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जाने आटे में प्लास्टिक का क्या है सच
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर हर रोज कई फोटो, वीडियो और मैसेज वायरल होते हैं. वायरल हो रहे इन फोटो, वीडियो और मैसेज के जरिए कई चौंकाने वाले दावे भी किए जाते हैं. ऐसा ही एक दावा रायपुर के आशीर्वाद कम्पनी के आटे को लेकर किये जाने से क्षेत्र में सनसनी बढ़ गया है.
सोशल मीडिया पर पहुंचे कुछ वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि रोटी का जो निवाला आपके मुंह तक पहुंचता है उस रोटी में प्लास्टिक है. दावे के मुताबिक मुलायम रोटी बनाने के लिए कंपनियां प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रही हैं और सबूत के तौर पर लोग आटे में मिले हुए प्लास्टिक को अलग करते हुए वायरल वीडियो में दिखा भी रहे हैं.

 

अफवाह का सच
अफवाह का सच जानने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र के विशेषज्ञ से संपर्क करने पर उन्होंने बताया, ”प्लास्टिक आटे जैसा कुछ होता ही नहीं है. प्लास्टिक या खुला कोई भी आटा हो बिना गूंदे पानी में घुल जाएंगे. लेकिन जब आप आटे को गूंद लेते हैं तो एक नेटवर्क बनता है. इस नेटवर्क को पॉलीमैरीसेशन बोलते हैं, ये गेंहू में 12 से 14 प्वाइंट होता है.”उन्होंने बताया कि पुरानी या लोकल वैराइटी में 12 से कम हो सकता है, ये जितना कम होता है उतना कम खिंचाव होता है. पैकेट वाले आटे में करीब 12 प्रतिशत ग्लूटेन प्रोटीन होता है. उस प्रोटीन की वजह से इलास्टिसिटी होती है जिसे प्लास्टिक बताया जा रहा है.विशेषज्ञों ने साफ किया कि गेहूं के आटे में जितना ज्यादा ग्लूटेन प्रोटीन होगा आटा उतना ही अच्छा होगा. ज्यादा ग्लूटेन वाले आटे की रोटी भी उतनी ही अच्छी बनेगी. अगर एक किलोग्राम आटा है तो उसमें 100 ग्राम ग्लूटन प्रोटीन होता है. यानि जितना ज्यादा ग्लूटेन उतना ज्यादा खिंचाव.विदित हो कि इन दिनों ”कुछ वीडियो में आटा में प्लास्टिक होने का दावा हो रहा है.. वीडियो में जिसे प्लास्टिक बताया जा रहा है वो असल में एक तरह का प्रोटीन (ग्लूटेन) है. ग्लूटेन गेंहू में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है. ये तत्व आटा गूंथते समय उसको आपस में जोड़कर रखता है . FSSAI रेग्युलेशन के मुताबिक आटे में 6 फीसदी ग्लूटेन होना जरूरी है.”जबकि आटे की लोई में च्इंगम की तरह खिंच रहा तत्व प्लास्टिक नहीं बल्कि गेंहू में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला प्रोटीन ग्लूटेन है।

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