September 25, 2021
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गोरखपुर: 48 घंटे में फिर 36 बच्चों की मौत

इसी अस्पताल में 10 और 11 अगस्त को 35 बच्चों की मौत हुई थी। इसकी वजह आॅक्सीजन की कमी को बताया गया। इस घटना के बाद गोरखपुर में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति खुद मुख्यमंत्री ने गठित की।

गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में पिछले 48 घंटों में 36 बच्चों की मौत की खबर है। मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) पीके शुक्ल ने इन मौतों की पुष्टि की। लेकिन उनका कहना है कि जापानी इंसेफलाइटिस से 27 और 28 अगस्त को केवल सात बच्चों की मौत हुई। बाकी बच्चों की मौत दूसरी बीमारियों से हुई।
सीएमएस का कहना है कि बीते 48 घंटों में आइसीयू में 15 बच्चे मरे हैं। जबकि दूसरी बीमारियों से मरने वाले बच्चों की संख्या 14 है। जापानी इंसेफलाइटिस से मरने वाले बच्चों की संख्या सात है। अगस्त में बच्चों की मौत की उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह की बात सच साबित हो रही है। प्रत्याक्षदर्शियों का कहना है कि मेडिकल कालेज परिसर में बच्चों के तीमारदार चारों तरफ हैं। अस्पताल के गलियारों, वार्ड के बाहार के बारमदों में तीमारदार जमीन पर बैठे थके हारे सुस्ता रहे हैं। तीमारदारों की यह संख्या यह बताने के लिए काफी है कि बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में इस वक्त कितनी बड़ी संख्या में बच्चों की शक्ल में मरीज भर्ती हैं।

इसी अस्पताल में 10 और 11 अगस्त को 35 बच्चों की मौत हुई थी। इसकी वजह आॅक्सीजन की कमी को बताया गया। इस घटना के बाद गोरखपुर में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति खुद मुख्यमंत्री ने गठित की। जिसमें उन्होंने मीडिया के सामने कहा कि यह समिति एक सप्ताह के भीतर गोरखपुर में हुई बच्चों की मौत के कारणों पर रपट सौंपेगी। मुख्य सचिव की रपट, मुख्यमंत्री के पास पहुंच जाने के बावजूद बीते 48 घंटों में फिर 36 बच्चों की मौत से योगी सरकार की कार्यप्रणालि सवालों के घेरे में है। मुख्य सचिव की रिपोर्ट को पढ़कर कार्रवाई तो कर्मचारियों पर की गई, लेकिन उसमें दिए गए सुझावों पर कोई खास गौर नहीं किया गया। यदि गौर किया गया होता तो 36 बच्चों की मौत के आंकड़े को कम किया जा सकता था।

गोरखपुर मेडिकल कॉजेल में मौजूद सूत्रों का कहना है कि इस वक्त अस्पताल परिसर में सख्ती कर दी गई है। हर आने-जाने वाले पर अस्पताल में तैनात गार्ड और कर्मचारी पैनी नजर रख रहे हैं। किसी को वार्ड के आसपास मोबाइल फोन लेकर जाने से मना किया जा रहा है। ऐसा इसलिए है ताकि कोई मोबाइल फोन से पूरे मामले की फुटेज बनाकर अस्पताल को फिर से कटघरे में खड़ा न करे। इस अस्पताल में बीते 48 घंटों में हुई 36 बच्चों की मौत पर सरकार की अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

 

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