October 18, 2021
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शुभ मुहूर्त में होलिका दहन के साथ अंधविश्वास और कुरूतियों को जलाने का भी संकल्प होली की खुमारी, होलिका दहन से पहले उड़ने लगा रंग गुलाल

शुभ मुहूर्त में होलिका दहन के साथ अंधविश्वास और कुरूतियों को जलाने का भी संकल्प
होली की खुमारी, होलिका दहन से पहले उड़ने लगा रंग गुलाल
पत्थलगांव/
धर्म व संस्कृति के रंगों का पर्व यहां भले ही शुक्रवार को मनाया जाएगा लेकिन लोगों में इस पारंपरिक त्यौहार का खुमार दो दिन पहले से ही दिखने लगा था। गुरूवार को प्रातः 8.57 बजे से भद्रा लग जाने के चलते महिलाओं ने भोर से ही मंडी प्रांगण में होलिका की पूजा अर्चना कर परिवार में सुख समृध्दि के लिए मंगल कामनाओं की पूजा अर्चना शुरू कर दी थी।
इस बार 2 मार्च को रंग उत्सव मनाने का संसय को दरकिनार रखते हुए दो दिन पहले से ही उमंग व उत्साह के साथ इस त्यौहार को मनाना शुरू हो गया था। यहां बस स्टैण्ड ,चैक चैराहों और गलियों में आज सुबह से ही होली का उल्लास नजर आने लगा था। रंगों का त्यौहार से एक दिन पहले ही फाग गीतों की महिफिल जमने के बाद जगह जगह सूखा गुलाल भी उड़ने लगा था। गुरूवार को प्रातः भद्रा की स्थिति प्रारंभ हो जाने से यहां हरियाण और राजस्थान संस्कृति को मानने वाली महिलाओं ने इससे पहले ही पूजा के काम को पूरा कर लिया था। होलिका महोत्सव समिति के सदस्यों ने विधि विधान से होलिका दहन के बाद अधं विश्वास और कुरूतियों का दहन करने का भी संकल्प लिया।
यहां सुबह से ही मंडी प्रांगण में होलिका पूजन करने के लिए महिलाओं की कतार लग गई थी। हरियाणा और राजस्थान की महिलाओं व्दारा गोबर के कंडे बना कर प्रचीन विधि विधान से घर परिवार की खुषहाली के लिए श्रध्दा और विश्वास के साथ होलिका दहन से पहले पूजन किया जाता है।गुरूवार को मंडी प्रांगण में होलिका पूजन करने वालों ने अपने बच्चों को निरोग रखने और सुख समृध्दि की कामना की।
फाग गीतों के बिना होली अधूरी
यहां पुरानी बस्ती के संजय तिवारी का कहना था कि फाग गीतों के बिना होली का त्यौहार अधूरा लगता है। उन्होने कहा कि होली का त्यौहार वर्षो पुराना है। आपसी भाईचारा को कायम रखने का इस त्यौहार की शैली व संस्कृति को बचाए रखना हमारा कर्तब्य है। युवा पीढ़ी को हमें आपसी भाईचारा के इन त्यौहारों के रीति रिवाजों को सिखाना होगा। वास्तव में युवा पीढ़ी फिल्मी और टीवी के कार्यक्रम व गीतों में ही सिमट कर रह गई है। होली के फाग गीतों का जो मिठास लोक गीतों में है वह फिल्मी गीतों में नहीं मिल पाता। श्री तिवारी ने कहा कि होली के मौके पर राधा कृष्ण के भजन, फान्गुनी गीतों को सुनकर आज भी मन प्रफुलिलत हो जाता है। आज भी होली के फाग गीत को गाने और सुनने वालों की कमी नहीं है। जरूरत है बस युवाओं को प्रेरित करने की है। हमारी युवा पीढ़ी फाग गीतों की मधुर धुन का अलग ही नजारा बना देती है। होली का त्यौहार से पहले ही यहंा छत्तीसगढ़ी और राजस्थानी,हरियाणवी गीतों की भी महिफिल सज गई थी। यहां के प्रसिध्द हास्य कलाकार गोविन्द रोहिला का कहना था कि बदलते दौर में होली के गीतों में अश्लीलता का बोलबाला दिखने लगा है। इसे रोक कर लोक गीतों का आनंद लेना चाहिए। यहां मंडी प्रांगण में शनि मंदिर परिसर में राधा कृष्ण के प्रेम भरे गीत व ग्वाल गोपियों की छेड़छाड़ से ओतप्रोत फाग के गीतों के साथ ढ़ोल,मृदंग,हारमोनियम और नगाड़े की थाप का नजारा देखते ही बन रहा था। इस महिफिल में शहर के गणमान्य नागरिक और युवाओं की भीड़ उपस्थित थी। यहां युवा होली महोत्सव समिति व्दारा शुक्रवार को भी भांग,ठंडाई के साथ नृत्य गीत का भव्य आयोजन रखा गया है।
बस कर्मियों ने उड़ाया गुलाल
बस स्टैण्ड पर बसों के कर्मचारियों ने 2 दिन पहले से ही रंग गुलाल, सिर पर सुनहरे बाल,चष्मा लगाकर होली की शुभकामनाओं के साथ गुलाल का टीका लगाना शुरू कर दिया था। शहर के विभिन्न मुहल्लों में भी छोटे बच्चों ने होलिका बना कर वहां से गुजरने वालों पर रंग गुलाल उड़ाना शुरू कर दिया था। यहा मंडी प्रांगण में सार्वजनिक होलिका उत्सव का आयोजन किया गया है।

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