July 25, 2021
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पत्थलगांव में बाबूगिरी से लोग क्यों है परेशान, आखिर क्या है वजह ??

हरित छत्तीसगढ़ विवेक तिवारी / संजय तिवारी पत्थलगांव.

लिपिकों के लिये स्वर्ग बना पत्थलगांव
बाबुगिरी से आमजन त्रस्त
वर्षों से पैर जमाये बैठे क्लर्क, अनुपातहीन संपत्ती के बने मालिक 
पत्थलगांव। जशपुर जिले का सबसे बड़ा शहर जहां लगभग सभी विभाग से संबधित शासकीय कार्यालय मौजुद हंै। जिले मे कार्यरत लगभग सभी शासकीयकर्मी का अरमान रहता है, कि उन्हे एक बार पत्थलगांव क्षेत्र मे काम करने का मौका मिले, क्योंकि आदिवासी बाहुल्य जिले मे पत्थलगांव ही एकमात्र ऐसा शहर है जहां तमाम ऐसे सर्वसुविधा उपलब्ध हैं, जो दुर दराज क्षेत्रों मे नही ऐसे मे यहां पदस्थ कर्मचारी एक बार अपनी पदस्थापना यहां कराने के बाद फिर तो बस यही के ही होकर रह जाते है। पत्थलगांव मे इस तरह के बाबुओं या फिर अधिकारी कर्मचारी की लंबी फेहरिस्त देखने को मिल सकती है। वो चाहे जनपद कार्यालय,नगर पंचायत कार्यालय, तहसील कार्यालय,शिक्षा विभाग हो या फिर अन्य शासकीय कार्यालय सभी जगह कोई न कोई कर्मचारी या अधिकारी मिल ही जाएगा जो कई वर्षो से अगंद की पैर की तरह कार्यालय मे जमे हुए है। जानकारी के मुताबिक कई ऐसे कर्मचारी मौजुद है जिनका तबादला कई मर्तबा होने के बावजुद मोटी रकम व उंची पहुंच का हवाला देकर वापस फिर यही आकर वर्षो से जमे हुए हंै। इनके पत्थलगांव प्रेम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके द्वारा यहंा के लोगों को शोषित कर अघोषित संपती अर्जन कर लिया गया है कई तो ऐसे बाबु है जिन्होंने बैंक बेलेंस के साथ साथ करोड़ों रूपए के आलिशान बंगले तक बना लिए है। बंगले बनाकर उसमे निवासरत कर्मचारी रोजाना सुबह चमचमाती चार पहिया वाहन मे बैठकर इस तरह इठला रहा होता है कि जैसे मानो सरकारी नौकरी उसे जिंदगी भर पत्थलगांव मे ही रहकर करनी है, उनका तबादला न कभी होगा और ना ही किसी के द्वारा कराया जा सकता है।
Image result for बाबूगिरी कार्टूनमंहगे लक्जरी वाहनों के शौकीन 
पत्थलगांव क्षेत्र मे ऐसे दर्जनों कर्मचारी मिल जाएगें जिनके द्वारा महंगे लक्जरी वाहनों का क्रय कर उन्हे किराया मे देकर सरकारी नौकरी के बाद अतिरिक्त कमाई का जरिया बनाए हुए है। वहीं कई कर्मचारी ऐसे भी है जो अपने सरकारी कमाई के अनुपात से ज्यादा मंहगे लक्जरी वाहन मे घुमते हुए शौक फरमा रहे है। ऐसे में उनके कमाई का अंदाजा आप स्वयं ही लगा सकते हैं। कई बार शिकायत के बाद भी अभी तक इन पर न तो कोई कार्रवाई होती है और न ही तबादला होता है।
बेखोफ कमीशन का खेल जारी
वर्षो से जमे होने के कारण विभाग और नेताओं के मध्य अच्छी पैठ बना चुके इन बाबुओं द्वारा बेखौफ होकर कमीशन का भी खेल खेला जा रहा है। दुरदराज से सरकारी कार्य करवाने आने वाले ग्रामीण हो या फिर शहरी क्षेत्र के व्यवसायी उनका कोई भी कार्य बगैर कमीशन दिए नही होता। यहां तक कि स्थानीय नेता की अनुशंषा हो या फिर सांसद और विधायक की अनुशंषा सब अनुशषाओं को इन बाबुओं द्वारा रददी की टोकरी मे डालते हुए सिर्फ और सिर्फ कमीशनखोरी को अंजाम दिया जा रहा है। इनके टेबल मे फाईल आने के बाद बेबस लोग भी बगैर किसी गुजाईश के इन्हे मुहमांगे रकम देकर अपना कार्य करवाते नजर आते है। ऐसा नही है कि इन सब कारगुजारी को लेकर उच्च अधिकारी या फिर बड़े नेताओं को भनक तक नही है वे भी इन बाबुओं के द्वारा फाईल लटकाने को लेकर खासे परेशान रहते हैं।
दलालों को दे रहे शह
अंगद के पैर की तरह जम चुके बाबुओं की कारस्तानी का ही नतीजा है कि क्षेत्र मे दलालनुमा नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। बाबुओं के टेबलों मे आने वाले फाईल से सबंधित जानकारी दलालनुमा नेताओं को दे दी जाती है और उसके बाद शुरू होता है कमीशन का खेल यही वजह है कि दलालनुमा नेताओं की पौ बारह हो गई है। इस तरह के बाबुओं के कारनामो की वजह से आमजन खासे परेशान हो रहे है किसी का जमीन उससे छीन ली जाती है उसे भनक तक नही लग पाता कब किसी सामान्य व्यक्ति को बेवजह नोटीश थमा कर दलालनुमा उससे लेनदेन करते नजर आते हैं पता ही नही लग पाता। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सबकुछ जानते हुए भी कोई भी इनके खिलाफ आवाज नही उठा रहा है ना तो अधिकारी इस मामले मे कुछ करते नजर आ रहे है और न ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधि कुछ करने को तैयार है ।  

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