October 18, 2021
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सीएम से आशीर्वाद दिलाने प्रशासन ने बाइज्जत लाया जोड़ों को पर बेइज्जत कर भेजा वापस,सरकारी दहेज में मिला ड्रम ढोना पड़ा नवविवाहित दूल्हा दुल्हन को

सीएम से आशीर्वाद दिलाने प्रशासन ने बाइज्जत लाया जोड़ों को पर बेइज्जत कर भेजा वापस

सरकारी दहेज में मिला ड्रम ढोना पड़ा नवविवाहित दूल्हा दुल्हन को

*११ सौ जोड़ों का लालबाग मैदान में हुआ सामूहिक विवाह*
जगदलपुर/विकास दुग्गड़
. किसी भी व्यक्ति के जिंदगी में शादी का दिन सबसे यादगार होता है। रविवार को बस्तर के करीब ११ सौ आदिवासी युवक-युवतियों के लिए यह दिन अहम रहा। लालबाग मैदान में हुए सरकारी सामूहिक विवाह कार्यक्रम में यह जोड़ें मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के सामने परिणय सूत्र में बांधे। पर इस खास दिन भी प्रशासन के अमानवीय रूख से इन जोड़ों के इस कदर बेइज्जती झेलनी पड़ी कि वे कभी दोबारा इस दिन को याद करना नहीं चाहेंगे। दरअसल सुराज कार्यक्रम के दौरान सामूहिक विवाह का आयोजन राज्य सरकार की उपलब्धियों में इजाफा करने के उद्देश्य से किया गया था। यहीं वजह रही कि मुख्यमंत्री के हाथों इन जोड़ों को आर्शीवाद दिलाने प्रशासन की ओर से बाइज्जत इन जोड़ों को वैवाहिक स्थल लालबाग मैदान तक गाडिय़ों में बिठाकर लाया गया। पर जैसे ही कार्यक्रम निपटा, इन जोड़ों को बेइज्जती से घर वापस भेजा गया। शादी समारोह खत्म होने के तुरंत बाद सरकारी दहेज के तौर पर मिले सामान को अपने कांधे पर ढोकर दुल्हा-दुल्हन की जोड़ी यहां से वापस अपने गांव को लौटते देखे गए। उनके लौटने के लिए उचित व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं की गई थी। नवविवाहित दुल्हन अपने कांधे पर सरकार से मिले ड्रम को ढोकर अपने ससुराल को लौटी।

चार किमी पैदल सफर कर जाना पड़ा
इतने बड़े पैमाने पर जोड़ों को गांव से यहां तक लाने के लिए प्रशासन ने बसों का इंतजाम किया था। इन बसों को सीएम के सुरक्षा के लिहाज से समारोह स्थल से करीब चार किमी दूर धुरगुड़ा में मैदान में खड़ा किया था। दुल्हा-दुल्हन को धुरगुड़ा से पैदल समारोह स्थल तक आना पड़ा। कार्यक्रम खत्म होते ही करीब इतनी ही दूरी पैदल तय करनी पड़ी। इसमें भी सरकारी दहेज में मिला सामान भी ढोकर दुल्हा-दुल्हन को वहां तक जाना पड़ा। यहां पहुंचे जोड़ों ने बताया था, हम छोटे वर्ग से हैं इसलिए प्रशासन के लिए हमारे अहमियत किसी मजदूर से कम नहीं होती। भले ही यह हमारी जिंदगी का सबसे अहम दिन है पर उनके लिए हम सिर्फ महज आंकड़ें हैं। इसलिए इस अहम दिन भी हमें कई किमी पैदल चलकर जाना पड़ रहा है। शासन-प्रशासन के लिए हम महज गणित के आंकड़ें हैं, जिन्हेंं पूरा कर सरकार वाहवाही लूटेगी और उपलब्धियां गिनाएगी।

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