October 20, 2021
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धुमधाम से मनाया गया हनुमान जयंति, विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन

धुमधाम से मनाया गया हनुमान जयंति, विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन
हरितछत्तीसगढ़, विवेक तिवारी

पत्थलगांव। हनुमान जयंती पर नगर के कई स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। यहां के वार्ड 9 बिलाईटांगर के हनुमान मंदिर चैक स्थित मंदिर में अखंड रामायण का आयोजन किया गया। वहीं जयंती के अवसर पर शनिवार को यहां विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
बिलाईटांगर चैक स्थित हनुमान मंदिर में बीते दो दशक से अखंड रामायण का पाठ किया जाता है। इस बार भी शुक्रवार से पाठ प्रारंभ कर दिया गया है। इसे लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। यहां हो रहे अखंड पाठ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। इसमें महिलाओं की भी खासी संख्या है। श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में 24 घंटों तक निरंतर अखंड रामायण का विधिवत पाठ किया गया। हनुमान जयंती को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल था। इसके लिए हनुमान मंदिरों को विशेष तौर पर सजाया गया था। यहां श्री हनुमान के दर्शन के लिए प्रातः से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था।यहां इस पर्व के लिए विशेष तौर पर प्रसाद बूंदी और लड्डू का प्रसाद चढ़ाए गये। लोग यहां आकर भगवान को प्रसाद अर्पित कर रहे थे। हनुमान मंदिर में स्थानीय नागरिकों द्वारा अखंड रामायण का पाठ भी किया गया। यहां भी प्रातः से ही दर्शनार्थियों का तांता लगा हुआ था। मंडी मैदान स्थित शनि मंदिर में भी लोग श्री हनुमान का दर्शन करने पहुंचे। अयोजकों ने बताया कि अखंड रामायण पाठ के आवश्यक नियम होते हैं और पाठ के समय इनका पालन करना अनिवार्य होता है। सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि जब तक पाठ पूरा न हो जाय तब तक अनवरत पाठ चलना चाहिए बीच में कोई रुकावट नहीं होना चाहिए।

यहां राम भक्त डाॅ. संतोष पटेल ने बताया कि तुलसीदास जी ने हनुमानजी के बारे में लिखा है कि भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्रजी के काज संवारे।। यानी रामजी सबके काम बनाते हैं लेकिन उनके काम हनुमान जी बनाते हैं यही कारण है कि रामजी के अवतार लेने के 6 दिन बाद ही रुद्र ने अपना ग्यारहवां अवतार हनुमान रूप में धारण कर लिया। रूद्र यानी भगवान शिव राम के परम भक्त हैं। जब भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में पृथ्वी पर असुरों के विनाश के लिए सामान्य मनुष्य के रूप में अवतार लिया तो वह चिंतित हो उठे और अपने प्रभु की सहायता के लिए स्वयं भी अवतार धारण करके पृथ्वी पर आ पहुंचे।

यहां आयोजन समिति के प्रमुख सदस्यों सदानंद मैत्री, बिंदेश्वरी शर्मा, डाॅ. संतोष पटेल, धोबा राम, रामकुमार पटेल, राव गुरुजी रामकुमार, प्रकाश, छोटेलाल गुप्ता, विशाल राजपूत, अवधेश गुप्ता, राजू पटेल, दामोदर शर्मा, कमलेश यादव, जयपाल सिंह, विवके तिवारी सहित कई भक्तों ने अपना सहयोग प्रदान किया।

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