October 21, 2021
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हड़ताल पर जाने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की सेवा होगी समाप्त

हड़ताल पर जाने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की सेवा होगी समाप्त

रायपुर, 09 मार्च 2018/छत्तीसगढ़ सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के हड़ताल पर जाने पर अत्यंत कड़ा रवैया अपनाते हुए ऐसे कार्यकर्ताओं सहायिकाओं की सेवा समाप्ति की प्रक्रिया तत्काल आरंभ करने के निर्देश दिए गए है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री ए.के.पाण्डेय ने बताया कि हाल ही बजट सत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की मांगो पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए मुख्यमंत्री जी द्वारा इनके मानदेय वृद्धि की घोषणा व बजट में प्रावधान भी किया गया है। अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य सरकार की ओर से 1000रू. के स्थान पर 2000 रू. दिया जाएगा, जिससे उन्हे भारत सरकार सहित प्रदत्त मानदेय मिलाकर कुल 5000रू. मानदेय प्रतिमाह प्राप्त होगा। इसी प्रकार अब आंगनबाड़ी सहायिकाओं को राज्य सरकार की ओर से 500रू. के स्थान पर 1000रू. दिया जाएगा, जिससे उन्हें भारत सरकार सहित प्रदत्त मानदेय मिलाकर कुल 2500रू. मानदेय प्रतिमाह प्राप्त होगा। इसी प्रकार मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी अब राज्य सरकार की ओर से 500रू. के स्थान पर 1000रू. दिया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की मानदेय वृद्धि के लिए राज्य शासन द्वारा समय-समय पर दिये गये आश्वासनों को पूरा किया गया है। इसके अलावा विधानसभा के बजट सत्र में सरकार के आगामी वर्ष के बजट में विशेष प्रावधान स्वीकृत करते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी ने बजट भाषण में उल्लेख किया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा पूरी होने पर उन्हें 50 हजार रू. एवं सहायिकाओं की सेवा पूरी होने पर उन्हें 25 हजार रू. की राशि प्रदान की जाएगी एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका मानदेय आधारित पद है उनके लिए पेंशन जैसा कोई प्रावधान नहीं है इसलिए यह राशि उनकी सेवा निवृत्त के समय का एक बड़ा सहारा है। इसके अलावा राज्य शासन द्वारा पूर्व से ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को सेवा काल के दौरान आकस्मिक मृत्यु होने पर 10 हजार रूपये के एक्सग्रेशिया अर्थात अनुग्रह राशि की सुविधा, 10 दिवस का विशेष ग्रीष्मकालीन अवकाश, प्रसुति अवकाश, बीमा योजना संबंधी सुविधाएं पूर्व से ही प्रदान की जा रही है। इसके उपरांत भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं द्वारा ऐसी मांगे की जा रही है जो पूर्ण किया जाना संभव नही है। यह भी उल्लेखनीय है कि विभाग द्वारा समय-समय पर पत्रों का उत्तर देने एवं चर्चा करने की पहल की गई है परंतु बार-बार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताआंे सहायिकाओं के हड़ताल पर जाने से बच्चों को होने वाले नुकसान हो देखते हुए यह कड़ारूख अपनाया गया है। यह यह भी उल्लेखनीय है कि सभी कार्यकर्ता हड़ताल पर नही है एवं प्रदेश में 43 हजार 500 से अधिक आंगनबाड़ी केन्द्रों की कार्यकर्ता सहायिका हड़ताल पर नही गई है एवं उनके केन्द्र संचालित है।

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