October 18, 2021
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वनों में लग रही है,,आग अधिकारी कर्मचारी लोक सुराज समाधान शिविर में मस्त,,,सालों से पदस्थ अधिकारी कर्मचारी रहने के बावजूद वनों की सुरक्षा भगवान भरोसे।

वनों में लग रही है,,आग अधिकारी कर्मचारी लोक सुराज समाधान शिविर में मस्त।

सालों से पदस्थ अधिकारी कर्मचारी रहने के बावजूद वनों की सुरक्षा भगवान भरोसे।

*लोक सुराज में आवेदन लगे हैं,,5 साल से पदस्थ अधिकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण हेतु शासन प्रशासन मौन।*

*दिनाँक:–21-03-2018*


*संवाददाता:–मोहम्मद जावेद खान करगी रोड कोटा हरित छत्तीसगढ़।*

*करगीरोड कोटा:-* लोक सुराज समाधान शिविर कोटा विकासखंड के सभी अधिकारियों की उपस्थिति आवेदन का समाधान हो रहा हो, नहीं हो रहा हो,पर वहां पर संबंधित विभाग के अधिकारियों का पहुंचना अनिवार्य है, इस बीच अगर कहीं पर आग लग रही है तो लगने दो संबंधित विभाग के अधिकारी कि ड्यूटी लोक सुराज समाधान शिविर में लगी हुई ऐसा ही कुछ पिछले दिनों करपिया जाते समय जंगलों पर पड़ी सूखे पत्तों में आग लगी हुई थी और उस आग को बुझाने वाला वहां पर वन विभाग का कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था आसपास ग्रामीण भी दिखाई नहीं दे रहे थे जंगलों के बीच बसा करपिया का गांव जंगलों और पहाड़ों से घिरा हुआ है।

अभी वर्तमान में उतनी तेज गर्मी नहीं पड़ रही है पर फिर भी एतिहातन सुरक्षा की दृष्टि से वन विभाग फायर वॉच तैयार करती है,जिनमें जंगलों में फैले सूखे पत्तों को अलग किया जाता है, ताकि उसमें गर्मी के दौरान आग ना लगे शासन से वनों की रक्षा के लिए हर वर्ष ग्रीष्म ऋतु में शासन वह शासन प्रशासन के उच्च अधिकारियों द्वारा उपयोगी कदम उठाए जाते हैं ,पर कोटा रेंज के वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी को ऐसी घटनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता जंगल के जंगल कट रहे हैं, वनों में आग लग रही है ,जंगलों में रहने वाले वन्य प्राणी जंगल छोड़कर शहरी क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, पेड़ काटे जा रहे हैं ,वन विभाग की जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं ,और वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों समय की कमी को देखते हुए उस जगह नहीं पहुंच पा रहे हैं,या छत्तीसगढ़ शासन उन्हें उस बात की वेतन नहीं देता है ,उन्हें तो वेतन केवल और केवल कार्यालय में बैठने का दिया जाता है। कार्यालय में बैठकर छूट दी जाती है,किस शासन से आए हुए पैसों का बंदरबांट किस तरह किया जाए कार्यालय में अधिकारियों कर्मचारियों का दिमाग में फील्ड की जगह कार्यालय में कूलर और एसी की ठंडी-ठंडी हवाओं में ज्यादा लगता है, पिछले दिनों ग्राम पंचायत लमकेना में सागौन लकड़ीयों का जखीरा समेत आरा मशीनें जप्त की गई थी जिसमें से कुछ आरा मशीनों को दिखाया गया था बाकि आरा मशीनों को कब छोड़ा गया किसके कहने से छोड़ा गया कैसे छोड़ा गया जांच का विषय है।


55लाख रुपए का बेलगहना का बिल वाउचर वाला मामला मजदूरों के भुगतान के नाम से निकाला गया जिसमें कोटा रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों का नाम भी शामिल है,उसकी भी जांच अब तक नहीं हो पाई है,एसडीओ से इस बारे में जानकारी चाहने पर बताया जाता है कि जांच की फाइल अभी तक उन तक नहीं पहुंची है,रेंजर से पूछने पर पता चलता है कि मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं है ,वरिष्ठ अधिकारी ही बता पाएंगे पूर्व में कुछ समय तक कोटा रेंज में पदस्थ रहे शैलेश कुमार बघेल की ताबड़तोड़ कार्यवाही से कोटा रेंज मैं लकड़ियों की तस्करी करने वाले लोगों पर लगाम कसी थी पर हो सकता है,कोटा रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों को यह सब अच्छा नहीं लगा एक कारण यह हो सकता है,की ताबड़तोड़ कार्रवाई करने से उनसे भी सवाल पूछा जाए कि आपको इतने सालों से रहते हो गए पर आपके द्वारा ऐसी घटनाओं पर अंकुश यह कार्रवाई क्यों नहीं की जाती इससे पहले कि कोई सवाल उनसे पूछा जाता उससे पहले ही उनके द्वारा रटा-रटाया जवाब मिल जाता है की जांच हो रही है जांच जांच ना हुई बीरबल की खिचड़ी हो गई।

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