February 17, 2020
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कर्मचारी चला रहे मनमाना राज , ग्रामीणों में आक्रोश

कर्मचारी चला रहे मनमाना राज , ग्रामीणों में आक्रोश

सूरजपुर : गरीब ग्रामीण कई दिनों तक बैंक के चक्कर काटते रह जाते हैं और दबंगो को अंदर बुलाकर दिया जाता है पैसा।

मामला सुरजपुर जिलान्तर्गत ग्राम बिहारपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक का मामला है जहां बैंक कर्मियों के रवैये से ग्रामीण परेशान हैं।दूर दराज से आने वाले ग्रामीण पैसों के लिए यहां कई कई दिन तक आते हैं,लाइन लगा खड़े रहते हैं और शाम को बिना पैसों के ही वापस चले जाते हैं।
विदित हो कि बिहारपुर सूरजपुर जिलान्तर्गत ओड़गी विकासखण्ड का सबसे पिछड़ा क्षेत्र है जहां छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक एकलौता बैंक है जिस पर कांतिपुर,मोहली, सेमरा,विशालपुर,देवढी, ठाड़पाथर, पेण्डारी,पासल,खैरा सहित अन्य कई गांव के लोग निर्भर हैं,कई गांवों की दूरी बीस पच्चीस किलोमीटर तक है जिन्हें लेनदेन के लिए यहां आना पड़ता है। अपना पैसा जमा करने निकालने के साथ सरकारी योजनाओं जैसे पेंशन,प्रधानमंत्री आवास तथा अन्य का पैसा भी इसी बैंक में आता है क्योंकि सबके खाते इसी बैंक में हैं और यह क्षेत्र का यह एकलौता बैंक है।

ग्रामीणों के बताया की ग्रामीण बैंक कर्मियों का रवैया दूर दराज से आने वाले ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गया है, ग्रामीण बैंक के चक्कर काटते रह जाते हैं और बिना पैसा लिए ही वापस जाना पड़ता है। दूर दराज से आने के बाद भी ग्रामीण दिन भर बैंक में लाइन में खड़े रहते हैं,ऐसा केवल एक दिन नहीं होता बल्कि ग्रामीणों को एक बार पैसा निकालने के लिए तीन चार दिनों तक लगातार बैंक आना पड़ता है।
ग्रामीणों ने जो बताया उसमे सबसे ताज्जुब की बात तो यह है कि ऐसा सिर्फ गरीब ग्रामीणों के साथ होता है और क्षेत्र के दबंग लोग लाइन में भी खड़े नहीं होते वे तो सीधे बैंक कर्मियों के काउंटर के अंदर जाकर पैसा ले जाते हैं,गाँव का गरीब व्यक्ति लाइन में खड़े होकर मुंह ताकते रह जाता है।
वहीं उनका यह भी कहना है कि दबंगों के पैसा ले जाने के बाद बैंक में पैसा ही नहीं बचता और ग्रामीणों को खाली हाथ वापस जाना पड़ता है।

वहीं स्थानीय सूत्रों ने यह भी बताया कि जिन हितग्राहियों के खाते में प्रधानमंत्री आवास का पैसा आता है उनको भी बैंक कर्मचारियों द्वारा अपने चहेते दुकानदार से समान लेने को दबाव दिया जाता है और यदि हितग्राही द्वारा उस दुकानदार से समान लेने से मना कर दिया जाता है तो उस हितग्राही को पैसा लेने के लिए बार बार बैंक का चक्कर स्वभाविक सी बात है

वहीं गौर करने वाली बात यह भी है बीस पच्चीस किलोमीटर दूर से अधिकांश ग्रामीण साइकल से बैंक आते हैं और इतनी परेशानी के बाद पैसा न मिलना कष्टदायक हो जाता है और कई दिनों तक साइकल से ही उन्हें पैसों के लिए बैंक आना पड़ता है।बैंक कर्मियों का यह रवैया ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गया है,उस स्थिति को लेकर उनमें आक्रोश भी है लेकिन डर से वे आवाज नहीं उठा पाते हैं जिससे बैंक कर्मियों का मनोबल बढ़ा हुआ है।

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