August 3, 2021
Breaking News

ओबीसी आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर की सीमा को 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख कर दिया है।

क्रीमी लेयर की सीमा 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख हुई

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ओबीसी आरक्षण के लिए बुधवार को बड़ा एलान किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने क्रीमी लेयर की सीमा को 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख कर दिया है। सरकार के इस एलान के बाद अब 8 लाख रुपए सालाना तक कमाने वाली अन्य पिछड़ी जातियां (ओबीसी) क्रीमी लेयर में आएंगी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ओबीसी में सब-कैटेगिरी बनाने को लेकर एक आयोग का गठन किया जाएगा। ये आयोग ओबीसी कैटिगिरी में सब-कैटेगिरी बनाने को लेकर विचार करेगी। आयोग का अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद आयोग 12 हफ्ते में इससे संबंधित रिपोर्ट सौंपेगा।

8 लाख सालाना कमाने वाले
अब आठ लाख रुपये सालाना तक कमाने वाली अन्य पिछड़ी जातियां (OBC) क्रीमी लेयर में आएंगी। पहले यह सीमा छह लाख रुपये सालाना की थी। सरकार के नए फैसले की वजह से अब ओबीसी वर्ग के ज्यादा लोगों को नौकरियों और भर्तियों में आरक्षण का फायदा मिल सकेगा।

जेटली ने बताया कि ओबीसी की सूची में सब-कैटिगरी बनाने की दिशा में एक आयोग का गठन करने के लिए राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेजी गई है। इससे, लाभ पाने से वंचित रह जाने वाले लोगों को भी शामिल किया जा सकेगा।

अब तक 6 लाख रुपये या इससे अधिक सालाना आय वाले ओबीसी परिवार को लाभ पाने वालों की सूची से हटाकर क्रीमी लेयर में रखा गया था। इस आय वर्ग के ओबीसी को किसी तरह का फायदा नहीं दिया जाता है। बता दें कि केंद्र सरकार ने क्रीमी लेयर को फिर से परिभाषित करने की मंशा जाहिर की थी, ताकि इसका फायदा जरूरतमंद और समाज के निचले तबके तक पहुंचाया जा सके। ओबीसी आरक्षण के लिए आखिरी समीक्षा 2013 में की गई थी।

क्या है क्रीमी लेयर का मतलब?
बता दें कि क्रीमी लेयर में आने वाले पिछड़ा वर्ग के लोग आरक्षण के दायरे से बाहर हो जाते हैं। सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण है, बशर्ते परिवार की वार्षिक आय क्रीमी लेयर के दायरे में न आती हो। अभी तक वार्षिक आय छह लाख रुपये तक तक थी, अब यह 8 लाख रुपये हो गई है। जिनकी आय अधिक होती है उन्हें क्रीमी लेयर कहा जाता है और वे आरक्षण के लिए पात्र नहीं होते।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *