October 18, 2021
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छग,महुली मे होलीआज 100 साल से ‘महुली’ के ग्रामीण 4 दिन पहले खेल लेते हैं होली,अनहोनी के डर से चार दिन पहले मनाऐ जाते है होली

महुली मे होलीआज 100 साल से ‘महुली’ के ग्रामीण 4 दिन पहले खेल लेते हैं होली,अनहोनी के डर से चार दिन पहले मनाऐ जाते है होली

100 साल पुराना परम्परा आज भी जारी सूरजपुर जिले के दूर अंचल क्षेत्र चांदनी बिहारपुर के महुली में

सूरजपुर जिले के दुरस्थ अंचल चांदनी-बिहारपुर में सन् 1917 से ही ग्राम पंचायत महुली में चार दिन पहले मनाई जा रही है होली

हरितछत्तीसगढ़ पप्पू जायसवाल

सूरजपुर. जिले के दूरस्थ अंचल चांदनी-बिहारपुर के ग्राम पंचायत महुली में आज भी होली में वर्षों पुरानी परंपरा का पालन किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता से जुड़ी पूर्वजों की बताई बातों को मानते हुए हर वर्ष महुली में 4 दिन पहले ही होली मना ली जाती है। सन् 1917 से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए इस बार 27 फरवरी को महुली में जमकर होली खेली गई।

पूरे देश में रंगों के त्योहार होली की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। लेकिन जिले के दूरस्थ अंचल का एक गांव ऐसा है जहां चार दिन पहले ही 27 फरवरी को ग्रामीणों ने एक-दूसरे को रंग-अबीर लगाकर होली खेल ली। दरअसल ग्राम पंचायत महुली में होली त्योहार को पहले ही मना लेने की धार्मिक मान्यता से जुड़ी परंपरा है, जो इस गांव के पूर्वजों द्वारा वर्षों पूर्व दी गई है।

इस मान्यता के साथ ही एक भय भी ग्रामीणों के बीच बना रहता है जिसमें ऐसा नहीं करने पर गांव में बीमारी या किसी और रुप में संकट आने की बात शामिल है, इसलिए ग्रामीण इस परंपरा को निभाने में किसी प्रकार की चूक नहीं करते हैं। लगातार 101 सालों से इस गांव में ऐसा ही होता आ रहा है।

मां अष्टभुजी देवी से जुड़ी है आस्था
ग्राम पंचायत महुली में चार दिन पहले ही होली मना लेने की पीछे की मान्यता गढ़वतिया पहाड़ पर विराजीं मां अष्टभुजी देवी से जुड़ी हुई है। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि वर्षों पूर्व रियासत काल के समय होली से चार दिन पहले ही गढ़वतिया पहाड़ पर खुद से आग लग गई थी, जहां अष्टभुजी देवी विराजमान हैं। इसे गांव में धार्मिक मान्यता के रुप में होलिका दहन मानकर अगले दिन होली मनाने की परंपरा तब से चली आ रही है।

मंगलवार आने तक उड़ता है रंग-गुलाल
गांव के बैगा ने बताया कि होलिका के बाद से जब तक अगला मंगलवार नहीं पड़ता, गांव में होली मनाई जाती है। इस बार ग्रामीणों ने 18 मार्च शुक्रवार को होलिका दहन किया और मंगलवार आने तक होली खेलते रहेंगे। रंगों के इस त्योहार में गांव के बड़े, बुजुर्ग व बच्चे पूरे जोश से शामिल होते हैं।

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