December 5, 2021
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पत्थलगांव में मनाया गया कुरबानी की ईद

विवेक तिवारी, हरित छत्तीसगढ़,पत्थलगांव

पत्थलगांव। पत्थलगांव में इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों ने धुमधाम से मनाया ईद-उल-जुहा का त्यौहार यह मुस्लमानों का एक प्रमुख त्यौहार है। त्याग और बलिदान का यह त्योहार कई मायनों में खास है, और एक
विशेष संदेश देता है। इस दिन बकरे की बलि दी जाती है।लेकिन इसके पीछे मकसद ये होती है कि हर इंसान अपने जीवन को अपने अल्लाह की अमानत समझे और
उसके आदेष पर त्याग या बलिदान के लिए तैयार रहे।
विदित हो कि रमजान के पवित्र महीने की समाप्ति के लगभग 70 दिनों बाद इसे मनाया जाता है। मौलाना शौकत ने बताया कि इस्लामिक मान्यता के अनुसार हजरत इब्राहिम अपने पुत्र हजरत इस्माइल को इसी दिन खुदा के हुक्म पर खुदा कि राह में कुर्बान करने जा रहे थे, तो अल्लाह ने उसके पुत्र को जीवनदान दे दिया जिसकी याद में यह पर्व मनाया जाता है।  ईद-ए-कुर्बां का मतलब है
बलिदान की भावना।

इसका अर्थ त्याग बाली ईद है इस दिन जानवर की कुर्बानी
देना एक प्रकार की प्रतीकात्मक कुर्बानी है। मो. फकरुद्दीन ने बताया कि इस्लाम धर्म में ईद को इस्लाम धर्म में काफी अहम माना गया है। इसे कुर्बानी का पर्व कहा गया है। बकरीद के दिन अपनी किसी प्रिय चीज की
अल्लाह के लिए कुर्बानी देनी होती है। बकरीद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग बकरे की कुर्बानी देते हैं। कुर्बानी के लिए बकरे को अपने घर में पाला-पोसा जाता है और उसका पूरा ख्याल रखा जाता है। इसके बाद बकरीद के
दिन उसकी कुर्बानी अल्लाह के नाम दे दी जाती है। कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। एक हिस्सा कुर्बानी करने वाले खुद के घर
में रख लेते हैं और दो हिस्सें बांट देते हैं। कुर्बानी बकरीद की नमाज पढ़ने के बाद दी जाती है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग नए कपड़े पहनकर
मस्जिद में नमाज पढ़ने जाते हैं। वहां नमाज पढ़कर एक दूसरे के गले लगते हैं और ईद की बधाई देते हैं। नमाज पढ़कर वापस घर लौटने के बाद बकरे की
कुर्बानी दी जाती है। ईद के मौके पर जितना हो सके, उतना गरीबों को दान देने का भी विधान है। मुस्लिम संप्रदाय के लोग अपनी आय के मुताबिक जकात
फितरा देते हैं। इसके अलावा बकरे का गोश्त भी गरीबों में बांटा जाता है। इस दौरान मौलाना अलताभ रजा, मो. बदरुद्दीन, मो. सेराज खान, रासिद खान,
याषिम खान, अभिदुल रहमान, मुराद अली, निसामुद्दीन, मोनु, इस्माईल खान के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय के सभी लोगों ने स्थानीय कब्रीस्तान में नमाज अदा
कर एक-दुसरे को गले लगाकर त्याग और बलिदान के इस त्यौहार बकरीद की शुभकानायें दी।

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