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जाने ब्रिटेन दौरे पर लंदन में भारत की बातें सबके साथ कार्यक्रम मे pm मोदी ने क्या क्या कहा…

मेरा देश अजर अमर है. दुनिया याद करे तो मेरे देश को याद रखें- pm मोदी

ब्रिटेन के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंदन में भारत की बात सबके साथ कर रहे हैं. प्रधानमंत्री के साथ गीतकार और लेखक प्रसून जोशी उनसे बात कर रहे हैं. कार्यक्रम का आयोजन सेंट्रल हॉल वेस्टमिंस्टर में हो रहा है. यहां पर उन्हें सुनने के लिए काफी संख्या में लोग मौजूद हैं, जिन्हें इस कार्यक्रम के लिए पास जारी किया गया है।

कार्यक्रम के अंत में प्रसून ने एक और कविता पढ़ी-

एक आसमां कम पड़ता है

और आसमां मंगवा दो

हेम हैं, बेसब्र उड़ाने मेरी

पंख मेरे नीले रंगवा दो…

इस पर मोदी ने राजा रंथीदेव को उद्धृत करते हुए कहा कि न मुझे राज्य की कामना है, न मोक्ष की कामना है, अगर मेरे हृदय में कामना है, तो सिर्फ दुखी दरिद्रों की भलाई की कामना है।

विपक्ष के सत्ता हासिल करने के सवाल पर मोदी ने कहा कि आलोचना लोकतंत्र की खूबसूरती है. मैं मानता हूं कि मोदी सरकार की भरपूर आलोचना होनी चाहिए।

आलोचना से ही लोकतंत्र पनपता है. और सरकारों को भी सतर्क रखती है. इसलिए अगर कोई आलोचना करता है, तो मैं इसे सौभाग्य मानता हूं. लेकिन आलोचना करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, अब आज ऐसी आपाधापी का समय है कि लोगों के पास ही नहीं है. लोगों ने आलोचना के बजाय आरोप लगाना सीख लिया है. ये स्वस्थ लोकतंत्र के लिए खतरनाक है. आलोचना होनी चाहिए लेकिन आरोपों से बचना चाहिए. मैं हमेशा आलोचना का स्वागत करता हूं. बहुत लोगों ने मुझे बनाया है. लोगों की मेहनत को मैं मिट्टी में नहीं मिलने दूंगा।

इतिहास आपको कैसे याद रखें? इस सवाल पर मोदी ने कहा कि किसी को याद है कि वेद किसने लिखे थे. दुनिया के सबसे पुराने ग्रंथ. अगर इतने बड़े रचयिता का नाम किसी को याद नहीं है, तो मोदी क्या है. इतनी सी छोटी चीज है. इतिहास में अपनी जगह बनाने के लिए मोदी पैदा नहीं हुआ है. मुझे सवा सौ करोड़ भारतीयों की तरह ही याद रखा जाए. अन्य लोगों की तरह मुझे भी काम मिला है. मकसद है तो मेरा देश अजर अमर है. दुनिया याद करे तो मेरे देश को याद रखें. मेरा देश ही दुनिया को विश्व कल्याण का रास्ता दिखा सकता है।

नए भारत और न्यू वर्ल्ड ऑर्डर के सवाल पर मोदी ने कहा कि आज यहां बैठे लोग इस बात को महसूस करते होंगे कि आपके पासपोर्ट की ताकत बढ़ी है कि नहीं. आपके प्रति लोग गर्व के साथ देखते हैं कि नहीं. हिंदुस्तान पहले भी था, लेकिन अब बदलाव महसूस होता है कि नहीं. आज पूरे विश्व में भारत को लोहा माना जाता है. भारत ने अपनी नीतियों के द्वारा संतुलित व्यवहार के द्वारा. भारत ने सबको खुश करने की रणनीति छोड़ दी है. हमने तय किया कि हमें जब फिलीस्तीन जाना है और कब इजरायल जाना है. मैं सऊदी अरेबिया भी जाऊंगा और देश की सिक्योरिटी के जरूरी है, तो मैं ईरान भी जाऊंगा।

मोदी ने कहा कि आप कल्पना कर सकते हैं कि 23 साल तक कोई यूएई नहीं गया. कौन रोकता था आपको, आज विश्व के सभी देशों के साथ, मेरी आलोचना होती थी कि मोदी, चाय बेचने वाला विदेश नीति क्या समझेगा, लेकिन आज चार साल के बाद कोई ये सवाल नहीं उठा सकता है. इसका कारण ये नहीं है कि मोदी के पीछे सवा सौ करोड़ भारतीय हैं. मुझे विश्वास है कि मैं दुनिया को भारत का सत्य समझा सकता हूं. प्रिंस चार्ल्स भारत आकर निजी तौर पर मुझे निमंत्रण देकर गए, उन्होंने मुझे निजी रूप चिट्ठी लिखी. भारत ने अपने व्यवहार के द्वारा किसी भी भेदभाव के बिना, दुनिया के किसी भी देश के साथ भारत ने न किसी के साथ आंख झुकाकर बात की और न किसी के साथ आंख उठाकर की, बल्कि आंख मिलाकर बात की. आज वैश्विक स्तर भारत लीडर के रूप में उभरा है. भारत अपना प्रोफाइल एक नए विश्वास के साथ पैदा कर रहा है।

देश जिस हालत में था आपको याद रखना होगा. 2001 में मैं पहली बार सीएम बना. मैं कभी पुलिस थाने में नहीं गया था, सरकारी दफ्तर में नहीं गया था. मैंने शपथ नहीं ली थी. लोग मिलने आने लगे थे. लोग कहते थे कि और कुछ करो न बस रात को खाते समय बिजली मिले, इतना कर देना. मैंने 2-3 साल काम किया और गुजरात देश का पहला ऐसा राज्य मिला, जहां 24 घंटे बिजली मिलती थी. लोग भूल गए कि अंधेरा कैसा होता है. मेरी आलोचना इसलिए नहीं होती कि आप कुछ नहीं करते, इसलिए होती है कि आप कर सकते हो, पर कुछ नहीं करते हैं।

बहुत पुरानी मेरी कविता है. मुझे कविता याद नहीं रहती है. रमता राम अकेला नाम से मेरी कविता है. मैं उसे सोशल मीडिया पर डाल दूंगा. फकीरी मन की अवस्था से जुड़ा है. ये इंजेक्ट करने से नहीं आती, हालात उसे पैदा नहीं करते हैं. ये इनबिल्ट होता है. मैं अपनी तारीफ नहीं कर रहा हूं, लेकिन बताना जरूरी है. जब मैं गुजरात में सीएम था तो मुझे लोग कभी पेंटिंग, कभी तलवार, कभी मूर्ति दे देते थे. सबका मन करता होगा कि इन्हें घर में लगाऊं, लेकिन मैं इन्हें सरकार के ट्रेजरी में डाल देता था. फिर मैंने उसकी नीलामी करवाई।

उन्होंने कहा कि सरकार में कई लोग होते हैं जिनके बारे में लोग कहते हैं कि इतने ले गया. मैं गर्व से कहता हूं कि मैं ऐसा सीएम था जो बच्चियों की शिक्षा के लिए 100 करोड़ से ज्यादा रुपये देकर आया था. जब लोगों ने मुझे धक्का मारकर दिल्ली भेजना शुरू किया तो मैंने अफसरों को बुलाया. विधायक होने के नाते पैसे मिलते थे, वे भी पड़े हुए थे।

मोदी ने कहा कि मुझे याद नहीं है, शायद 5-6 लाख रुपये थे, मैंने कहा कि गांधीनगर के सचिवालय में ड्राइवर और चपरासी के बच्चों को ब्याज से पैसा मिलता रहे. मेरे अफसर चुपचाप सुनते रहे. अफसर बड़े कुशल होते हैं, मुंडी हिला रहे थे. दो दिन बाद उन्होंने कहा कि वे मेरे घर आना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि आप ऐसा मत कीजिए, क्या पता आपको कब पैसे की जरूरत पड़ जाए. उन्होंने मुझे पैसे देने नहीं दिए, बहुत समझाने पर मान गए. एक फंड बनाया और मैं उसमें पैसे देकर आ गया. मैं औलिया हूं. मैं ऐसे हालात में पला बढ़ा हूं कि मुझपर किसी चीज का असर नहीं होता है।

ऊर्जा का राज के बारे में उन्होंने कहा कि मैं पिछले दो दशक से रोज एक किलो- दो किलो गालियां खाता हूं. एक पुरानी घटना है. कोई तीर्थस्थान था. पर्वत था, तराई में संत बैठते थे. एक आठ साल की बच्ची अपने तीन साल के भाई को लेकर चढ़ रही थी. संत ने पूछा कि तुम्हें थकान नहीं लग रही है क्या तो उसने कहा कि यह तो मेरा भाई है।

मोदी ने कहा कि संत ने कहा कि मैं तेरा रिश्ता नहीं पूछ रहा हूं तो लड़की ने फिर कहा कि यह तो मेरा भाई है. संत ने तीसरी बार यही पूछा तो लड़की ने फिर कहा कि यह तो मेरा भाई है और भाई की थकान नहीं लगती है. सवा सौ करोड़ देशवासी मेरे भाई हैं।

ये फकीरी कहां से आई? इस सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि ये बहुत ही पर्सनल सवाल है. उन्होंने कहा कि मुझे अपनी कविता याद नहीं है. लेकिन मैं उसे सोशल मीडिया में डाल दूंगा. ये फकीरी मन की अवस्था है. ये हालात उसको पैदा नहीं करते. ये इनबिल्ट होता है. जब मैं गुजरात में था, तो सार्वजनिक समारोहों में लोगों गिफ्ट देते थे. कुछ न कुछ… मैं भी इंसान हूं. मेरा भी मन करता है. करेगा कि नहीं करेगा? तालियां बजी लेकिन मोदी ने कहा कि मेरा मन नहीं करता था. मैं उसे कोषागार में दे देता था।

मोदी ने कहा कि दिल्ली आने से पहले मैंने अफसरों को बुलाया और कहा कि मेरे पास पैसे हैं, उसे गांधीनगर के सचिवालय में ड्राइवर और चपरासी हैं, उन्हें दे दी जाए. जो अफसर सुन रहे थे, वो मुंडी हिला रहे थे. दो दिन के बाद उनका साहब संदेश आया कि घर में मिलना चाहते हैं, उन्होंने कहा कि साहब ऐसा मत कीजिए. कब आपको पैसे की जरूरत पड़ जाए. मैंने कहा कि क्या करूंगा इसे ले जाकर. लेकिन एक छोटा सा फाउंडेशन बनाया और उसके लिए छोटी सी राशि देकर निकल लिया. मुझ पर किसी चीज का प्रभाव नहीं होता।

ओबामा केयर और मोदीकेयर के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि तीन बातों पर मेरा जोर रहा है. मैं बड़ी बातें नहीं करता हूं. बच्चों को पढ़ाई, युवा को कमाई, बुजुर्ग को दवाई. ये चीजें हैं जो स्वस्थ समाज के लिए होनी चाहिए. अच्छे खासे परिवार में भी अगर एक बीमारी आ जाए तो सभी योजनाएं, बेटी की शादी की तैयारी धरी की धरी रह जाती है. ऑटो रिक्शा चलाने वाला बीमार हो जाए तो पूरा परिवार बीमार हो जाता है।

उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत में हम देश में करीब डेढ़ लाख से ज्यादा वेलनेस सेंटर बनाना चाहते हैं. एक सेंटर से 12-15 गांवों को फायदा मिले. दूसरा- योग, पोषण मिशन से प्रिवेंटिव हेल्थ को बल मिले. दुनिया के कई देशों में मातृत्व अवकाश के लिए उतनी उदारता नहीं है, जितनी हमारे यहां है. हमने 26 हफ्ते का अवकाश दिया है. भारत की आधी आबादी यानी 50 लाख लोगों को 5 लाख रुपये तक का बीमा सरकार देगी. टीयर-टू और थ्री सिटी में अच्छे प्राइवेट अस्पतालों का नेटवर्क खड़ा होगा. नई चेन बनेगी. 1 हजार से ज्यादा अच्छे और नए अस्पताल बनने की संभावना है।

इस बीच प्रसून जोशी ने नरेंद्र मोदी के लिए कविता सुनाई और लोगों ने तालियां बजाकर उनका अभिनंदन किया. इस पर मोदी ने कहा कि हमारा भाव रहा है कि अहं अमृतस्य… और ये जज्बा ही है कि ये देश को नई ऊंचाईयों पर ले जाने को प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने कहा कि गरीबी नारे से नहीं मिटती है, मैंने तय किया है कि 4 करोड़ परिवारों तक बिजली पहुंचाऊंगा. और ये करना है।

मोदी ने कहा कि मैं मेहनत करता हूं और इस पर देश में कोई विवाद नहीं है. मेरे पास पूंजी है. मेरे पास सवा सौ करोड़ देशवासियों का प्यार है. इसी लिए मुझे ज्यादा से ज्यादा मेहनत करनी चाहिए. मुझे देशवासियों से कहना चाहिए कि मैं भी आपके जैसा सामान्य नागरिक हूं. मुझमें बहुत सारी कमियां हैं. कृपया करके मुझे अलग न समझो।

प्रधानमंत्री ने कहा- मेरे भीतर एक विद्यार्थी है. मैंने उसे कभी मरने नहीं दिया. और मुझे जो दायित्व मिलता है. उसे सीखने की कोशिश करता हूं. मेरे पास अनुभव नहीं है. मुझसे गलतियां हो सकती हैं, लेकिन बद इरादे से गलत कभी नहीं करूंगा. लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में काम किया. प्रधानसेवक का तमगा मुझे मिला है. लेकिन गलत इरादे से कोई काम नहीं करूंगा, मैंने कभी ये नहीं सोचा कि मैं देश बदल दूंगा. लेकिन सोचता हूं कि अगर देश में लाखों समस्याएं हैं, तो सवा सौ करोड़ समाधान हैं।

नोटबंदी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि मैंने अनुभव किया है कि नोटबंदी, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने मुझसे कहा कि मेरा दोस्त गया. मैं अपनी पत्नी से ऐसी चर्चा कर रहा था. टीवी के पर्दे पर लगातार सरकार के खिलाफ आक्रमण हो, लेकिन देशवासियों का भरोसा था कि मेरा देश ईमानदारी के लिए जूझ रहा है. मेरा सामान्य नागरिक ईमानदारी के लिए जूझ रहा है. उसी का नतीजा है कि आज जो भी परिणाम है उसकी जरूरत मोदी है. किसी को गाली देना है, तो किसको देंगे. मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि सारे पत्थर मुझे मारे जा रहे हैं. देशवासियों पर कोई पत्थर नहीं पड़ रहा है।

मैंने कभी लिखा था, जो लोग मुझ पर पत्थर फेंकते हैं। मैं उसी पत्थरों से पत्थी बना देता हूं, और उस पर चलकर आगे बढ़ता हूं।

प्रसून जोशी ने पूछा कि पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने टॉयलेट की बात की. ये जो प्राथमिकताएं बदली हैं. ये किस तरह डिसाइड करते हैं. इस पर मोदी ने कहा कि ये तो मैं नहीं कहूंगा कि किसी सरकार का इन विषयों पर ध्यान नहीं था. ये उनके साथ न्याय नहीं होगा. लेकिन मैं मानता हूं कि क्या कारण है कि इतनी योजनाएं हैं. महात्मा गांधी ने एक सिद्धांत दिया था कि कोई भी नीति बनाए तो इस तराजू पर तौले कि उसका समाज के आखिरी आदमी पर क्या प्रभाव है।

बलात्कार के मामले पर बोलते हुए नरेंद्र मोदी ने कठुआ की पीड़िता का भी जिक्र किया और कहा कि इस पर आरोप प्रत्यारोप नहीं होना चाहिए. एक बेटी के साथ अत्याचार कैसे सहन कर सकते हैं. मैंने लालकिले से कहा था कि बेटियों से सवाल करने वाले बेटों से सवाल क्यों नहीं करते. बेटी के साथ जघन्य अपराध करने वाला भी किसी का बेटा ही है. भारत में आजादी के बाद भी सैनिटेशन 30-40 प्रतिशत तक था. मुझे किताब पढ़कर गरीबी सीखनी नहीं है. मैं उस जिंदगी को जीकर आया हूं. गरीबी क्या होती है, पिछड़ापन क्या होता है।

उन्होंने कहा कि राजनीति अपनी जगह पर है. मेरी नीति कहती है कि इनकी जिंदगी में कुछ तो बदलाव लाऊं मैं, 18 हजार गांवों में हमने बिजली पहुंचाई, और ये जिम्मेदारी हमें लेनी होगी. अफसरों ने कहा कि इस काम में सात साल लग सकते हैं, मैंने कहा कि इसको एक हजार दिन में पूरा करेंगे. आप कल्पना कर सकते हैं कि गरीब मां शौचालय जाने के लिए सूरज ढलने का इंतजार करती है. सोचिए एक मां को कितना दर्द होता होगा. ये सवाल हमें सोने नहीं देते हैं।

मोदी ने कहा कि लंका छोड़ते समय भगवान रामचंद्र और लक्ष्मण का संवाद है, उससे हमें सीख मिलती है. लेकिन किसी का युद्ध लड़ने का साहस न हो, पीठ पर वार करता हो तो ये मोदी है, उसी की भाषा में जवाब देना जानता है।

उन्होंने कहा कि टेंट में सोए हमारे जवानों को मौत के घाट उतारते हैं. उनको ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए या नहीं? मुझे अपनी सेना के जवानों पर गर्व है. जो योजना बनी थी, उसे शत प्रतिशत सही तरीके से अमल में लाए और सूर्योदय होने से पहले लौटकर वापस आ गए।

मोदी ने कहा कि हमारी नेकनीयती देखिए कि मैंने हमारे अधिकारियों से कहा कि मीडिया को पता चले इससे पहले, पाकिस्तानियों को बता दें कि वहां आपकी लाशें पड़ी हैं, जाकर उठा लीजिए. वे सुबह 11 बजे तक फोन पर नहीं आए, डर रहे थे. वे 12 बजे फोन लाइन पर आए. तब तक हमने पत्रकारों को रोका हुआ था, तब हमने उन्हें बताया।

सेना पर उठने वाले सवालों पर मोदी ने कहा कि भगवान विपक्ष को सद्बुद्धि दें।

वीडियो के माध्यम से दिल्ली की प्रियंका वर्मा ने सवाल पूछा है कि हम गवर्नमेंट क्यों चूज करते हैं. जब से आप आए हैं, तो सबसे सिस्टम काफी बदल गया है. मेरा सवाल है कि हम सरकार क्यों चुनते हैं, और ऐसा पहले क्यों नहीं होता था. इसके जवाब में मोदी ने कहा कि देश की आजादी के लिए लाखों लोगों ने बलिदान दिया है. देश के किसी कोने में आजादी के लिए संघर्ष रुका नहीं था. लेकिन महात्मा गांधी ने इसे आंदोलन का रूप दिया. हर आदमी को काम पर लगाया. महात्मा गांधी ने आजादी को आंदोलन में परिवर्तित कर दिया. लोगों को भरोसा हुआ आजादी इससे मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि देश के लिए मर मिटने वालों की कमी नहीं थी, लेकिन गांधी जी ने एक साथ हिंदुस्तान के कोने-कोने में लोगों को खड़ा कर दिया. मोदी ने उम्मीद जताई कि विकास को भी जनांदोलन में बदल जाना चाहिए. सब कुछ सरकार नहीं करेगी. आजादी के बाद एक माहौल बन गया कि हर काम सरकार करेगी. इससे क्या हुआ कि सरकार और जनता के बीच दूरी बढ़ गई. बस में अकेला यात्रा करता आदमी सीट नोंचता रहता है, जब उसे मालूम चल जाएगा कि बस उसकी है तो वो ऐसा नहीं करेगा. सरकार ठेके का काम नहीं है. ये जनभागीदारी का काम है।

प्राकृतिक आपदाओं के समय सरकार से ज्यादा जनता जनार्दन काम करती है. लोकतंत्र में जितना ज्यादा जनता भागीदार होगी. काम होगा. शौचालय निर्माण के अभियान को देखिए. रेलवे में वरिष्ठ को मिलने वाली छूट पर लोगों ने जबरदस्त रेस्पांस मिला है. 40 लाख से ज्यादा वरिष्ठ लोगों ने सब्सिडी लेने से लिखित में मना किया है. अगर मैं कानूनन करता तो ऐसा नहीं होता, बल्कि विरोध होता, पॉपुलैरिटी रेटिंग आती और बताया जाता कि मोदी गिर गया।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि गैस सिलिंडर पर देश में चुनाव लड़े जाते हैं, लेकिन हमने अपील की और लोगों ने सब्सिडी छोड़ दी. हमारा काम देश के सामर्थ्य को समझने की है. हमें सरकार नहीं देश चलाना है. जनता ही शक्ति है. उनको लेकर चलना है।

एक सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि जब मेरे भीतर से बेसब्री खत्म हो जाएगी, उस दिन  मैं देश के किसी काम का नहीं रहूंगा. हर दिन देश के लिए एक नए सपने को लेकर जगता हूं. मेरे देशवासियों को मुझ पर भरोसा है. और हम सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय को लेकर चलते हैं. कुछ लोगों को लगता है कि छोड़ो यार कुछ बदल नहीं सकता है. लेकिन मैं दूसरे तरीके का इंसान हूं।

उन्होंने कहा कि मैं कभी आधे भरे हुए गिलास का उदाहरण देता था. मैं इस मंच का उपयोग किसी दूसरी सरकार की आलोचना के लिए करूंगा, लेकिन पिछली सरकार के मुकाबले इस सरकार में निर्णय प्रक्रिया बदली है. उसी व्यवस्था में स्पष्ट नीति और सबके हित में आप इच्छित परिणाम ले सकते हैं. ये तो है नहीं कि मैं जो चाहूंगा वहीं होगा, अगर ऐसा नहीं होता है, तो मैं निराश नहीं होता हूं।

ट्विटर पर प्रशांत दीक्षित के सवाल को प्रसून जोशी ने उठाते हुए कहा कि देशवासी में विकास को लेकर बेसब्री है. इसके जवाब में मोदी ने कहा कि बेसब्री तरूणाई की पहचान है. मैं इसे बुरा नहीं मानता. उन्होंने कहा कि देशवासियों को भरोसा है, इसलिए उन्हें अपेक्षा है।

PM बोले- लोकतंत्र में जनता ईश्वर का रूप, तू ही तू के सिद्धांत पर जीता हूं. स्वयं के खपा देने से ही देश का भला होता है. देश के साथ न्याय अपने आपको मिटा देने से होता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोकतंत्र जनता जनार्दन ईश्वर की तरह है. एक बार फैसला कर ले, तो सब बदल सकता है. क्योंकि भारत में जो जगह एक परिवार के लिए सुरक्षित थी, उसे जनता जनार्दन ने बदल दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा- रेलवे स्टेशन मेरी जिंदगी का स्वर्णिम पन्ना, रॉयल पैलेस सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानियों के संकल्प का परिणाम है।

स्रोत-आज़तक

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