September 25, 2021
Breaking News

किसान मजदूर महासंघ सरकार के फैसले से नाखुश, 2 सालों के बोनस की मांग

धान पर बोनस दिए जाने के बावजूद छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ सरकार के फैसले से नाखुश है. आदेश जारी होने के बाद संयोजक मंडल की आपात बैठक बुलाई गई. दरअसल किसान पिछले दो सालों का बोनस देने की मांग कर रहे हैं. साथ ही सूखे के कारण किसानों को हुए आर्थिक नुकसान की क्षतिपूर्ति करने की भी मांग की है. किसान महासंघ ने कहा है कि अगर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो प्रदेश के बड़ा आंदोलन किया जाएगा । छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के संयोजक राजकुमार गुप्त ने कहा की पांच साल तक बोनस देने का वायदा करके दो साल बोनस देने की घोषणा से किसानों का सरकार के खिलाफ असंतोष कम नहीं होगा,समर्थन मूल्य 21 सौ रूपये करने का वायदा पूरा करने के बजाय 3 सौ रूपये बोनस देकर सरकार एक साल में 21 सौ करोड़ बचाने के फिराक में है,किसान सूखा के संकट का सामना कर रहे हैं, बोनस की घोषणा करके सरकार सूखा राहत से किसानों का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है,सरकार की घोषणा में ऐसा कुछ नहीं है जिसका किसान स्वागत करे

रमन सरकार द्वारा किस्तों में दो साल का बोनस देने की घोषणा पर छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन ने उक्त प्रतिक्रिया व्यक्त किया है,
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के संयोजक राजकुमार गुप्त, अध्यक्ष आई के वर्मा, बद्रीप्रसाद पारकर, बाबूलाल साहू, मेघराज मढ़रिया, बंशी लाल देवांगन, परमानंद यादव ने कहा है कि सरकार की मंशा चुनावी वायदा पूरा करने के बजाय खैरात बांटकर किसानों के असंतोष को कम करके चुनावी लाभ उठाना है, लेकिन इसमें सरकार के दामन में लगा वायदा खिलाफी का दाग साफ होने वाला नहीं है, किसान संगठन के नेताओं का कहना है कि यदि सरकार बोनस के बजाय 21 सौ रूपये समर्थन मूल्य में धान का एक एक दाना इसी सत्र से खरीदने का वायदा पहले पूरा करती तो किसानों को बोनस के तुलना में दो गुनी राशि मिलती लेकिन सरकार ने बोनस देने की घोषणा करके भी 21 सौ करोड़ रुपये बचा लिया, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन ने सरकार को आगाह किया है कि सिर्फ बोनस देने की घोषणा से स्वामीनाथन आयोग की अनुसंधान, 21 सौ रूपये समर्थन मूल्य, किसानों की कर्जमुक्ति, धान का एक एक दाना खरीदने, 24 घंटे निशुल्क बिजली, सूखा राहत, आदि मुद्दों से किसानों का ध्यान भटकाने में कामयाब नहीं हो सकती है, इन मुद्दों पर सरकार के खिलाफ किसानों का संघर्ष जारी रहेगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *