July 26, 2021
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सरकारी स्कूलों में नया प्रयोग, गाकर बच्चे सीखेंगे संस्कृत

संस्कृत विषय में आमतौर पर बच्चे रुचि नहीं लेते, लेकिन अब यह विषय रोचक बनाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।

दुर्ग। संस्कृत विषय में आमतौर पर बच्चे रुचि नहीं लेते, लेकिन अब यह विषय रोचक बनाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। दुर्ग जिले में संस्कृत को सरल बनाने और रोजगारोन्मुखी बनाने की दिशा में नया अभिनव प्रयोग होने जा रहा है। यहां के 386 सरकारी स्कूलों में बच्चों को खेल-खेल में संस्कृत सिखाई जाएगी। गाना गाएंगे संस्कृत में, और तो और मध्या- भोजन करेंगे तो भी संस्कृत बोलेंगे। शिक्षक और विद्यार्थी आपस में बातचीत भी संस्कृत में करेंगे।

छत्तीसगढ़ विद्या मंडलम् (बोर्ड) और दुर्ग जिला शिक्षा विभाग का संयुक्त प्रोजेक्ट सितंबर में लागू होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ के इस पहले प्रोजेक्ट को प्रायोगिक तौर पर लिया गया है। सफल होने पर पूरे छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में लॉन्च किया जाएगा। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट को छत्तीसगढ़ विद्या मंडलम् के सदस्य आचार्य नीलेश शर्मा ने तैयार किया है, जो दुर्ग के ही हैं। शर्मा के प्रोजेक्ट को बोर्ड ने मंजूरी दी है।

40 हजार विद्यार्थियों के बीच होगा प्रयोग

दुर्ग जिले के सरकारी स्कूलों में 40 हजार विद्यार्थी संस्कृत विषय लेकर पढ़ रहे हैं। छठवीं से लेकर दसवीं तक संस्कृत अनिवार्य विषय है। ग्यारहवीं और बारहवीं में वैकल्पिक विषय के रूप में विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। जैसे ही विद्यार्थी ग्यारहवीं कक्षा में जाता है, ज्यादातर विद्यार्थी संस्कृत विषय को जटिल मानकर इसे नहीं पढ़ते। कॉलेज में प्रवेश करते तक ऐसे विद्यार्थियों की संख्या और कम हो जाती है।

153 संस्कृत शिक्षक बनेंगे मास्टर ट्रेनर

संस्कृत बोर्ड और जिला शिक्षा विभाग द्वारा इस प्रोजेक्ट के तहत 153 संस्कृत व्याख्याताओं को संस्कृत संभाषण कार्यशाला के माध्यम से ट्रेंड किया जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर बनकर मिडिल स्कूलों के संस्कृत विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों को स्कूल में जाकर तौर-तरीके बताएंगे। कार्यशाला में खासतौर पर प्रशिक्षण देने राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान नईदिल्ली के लोकेश जैन आएंगे। वे प्रोजेक्टर के माध्यम से शिक्षकों को सात दिनों तक गुर सिखाएंगे।

इस तरह सीखेंगे संस्कृत

संस्कृतेन- संस्कृतेन सम्भावनं कुरू… धिक् धिक् ताना धिक् धिक् तै: धिकृ तै तै तो: … इस तरह सुर में संस्कृत के शिक्षक गीत गाएंगे और बच्चों को भी इसी तरह की प्रैक्टिस कराएंगे। इसी तरह बच्चे जब भी खेल खेलेंगे तो वे खेलते समय संस्कृत में बोलेंगे। मसलन सांप सीढ़ी को सर्प जालम्, शतरंज को चुतुरंगिनी, गोला फेंक को लौह प्रहार, तैराकी को अवगाहन प्रतियोगिता और कबड्डी को स्पर्शक्रीड़म् संबोधित करेंगे।

मध्यान्‍ह भोजन के समय इस तरह करेंगे बात

मध्यान्‍ह भोजन के समय भी बच्चे संस्कृत में इस तरह बोलचाल करेंगे। चटाई में बैठिए तो बोलेंगे कहे उपविशतु। गिलास रखिए को कहेंगे चसक: स्थापयतु। रोटी खाइये कहना है तो रोटिका खादतु। बच्चे दाल मांगेंगे तो बोलेंगे शूर्पम् ददातु। चावल मगाएंगे तो ओदनम् आनयतु। पापड़ को पर्पटिका, गिलास को चसक:, सब्जी को शाकम्, नमक को लवणम्, थाली को स्थालिका कहकर संस्कृत को आम बोलचाल में लाने की सीख मिलेगी।

रोजगार से जोड़ने सिलेबस हो रहा तैयार

छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मंडलम् के अध्यक्ष परमानन्द गिरी बताते हैं कि हाईस्कूल से हायर सेकंडरी स्कूल में संस्कृत को सरल बनाने और उसे रोजगारोन्मुखी बनाने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। संस्कृत विषय लेने वाले विद्यार्थियों को ज्योतिष, कर्मकांड और वास्तुशास्त्र की भी शिक्षा दी जाएगी, ताकि संस्कृत विषय को लेकर पढ़ने वाले विद्यार्थी आगे चलकर इन तीनों क्षेत्रों में आजीविका चला सकें। उन्होंने बताया कि परम्परागत पैटर्न पर अभी तक संस्कृत विषय पढ़ाए जा रहे हैं। वह व्यावहारिक पैटर्न में नए पाठ्यक्रम तैयार कराए जा रहे हैं।

हर महीने होगी मॉनिटरिंग

दुर्ग जिले में संस्कृत विषय को सरल तरीके से पढ़ाने के प्रोजेक्ट को संस्कृत बोर्ड ने मंजूरी दी है। यह राज्य का पहला प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट को लोक शिक्षण संचालनालय को भी भेजा जाएगा। बोर्ड के सदस्य हर महीने स्कूलों में मानिटरिंग करेंगे।

-आचार्य निलेश शर्मा, सूत्रधार प्रोजेक्ट

खबर सूत्र नईदुनिया

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