October 18, 2021
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छात्रा सुनीता के साथ इस यूनिवर्सिटी ने किया ऐसा खिलवाड़ कि वह अब नहीं हो सकती ग्रेजुएट!

छात्रा सुनीता के साथ इस यूनिवर्सिटी ने किया ऐसा खिलवाड़ कि वह अब नहीं हो सकती ग्रेजुएट!

बीए अंतिम की परीक्षा में शामिल होने ऑनलाइन किया था आवेदन, विवि की इस लापरवाही से मुख्य परीक्षा से वंचित हो गई छात्रा

सूरजपुर. सरगुजा विश्वविद्यालय का फिर एक नया कारनामा सामने आया है। इसकी वजह से बीए अंतिम की एक छात्रा मुख्य परीक्षा से वंचित हो गई। दरअसल छात्रा ने बीए फाइनल की परीक्षा के लिए ऑनलाइन फॉर्म और निर्धारित परीक्षा शुल्क जमा किया था, लेकिन विश्वविद्यालय ने बीए फाइनल की जगह एमए फाइनल ईयर की परीक्षा का प्रवेश पत्र जारी कर दिया।

परिणामस्वरूप छात्रा को बीए फाइनल की परीक्षा वंचित ही नहीं होना पड़ा, बल्कि पूरा एक वर्ष और फाइनल की परीक्षा का अंतिम अवसर भी खोना पड़ा। ऐसे में वह अब ग्रेजुएट नहीं हो सकती।

गौरतलब है कि जिले के रामानुजनगर विकासखंड के ग्राम गोपीपुर निवासी संगीता पिता विश्वनाथ ने सूरजपुर स्थित पंडित रेवतीरमण मिश्र शासकीय महाविद्यालय से संपर्क कर निर्धारित समयावधि में बीए अंतिम वर्ष की प्राइवेट परीक्षा में सम्मिलत होने ऑनलाइन आवेदन भरा था और आवेदन स्वीकृत होने के बाद नियमानुसार 1770 रुपए और 530 रुपए शुल्क के रूप में जमा किए थे।

छात्रा संगीता ने बीए अंतिम वर्ष में इतिहास, राजनीति शास्त्र व समाज शास्त्र विषय को चिन्हांकित कर परीक्षा फॉर्म भरा था। लेकिन हमेशा की तरह विवादों में रहने वाली सरगुजा यूनिवर्सिटी ने इस छात्रा के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए उसे बीए अंतिम के स्थान पर एमए अंतिम अंग्रेजी विषय की परीक्षा का प्रवेश-पत्र जारी कर दिया।

विश्वविद्यालय की गलती का नतीजा यह निकला कि सूरजपुर महाविद्यालय प्रबंधन ने उसे शनिवार को परीक्षा से वंचित कर दिया। जबकि विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने छात्रा को मौखिक रूप से आश्वस्त किया था कि वह सूरजपुर महाविद्यालय को परीक्षा में शामिल करने निर्देशित कर देंगे।

अंतिम अवसर भी निकला हाथ से
बीए अंतिम वर्ष की परीक्षा देने का संगीता के पास यह आखिरी अवसर था। विश्वविद्यालय की इस लापरवाही के कारण संगीता का एक वर्ष तो बर्बाद होता दिख ही रहा है, अगर इस परीक्षा में उसे बैठने की अनुमति नहीं मिली तो फिर कभी भी आगे की परीक्षा नहीं दे पाएगी, क्योंकि विवि के नियमों के अनुसार पांच वर्ष के अंदर स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करना है और संगीता का यह पांचवां यानि अंतिम वर्ष है।

एक पेपर छूटा, लेकिन शेष में मिले अनुमति
विश्वद्यिालय की गलती का खामियाजा भुगत कर परीक्षा से वंचित हो रही संगीता बहुत दुखी है। इसके बावजूद उसका हौसला कम नहीं हुआ है, वह कहती है कि एक प्रश्न पत्र छूट गया है, तो क्या हुआ, यदि आगे बचे शेष विषयों की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिल जाती तो उसे उच्च शिक्षा से वंचित नहीं होना पड़ता।

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