October 18, 2021
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आखिर क्यों ठंडा पड़ा है जशपुर का राजनैतिक उबाल

आखिर क्यों ठंडा पड़ा है जशपुर का राजनैतिक उबाल

हरितछत्तीसगढ़ संजय तिवारी पत्थलगांव।बहुत जल्द छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं ,पर जिस तरह बीते चुनाव के होने वाले वर्ष में दोनों प्रमुख पार्टियों के संभावित प्रत्याशियों ने अपनी अपनी दावेदारी ठोकनी शुरू कर दी थी वैसा इस चुनाव से पहले कहीं देखने को नहीं मिल रहा है पूरे जशपुर जिले में राजनीतिक शून्यता सी दिखने लगी है।ऐसा लगने लगा है कि अब किसी को कोई राजनैतिक महत्वाकांक्षा नहीं है।जिन्हें है भी अब वह शांत होकर वर्क कर रहे हैं।मानो पता है कि अगर ज्यादा हो हल्ला किये तो टिकट कट भी सकता है और अपने आप को पार्टी के अनुशाषित सेवक बताने के लिए मौन धारण किये हुवे हैं।
जशपुर जिले में केवल एक विधानसभा ऐसा है जिसका चर्चा सुरुवात से लेकर अंत तक शुर्खियों मे रहता है।यह सीट पत्थलगांव सीट है।बाकी विधानसभा सीटों में कौन जीतता है और कौन हारता है किसको सीट मिलेगी किसको नहीं इससे लोगों को बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्यों कि पत्थलगांव विधानसभा पर ही पूरे जिले के राजनेताओं का नजर रहता है।।पत्थलगांव विधानसभा का महत्व इस लिए ज्यादा है क्योकी वह कांग्रेस का गढ़ माना जाता है पर पिछली बार भाजपा ने पत्थलगांव में भी अपना झंडा गाड़ दिया और लगातार 7 बार से विधायक रहे रामपुकार सिंह को एक नया चेहरा शिवशंकर साय पैंकरा ने मात दे दी,पर जरूरी नहीं कि पत्थलगांव के मतदाताओं का रुख जिस तरह पिछली बार भाजपा के पक्ष में इस बार भी पत्थलगांव के मतदाताओं का रूख विधानसभा चुनाव में वहीं रहेगा क्योंकि शिवसंकर साय पैंकरा को इस बार भाजपा के ही कुछ पदाधिकारियों व विरोधियों को भी झेलना पड़ सकता है।पत्थलगांव को छोड़ कर बाकी विधानसभा को कांग्रेस कभी अपना नहीं मानी है क्योंकि बाकी दोनों सीटों में राजपरिवार का जादू व्याप्त है माना जाता है कि जिस व्यक्ति को राजपरिवार आशीर्वाद दे देती है वह ही विधायक होता है।इस लिए पत्थलगांव को छोड़ कर और सीटों की चर्चा कम होती है।
माना जा रहा है कि पत्थलगांव से कांग्रेस फिर से रामपुकार सिंह पर अपना विश्वाश दिखा सकती है पर रामपुकार सिंह के रास्ते भी सरल दिखाई नहीं पड़ रहे क्यों कि इस बार विधानसभा चुनाव में कभी रामपुकार सिंह की चहेती रही रत्ना पैंकरा ने भी पुरजोर ताकत फूंकने की सोंच ली है यदि युवा सोंच को बढ़ावा मिलता है तो कोई बड़ी बात नहीं होगी कि रामपुकार सिंह का भी पत्ता काट दिया जाए और उनके जगह पर रत्ना पैंकरा पर कांग्रेस विस्वास दिखा दे।पर राजनैतिक जानकारों का कहना है कि यदि आने वाले विधानसभा चुनाव में रामपुकार सिंह को टिकट मिलता है तो ही पत्थलगांव में टक्कर का चुनाव हो पाएगा।

युवा हो रहे कांग्रेस से दूर

पत्थलगांव में कांग्रेसी नेताओं ने युवाओं को वह दर्जा नहीं दिया जो युवाओं को मिलना चाहिए था जिसकी वजह से कुछ युवा भी कांग्रेस से रूष्ट दिखाई पड़ रहे है।कांग्रेस में युवाओं का पूछ कम होने की वजह से भारी संख्या में युवाओं ने जोगी कांग्रेस का हांथ थाम लिया है।कांग्रेस को समय समय पर युवाओं का कोप का भागी भी बनते देखा गया है समय रहते यदि कांग्रेस नाराज युवा नेताओं को दुबारा अपनी ओर लाने में कामयाब नहीं होती है तो कांग्रेस को पत्थलगांव में इसका बहुत बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा

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