October 26, 2021
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ब्राम्हण की बनाई मजार बनी साप्रदायिक सौहाद्र की मिसाल सालाना उर्स के मौके पर सभी समुदाय के श्रध्दालुओं की भीड़

ब्राम्हण की बनाई मजार बनी साप्रदायिक सौहाद्र की मिसाल
सालाना उर्स के मौके पर सभी समुदाय के श्रध्दालुओं की भीड़

हरितछत्तीसगढ़ विवेक तिवारी

पत्थलगांव/ पत्थलगांव के समीप ग्राम मदनपुर इंजकों में एक ब्राम्हण परिवार व्दारा बनाई गई बाबा सुलतान पीर की मजार पर गुरूवार को आयोजित सालाना उर्स के अवसर में सभी वर्ग के लोग श्रध्दा भक्ति के भाव से मन्नत मांगने पहुंचे थे। इस मजार पर ऐसे भी सैकड़ो लोग थे जिनकी मन्नतें पूरी होने के बाद वे खुशी के साथ अपने परिवार सहित बाबा सुल्तान पीर को चददर चढ़ाने वालों की कतार में खड़े थे।
पत्थनगांव किलकिला मार्ग पर मदनपुर इंजकों गांव में स्थित पीर बाबा की सुबह पूजा समाप्त होते ही मजार पर सेवा करने वालों ने वहां एकत्र गरीब और जरूरतमंदों को चददर बांटी गई तथा उन्हे भोजन भी कराया गया। यहां पर उंच नीच और जाति धर्म की दीवारों से अलग हट कर पीर बाबा के भक्त भी एक ही कतार में प्रसाद ग्रहण कर रहे थे। यहां पर बीते 20 वर्षो से पीर बाबा का सालाना उर्स के अवसर पर हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख और ईसाई समुदाय के लोग बगैर भेदभाव के इकटठा होते हैं। छोटी छोटी बातों को बेवजह तुल देकर सांप्रदायिक सौहाद्र और आपसी भाईचारे के माहौल में आ रही कमी के बीच पत्थलगांव में हजरत सुलतान पीर की मजार सांप्रदायिक सदभाव की अनूठी मिशाल बन गई है।
यहां पर बाबा सुलतान पीर की मजार की स्थापना करने वाले पं.रामधारी शर्मा के बड़े पुत्र अशोक शर्मा का कहना है कि अल्लाह,भगवान और प्रभु को अलग अलग नामों से पुकारा जाने वाला ईश्वर एक है। उन्होने कहा कि यहां पर विश्वास और आस्था र्की इंट स्थापित करने के बाद यहां सभी वर्ग के श्रध्दालुओं की भीड़ ने इस बात को पुख्ता कर दिया है। पंडित अशोक शर्मा पत्थलगांव में अनाज व किराने के साधारण व्यवसायी हैं। लगभग दो दशक पहले अशोक शर्मा की मां श्रीमती गीता शर्मा को असाध्य रोग कैंसर ने बुरी तरह से जकड़ लिया था। गीता शर्मा के गले में हुए कैंसर का इलाज कराने में इस मध्यम वर्गीय परिवार ने अपनी सारी कमाई दवा और डाक्टरों की फीश में झोंक डाली थी।।इसके बाद भी यह परिवार कैंसर मरीज को लेकर शहर शहर भटकता रहा।श्री शर्मा ने बताया कि कैंसर का इलाज पर होने वाला भारी भरकम खर्च से उनका परिवार अच्छे खासे कर्ज के बोझ तले दब गया था। रायपुर और भिलाई के डाक्टरों ने इस मरीज की दशा देख कर उसके परिजनों को साफ कह दिया था कि अब वे दवा के साथ दुआ का भी सहारा ले लें, ताकि मरीज कुछ दिन और अपने परिवार के बीच रह सके।
श्री शर्मा ने बताया कि असाध्य रोग से जूझने के दौरान जब वे थक गए तो मंदिर मस्जिद में जाकर दुआ मांगने लगे। इस दौरान किसी ने सलाह दी कि उनका पैतृक गांव हरियाण स्थित बरनाला जिले का नन्थला गांव में सुलतान पीर बाबा के दरबार में जाकर फरियाद करो तो मरीज को कुछ राहत मिल सकती है। इस विश्वास को लेकर अशोक शर्मा ने सुलतान पीर बाबा की हरियाण स्थित मजार पहुंच कर दुआ मांगी और वहां की एक ईंट भी लेकर पत्थलगांव आ गए। श्री शर्मा ने बताया कि इसी ईंट के समीप चार चिराग दीप जलाकर उसने पूजा अर्चना शुरू की थी तो घर में चमत्कारिक ढंग से परिवर्तन होने लगा। इसके साथ उसकी मां की दिनो दिन बिगड़ती स्थिति में भी सुधार होने लगा। मरीज की हालत सुधरने के बाद उसने मुंबई जाकर कैंसर अस्पताल में श्रीमती गीता शर्मा के गले का आपरेशन कराया था। यहां पर आपरेशन सफल होने के बाद भी मुंबई के चिकित्सकों ने मरीज को दो तीन साल तक ही बच पाने की उम्मीद जाहिर की थी।श्री शर्मा ने कहा कि आपरेशन सफल हो जाने के बाद उनका विश्वास सुदृढ़ होने लगा था। कैंसर मरीज की हालत में लगातार सुधार को देख कर श्री शर्मा ने हरियाण से लाई गई ईंट को नींव में रख कर यहां सुलतान पीर की मजार स्थापित करा दी थी। उन्होने कहा कि यह काम सहज तो नहीं था पर विश्वास के बलबूते पर सब कुछ सरल होते गया। सबसे दिलचस्प बात यह है कि बाबा की दुआ से कैंसर पीड़ित महिला श्रीमती गीता शर्मा ने लगभग दो दषक तक का लम्बा समय तक अपने परिवार के साथ खुशी का जीवन व्यतित किया।
मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं चददर
आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहाद्र की मिसाल बन चुकी इस मजार के साथ आज सैकड़ों लोग जुड़ चुके हैं। नगर के पार्षद विषु शर्मा ने बताया कि पत्थलगांव में पीर बाबा की मजार पर आयोजित सालाना उर्स के मौके पर आस पास के अन्य जिलों से भी विभिन्न समुदाय के लोग मन्नत मांगने पहुंचते हैं।यहां पर आने वाले श्रध्दालुओं की मन्नत पूरी होने पर उनके व्दारा बाबा की मजार में आकर चददर चढ़ाई जाती है। साल भर चढ़ाई गई इन चददरों को सालाना उर्स के दिन गरीब तथा जरूरतमंद लोगों के बीच में बांट दिया जाता है। बाबा की मजार पर मुस्लिम समुदाय का मुजावर व्दारा नियमित रूप से पूजा की जाती है। इसके अलावा पीर बाबा की मजार को स्थापित करने वाला शख्स अशोक शर्मा प्रतिदिन शाम होते ही मजार की साफ सफाई कर वहां रखे चार चिरागों को रोशन कर बाबा की इत्र लुभान से पूजा करता है। प्रत्येक गुरूवार और शुक्रवार को यहां शाम होते ही श्रध्दालुओं का तांता लग जाता है।पत्थलगांव वार्ड 7 के गुरूचरण सिंह भाटिया का कहना था कि पीर बाबा की मजार आपसी भाईचारा और सांप्रदायिक सौहाद्र की मिषाल का अदभूत नमूना हैं।यहां अनेकता में एकता का नजारा देख कर ही लोगों का आत्मविष्वास बढ़ जाता है।

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