October 18, 2021
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बेमौसम ओला वृष्टि से हजारों एकड़ में लगी मिर्च एवं अन्य सब्जी की फसल बर्बाद 

बेमौसम ओला वृष्टि से हजारों एकड़ में लगी मिर्च एवं अन्य सब्जी की फसल बर्बाद

रिपोर्टर:-डमरू कश्यप,व, हरिसिंह ठाकुर/पंडानार/(बकावण्ड,बस्तर)

फ़ोटो संलग्न है।**

पीडि़त किसान कर्ज के कारण दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर, पीडि़त किसानों का कहना है कि अगर शासन हमे मदद नही करती है तो हम आत्महत्या करने को मजबूर हो जावेंगे
पिछले दिनों पूरे बस्तर जिले में हुए बेमौसम बरसात एवं ओला वृष्ठि ने क्षेत्र के किसानों के कमर को तोड़ दिया। लगातार तीन दिन हुए बरसात एवं ओला वृष्टि से बस्तर जिले के हजारों एकड़ जमीन में लगी रबी की फसल एवं कीमती सब्जियां खराब हो गई। अब हालात यह है कि ओले के कारण खराब हुई सब्जियां बाजार में बिकने के काबिल नहीं रही। ८० रुपये से १०० रुपये बिकने वाली मिर्ची की फसल ओला वृष्टि के कारण दागदार हो गई जिसका बाजार में अब कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। परेशान किसान नरपति गजेल ग्राम नंदपुरा का कहना है कि मैने करीब दो एकड़ में मिर्ची की फसल ली थी। फसल जब पूरी हुई एवं बाजार में बिकने के काबिल थी उसी समय बेमौसम बरसात एवं ओला वृष्टि के कारण पूरी फसल ही लगभग चौपट हो गई। ऐसा ही बकावण्ड ब्लाक के अंतर्गत ग्राम पंचायत कोसमी के बैदार पिताम्बर कश्यप ने भी कहा मैं भी करीब करीब 20 हेकड़ में मैं भी मिर्ची लगाया था मेरा हाल भी बाकि किसानो के जैसा है। बाजार में अब इस मिर्च के अनाब-सनाब मूल्य में भी लेने कोई तैयार नहीं है। मैने बैंक एवं अन्य माध्यमों से कर्जा लेकर मिर्ची की फसल लगाई थी जो पूरी तरह से चौपट हो गया। इसी प्रकार ग्राम केसरपाल के किसान अचल बाजपेई का कहना है कि हमने भी कई एकड़ में मौसमी सब्जी एवं मिर्च की फसल लगाई थी अंतिम वक्त पर मौसम की मार ने हम लोगों की कमर तोड़ कर रख दी है। अब हालात यह हैं कि पहले सब्जी कोचिये हमारे खेत तक आकर वाजिब मूल्य में सब्जी एवं मिर्च की फसल खरीदा करते थे परन्तु अब हालात बदले से हैं। हम ये फसल लेकर बाजार बेचने को जाते हैं किन्तु ओले की मारसे दागदार फसल को लेने को कोई तैयार नहीं। इसी प्रकार निरघत ठाकुर, फरेन्द्र ठाकुर, उमेश जोशी, तिलेश जोशी, पप्पू जोशी, अनुज पांडे ऐसे किसान है जिन्होंने अपनी सारी मेहनत की कमाई एवं कर्ज लेकर मिर्च एवं मौसमी सब्जी की फसल लगाई थी लेकिन बेमौसम बरसात ने एक ही झटके में हमारे सारे मंसूबों पर पानी फेरते हुए हमे कर्जदार बना दिया। इन सभी किसानों का कहना है कि जिला प्रशासन इस बेमौसम बरसात के कारण हुए खराब फसल का मूल्यांकन कर हमे मुआवजा दिलवाये ताकि हम अपने कर्ज की क्षतिपूर्ति कर सके। अत: अब हमारे सामने आत्महत्या के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है।

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