October 18, 2021
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प्राईवेट स्कूलों की दादागिरी को मिला राज्य शासन का खुला समर्थन : क्रिष्टोफर पॉल

प्राईवेट स्कूलों की दादागिरी को मिला राज्य शासन का खुला समर्थन : क्रिष्टोफर पॉल
० दोषी प्राचार्या नहीं पीड़ित बच्चों के पिता जायेगें जेल
० संजय पब्लिक स्कूल के मामले की लीपापोती में लगा पुलिस विभाग
रायपुर। छत्तीसगढ़ पैरेंटस् एसोसियेशन का एक प्रतिनिधि मंडल प्राईवेट स्कूल की मनमानी के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग लेकर 15 फरवरी को स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप से उनके निवास पर भेंटकर किया गया था। एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष पॉल का कहना है कि प्राईवेट स्कूलों और पैरेंटस के बीच लगातार टकराव हो रहा है और राज्य शासन और जिम्मेदार जिला शिक्षा अधिकारियों के कान में जू तक नहीं रेंग रहा है।
श्री पॉल ने कहा कि प्राईवेट स्कूलों के द्वारा लूट मचा दिया गया है, पालक परेशान और पीड़ित है, क्योंकि बच्चों को स्कूलों में विभिन्न प्रकार से प्रताड़ित किया जा रहा है। पुलिस विभाग शिकायत दर्ज करने को तैयार नहीं है, क्योंकि उनके अनुसार मामला शिक्षा विभाग से संबंधित है, इसलिये मामला पुलिस हस्ताक्षेप योग्य नहीं है, जबकि बच्चों को स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार से प्रताड़ित करना गंभीर अपराध है। बाल अपराध कानून में यह स्पष्ट उल्लेखित है, लेकिन पुलिस भी किसके दबाव में है यह वही जानते है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने स्कूल की शिकायत पर अब पीड़ित बच्चों के पिता के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है और जल्द इस पर सख्त कार्यवाही की जायेगा। विगत 17 वर्षो में प्राईवेट स्कूलों की मनमानी को नियंत्रण करने के लिये कोई कानून नहीं बनाया गया जिससे प्राईवेट स्कूलों के हौसले बुलंद है। लोक शिक्षण संचानालय रायपुर द्वारा अनुमोदित शिक्षा संहित और शिक्षा का अधिकार कानून को धत्ता बताकर प्राईवेट स्कूलों के संचालकगण अब दादागिरी में उतर आये हैं। इन मामलों को लेकर मंगलवार को एसोसियेशन का एक प्रतिनिधि मंडल बाल सरंक्षण आयोग के नवनियुक्ति अध्यक्षा से मिलकर दोषी स्कूल के प्राचार्य के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग किया गया।
बाक्स…..
*पीड़ित बच्चों पिता ने भी स्कूल के खिलाफ खोला मोर्चा*
पुलिस विभाग द्वारा स्कूल की शिकायत पर पीड़ित बच्चों के पिता पर कार्यवाही की आशंका व्यक्त करते हुये उन्होंने पुलिस अधीक्षक रायपुर को एक शिकायत सौपा है कि यदि पुलिस इस पूरे मामले में स्कूल के प्राचार्या को बचाने और मामले को दबाने की नियत से उनके खिलाफ कार्यवाही की जाती है तो वे पूरे परिवार सहित मुख्यमंत्री निवास के सामने आत्मदाह कर लेगें जिसके लिये जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारीगण जिम्मेदार होगें।
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