October 18, 2021
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जंगली हाथी के हमले से एक की मौत

जंगली हाथी के हमले से एक की मौत

हरित छत्तीसगढ पप्पू जायसवाल सुरजपुर

प्रतापपुर खूनी हाथी के आतंक से थर्राया समूचा प्रतापपुर विकासखंड मे एक के बाद एक मौत से दहला नगर एक के बाद एक इंसान की जान जाने से आक्रोशित ग्रामीण लगातार हो रही वन विभाग की लापरवाही उजागर
ज्ञात हो कि बीते दिन बुधवार देर शाम तक एक कोडाकू महिला की मौत जंगली हाथी के हमले में जंगल में हो गई जब वह पति के साथ घर से करीब 1 किलोमीटर दूर जंगल में लकड़ी लेने गई थी घटना बुधवार की शाम लगभग 5:00 बजे के आसपास की बताई जा रही है प्रतापपुर से करीब मुख्य मार्ग गोटगाव की जंगल की है उक्त घटना होने के बाद देर रात तक महिला की लाश जंगल में ही पड़ी हुई थी क्योंकि अंधेरा होने के कारण कोई भी जंगल में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था घटना की खबर सुनते ही चर्चा नगर में आग की तरह फैल गई मौका वारदात को मकना हाथी ने अंजाम दिया है जो करीब 1 महीने से इसी क्षेत्र के जंगल में अकेला घूम रहा है तथा एक के बाद एक करके कई मौतों को अंजाम दे चुका है यह हाथी।

 

मिली जानकारी के अनुसार प्रतापपुर के समीपस्थ ग्राम पंचायत गोटगाव के गणेश पुर में ज्यादातर कोडाकू जाति के लोग निवास करते हैं इनमें से भग मोनिया उम्र 52 वर्ष अपने पति शोभनाथ कोडाकू के साथ घर से करीब 2 किलोमीटर दूर जंगल में चार 5:00 बजे के लगभग लकड़ी लेने गए थे जंगल में लकड़ी काटते-काटते शाम हो गया दोनों पति-पत्नी घनी झाड़ियों के आस-पास लकड़ी इकट्ठा करने लगे तथा लकड़ी इकट्ठा कर ही रहे थे की अचानक उन्हें हाथी आते लकड़ी कटने की आवाज से निकलता हुआ दिखाई दिया जिसके बाद उन्होंने हल्ला किया और वहां से भागने लगे सोमनाथ तो वहां से भागने में कामयाब हो गया लेकिन ग्रामीणों को देख दौड़ा रहे हाथी से मृतिका धमनियां नहीं बच पाई जिसे हाथी ने अपने सूंढ़ से पकड़ लिया और मृतिका का पति भागते-भागते अपने घर पहुंचा और घटना की जानकारी घर वालों के साथ गांव वालों को दी जिसके बाद गांव के लोग जंगल में देखने गए जहां भगमनिया हाथी के हमले से सायद मर चुकी थी ग्रामीणों ने खूब आवाज़ दी मगर किसी प्रकार का महिला के द्वारा नही कह पाना वह जंगल में ढूंढने गए शव के पास हाथी छुप कर खड़ा था ग्रामीणों के आवाज को पाकर हाथी ने जमकर जंगल गए ग्रामीणों को दौड़ाया जिससे समस्त लोग वहां से भाग खड़े हुए देर रात हो जाने के कारण कोई भी व्यक्ति पुलिस फॉरेस्ट विभाग अंदर जाने में हिचकिचाती रही

 

तथा देर रात तक चौकसी बरतने के बाद हाथी के उक्त घटना से समस्त ग्रामवासी सहमे हुए थे तथा क्षेत्र में यह चर्चा आम हो जाने के बाद पूरी रात भगमनिया का शव जंगल में ही रात भर पड़ा रहा

 

आज सुबह गुरुवार को करीब 8:00 बजे के बाद ग्रामीण वन विभाग पुलिस विभाग के द्वारा जंगल के अंदर में प्रवेश किया गया तथा मृतक का पति के बताए अनुसार जंगल के भीतर जहां पर लकड़ी काट कर रखी गई थी उसी के आसपास में उक्त महिला का लाश क्षत-विक्षत दूर-दूर तक पड़ा हुआ मिला जिसे खोजने में करीब 3 घंटा से ऊपर समय लग गया तथा सभी ने ही बताया कि उक्त महिला की मौत बुधवार देर शाम तक ही हाथी के हमले से हो चुका था तथा हाथी वही के जंगल के अंदर में छिपा बैठा हुआ है

 

सव के मिलते ही आक्रोशित ग्रामीणों ने गोटगावा गणेशपुर के अटल चौक के पास करीब 3 घंटे चक्काजाम कर वन विभाग के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए शासन प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते करने लगे ग्रामीणों ने कहा कि वन विभाग के लापरवाही के वजह से ही लगातार गरीबों का जान जा रहा है जिसके कारण वन विभाग के रेंजर सहित कर्मचारियों का लापरवाही उजागर निरंतर हो रहा है एक के बाद एक मौत से सहमे ग्रामीणों ने उत्तेजित होकर आक्रोश व्यक्त करते हुए वन विभाग को जमकर खरी खोटी सुनाते हुए उनके ऊपर कूद पड़े जिससे माहौल चक्काजाम के तहत अफरा-तफरी की मच गई तत्काल मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया तथा ग्रामीणों के उग्र स्वभाव को किसी तरह से शांत कराया गया तथा ग्रामीणों ने रेंजर सहित कई कर्मचारियों को भी बंधक बनाकर पेड़ के नीचे बैठाया वही उत्तेजित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा वन विभाग सहित मौके पर पहुंची पुलिस के साथ भी जमकर नोकझोंक हुई जिससे माहौल अति उत्तेजित और भयंकर हो गया था

 

ज्ञात हो कि क्षेत्र मैं लंबे समय से इस अकेले हाथी के आतंक से व के प्राणघातक हमले से अब तक करीब 4 लोगों की मौत हो चुकी है वन विभाग की लगातार लापरवाही उजागर हो रही है तथा घटना प्रतापपुर शहर से प्रतापपुर अंबिकापुर मार्ग में सड़क किनारे कि मामला है कई बार तो यह आक्रोशित और खूनी हाथी सड़क के बीचो बीच आकर खड़ा हो जाता है जिससे कई बार यातायात कई घंटे लगातार प्रभावित रहती है जिससे क्षेत्र में हमेशा इस हाथी के उत्पाद से ग्रामीण सहित यातायात करने वालों को भी डर के साए में यातायात करना पड़ता है ज्यादा परेशानी पैदल चलने वाले राहगीर या साइकल में या मोटरसाइकिल में चलने वालों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है

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