October 18, 2021
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माता पिता के सड़क दुर्घटना में मरने के 4 साल बाद लिया बच्चे ने जन्म

माता पिता के सड़क दुर्घटना में मरने के 4 साल बाद लिया बच्चे ने जन्म

तमाम कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद मृतक के परिजनों को उनके बच्चे को इस दुनिया में लाने का अधिकार मिला. बच्चे के जन्म के लिए उन्हें अपना देश तक छोड़ना पड़ा.

कार दुर्घटना में मारे गए चीन के एक जोड़े ने चार साल बाद सरौगेसी की मदद से एक बच्चे को जन्म दिया. चीनी मीडिया के मुताबिक 2013 में एक्सिडेंट में मारे गए जोड़े ने आईवीएफ के माध्यम से एक बच्चे को जन्म देने के लिए भ्रूण जमा किए थे. दुर्घटना के बाद, उनके माता-पिता ने भ्रूण का इस्तेमाल करने की अनुमति के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और उसके बाद दिसंबर 2017 में बच्चे का जन्म हुआ.इस मामले को रिपोर्ट करते हुए बीजिंग न्यूज ने बताया कि कैसे कानून व्यवस्थाओं में कमी के कारण मृतक के माता-पिता को किराए की कोख से बच्चे को जन्म देने के लिए बहुत लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी.

भ्रूण का अधिकार पाने के लिए परिजनों ने लड़ी लड़ाई

दुर्घटना के समय भ्रूण को चीन के नानजिंग अस्पताल में माइनस 196 डिग्री पर नाइट्रोजन टैंक में स्टोर किया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद मृतक के माता-पिता को फर्टिलाइज्ड एग्स का अधिकार मिला. लेकिन यह नहीं बताया गया कि वह अपने बच्चे के भ्रूण को अपने जीवन में ला सकते हैं या नहीं. उन्हें भ्रूण का अधिकार तो मिल गया उसके बाद और परेशानी खड़ी हो गई. वे भ्रूण को नानजिंग अस्पताल से तभी ले सकते थे जब उनके पास सबूत हो कि कोई और अस्पताल उसे स्टोर करेगा. लेकिन कानूनी पचड़े के कारण किसी भी अस्पताल को भ्रूण रखने के लिए तैयार करना बहुत मुश्किल था. चीन  में सरोगेसी के अवैध होने के कारण एक ही रास्ता था कि ऐसा कुछ करने के लिए चीन की सीमा पर लगे देशों में अस्पताल ढूंढा जाए.तमाम खोज के बाद लाओस में एक सरौगेसी एजेंसी का पता चला जहां कॉमर्शियल सरोगेसी कानून था और उन्होंने भ्रूण को वहां लाने की कवायद शुरू कर दी लेकिन कोई भी एयरलाइन उसे लाने के लिए तैयार नहीं हुई और अंत में भ्रूण को कार से लाया गया. लाओस पहुंचने के बाद भ्रूण को किराए की मां के गर्भ में प्रत्यारोपित किया गया और दिसंबर 2017 को बच्चे का जन्म हुआ जिसका नाम टिएटियन रखा गया.पितृत्व और राष्ट्रियता साबित करने में भी उठानी पड़ी जहमतबच्चे के जन्म के बाद उसे चीन का नागरिक साबित करने को लेकर भी परिजन को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. चूंकि बच्चे का जन्म चीन की जगह लाओस में सरोगेसी से हुआ था तो चीनी सरकार उसे अपने देश का नागरिक मानने को तैयार नहीं थी और उसे चीन जाने के लिए टूरिस्ट वीजा मिला. बच्चे के माता-पिता के  जिंदा ना रहने के कारण उसके दादा-दादी और नाना-नानी को अपने डीएनए की जांच करवानी पड़ी तब जाकर ये साबित हुआ कि टिएटिएन उनका वारिस है और उसके मृतक माता-पिता चीनी नागरिक थे.

Source-news18

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