September 25, 2021
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हरित छत्तीसगढ़  जगदलपुर

चारों ओर जंगलों से घिरे गाँव में आवागमन के लिए रास्ते का कहीं अता-पता नहीं था। 60-70 किलोमीटर दूर तक दलदली कच्ची पगडंडी, जिस पर चलना बड़ा मुश्किल था। राज्य सरकार द्वारा यहां सड़क निर्माण कराने के बाद शहर तक आवागमन का रास्ता आसान हो गया है।

पिछले दिनों बस्तर के हमर छत्तीसगढ़ योजना के तहत् नया रायपुर भ्रमण पर पहुंची नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पदमकोट की सरपंच श्रीमती शोरीबाई ने बताया कि हमारा गांव पदमकोट बीहड़ जंगली इलाका है। यहां आए दिन जंगली जानवरों के हमले का डर गांव वालों को लगा रहता है। सात साल पहले उनके गांव में किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं थी। सरकार की अनेक योजनाएं संचालित हैं, जिससे अब गांव वालों को बहुत सुविधा हो गई है। खासकर नारायणपुर तक रास्ता बन जाने से गांव के बच्चों को स्कूल जाने में आसानी हो जाती है।

सरपंच श्रीमती शोरी बाई के दो बच्चे हैं। बेटी भिलाई में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है और उनका बेटा नारायणपुर हास्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा है। पति फारेस्ट विभाग में कर्मचारी हैं।

श्रीमति शोरीबाई बताती हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वे कभी पढ़ नहीं पाई। इस कमी को उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ा कर पूरा किया। मुख्यमंत्री शिक्षा मिशन के अंतर्गत उनकी बेटी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है।

सरपंच के अनुसार उनके गांव में कोई भी अधिक पढ़ा लिखा नहीं है। उनकी बेटी समय-समय पर गांव आकर लोगों को पढ़ाती है। अपनी बेटी से ही उन्होंने अपना नाम लिखना सीखा है। अब वह खुद ग्रामवासियों को पढ़ने के लिए प्रेरित भी करती है। उनका कहना है कि हमर छत्तीसगढ़ योजना के अंतर्गत नया रायपुर का भ्रमण कर काफी आनंदित हुई, ऐसा विकास उन्होंने पहले कभी देखा नहीं था। अपने गांव से सल्फी और महुआ का पेड़ लेकर आई थीं, जो उनके क्षेत्र की संस्कृति की भी पहचान है। उनका कहना है कि वे नया रायपुर में नारायणपुर की संस्कृति का पौधा रोपने आई

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