September 25, 2021
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विपक्षी एकता को लेकर मायावती और अखिलेश साथ-साथ हो सकते है पोस्टर जारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी ने हाल ही में एक पोस्टर जारी किया है. इस पोस्टर में पहली बार मायावती और पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव साथ-साथ नज़र आ रहे हैं. बीएसपी ने ये पोस्टर अपने ऑफिशल अकाउंट से ट्वीट किया है.देश की मौजूदा सियासत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की लगातार कोशिश जा रही है.  अब बीएसपी ने भी सामाजिक न्याय के नाम पर विपक्ष को एकजुट होने की अपील की है. बीएसपी के ट्विटर हैंडल से एक पोस्टर शेयर हुआ है जिसमें मायावती अखिलेश यादव, लालू, ममता बनर्जी, सोनिया गांधी जैसे नेताओं के साथ दिख रही हैं.इस पोस्टर में इन दोनों नेताओं के अलावा आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ जेडीयू के बागी नेता शरद यादव भी हैं. इस पोस्टर में लिखा है, ”सामाजिक न्याय के समर्थन में विपक्ष एक हो.”बीएसपी कभी गठबंधन की राजनीति से तौबा करती रही हैं, वहीं आज इस की पहल कर रही हैं. बीएसपी ने अपने ट्विटर के जरिए एक फोटो पोस्ट की है. इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि सामाजिक न्याय के नाम पर विपक्ष एक हो. इतना ही नहीं इस फोटों में कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी, जेडयू नेता शरद यादव, आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव टीएमसी की राष्ट्रीय अध्यक्ष व बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ-साथ अखिलेश यादव के भी फोटो है. इन सभी नेताओं में मायावती की बड़ी फोटो है बाकी सब नेताओं की फोटो बराबर है.याद रहे कि अखिलेश यादव ने बीबीसी को दिए एक बयान में कहा था, ‘’ मैंने हमेशा मायावती को एक रिश्ते के तौर पर संबोधित किया है तो लोगों को लग सकता है कि कहीं हम बीएसपी से गठबंधन न कर लें.  हां अगर सरकार के लिए ज़रूरत पड़ेगी तो देखिए, कोई नहीं चाहेगा कि राष्ट्रपति शासन हो बीजेपी रिमोट कंट्रोल से उत्तर प्रदेश को चलाएं. इससे बेहतर होगा कि एसपी और बीएसपी साथ मिलकर सरकार बनाएं.’’मायावती उत्तर प्रदेश में जिसे समाजवादी पार्टी को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानती रही है आज उसको साथ लेकर चलना चाहती है. इससे साफ है कि बीएसपी के लिए आज एसपी से बड़ी दुश्मन बीजेपी हो गई है, जिसके कंधे पर सवार होकर मायावती चार बार सूबे की मुख्यमंत्री के सिंहासन पर बैठी हैं. वक्त का तकाजा है कि आज उसी बीजेपी के खिलाफ तमाम विपक्षी पार्टियों को एक जुट करने की पहल की जा रही है.बता दें कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने  हाल ही में संसद के मॉनसून सत्र में दलितों के मुद्दे पर बोलने से रोकने का आरोप लगाते हुए राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद लालू प्रसाद यादव ने उन्हें बिहार से राज्यसभा भेजने की पेशकश की थी.आरजेडी लालू प्रसाद यादव भी 27 अगस्त को पटना में तमाम विपक्षी पार्टियों के नेताओं को बुलाया है. जिसमें कांग्रेस, एसपी, बीएसपी,टीएमसी सहित कई राजनीतिक दल के नेता शामिल हो रहे हैं. पहली बार ऐसा होगा कि मायावती और अखिलेश यादव एक साथ एक मंच पर नजर आएंगे. अखिलेश यादव 2017 के विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही मायावती के साथ हाथ मिलने की बात खुलेतौर पर कहते रहे हैं, लेकिन बीएसपी की तरफ से इसके जवाब में न इंकार किया जाता था और न ही हामी भरी जाती थी.

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