषि उपज व वन उपज का समर्थनमूल्य निर्धारितकरो6. आदिवासियोंका शोषण व अत्याचार बंद करो7. आदिवासी युवाओं कोबिना भेदभाव स्वरोजगार उपलब्ध करोओ।इन मांगो को लेकर महामहिम राष्ट्रपतिऔर राज्यपाल के नाम तहसीलदार पत्थलगॉव को ज्ञापन सौंपा गया।तिलडेगा पंचायत के कटंतराई ग्राम के कब्रगाह के चारों ओर कुड़ुख समाज व कब्रगाह प्रबंधन समिति द्वारा वृक्षारोपण 15 अगस्त दोपहार को किया गया।

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