October 21, 2021
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पत्थलगांव,अजीबो गरीब मामला निजी भूमि पर वन विभाग ने किया कब्जा 

पत्थलगांव,अजीबो गरीब मामला निजी भूमि पर वन विभाग ने किया कब्जा 

जशपुर जिले के पत्थलगांव में एक अजीबो गरीब मामला सामने आया हैं जहाँ पत्थलगांव के स्व. कृतनारायण सिंह राजपूत की जमीन पर वन विभाग ने जबरन कब्जा कर उसपर बांस रोपण भी कर दिया है, और उसे रिजर्व फॉरेस्ट भी घोषित कर दिया है, मामले का पूरा खुलासा तब हुआ जब स्व. कृतनारायण की बेवा प्रतिमा देवी और उसके वारिश बाबू आदिल सिंह ने उक्त भूमि 361/1194 और 361/1195 को चैतन दास महंत और विजय कुमार अग्रवाल को बेचा,, जब उस भूमि पर कब्जा दिलाने की बात आई तब ज्ञात हुआ कि उक्त खसरा नम्बर की जमीन पर वन विभाग द्वारा घेरा लगाकर उसपर बांस लगा दिया है, जब वह विभाग से जमीन के वास्तविक स्वामी ने इस संबंध में सवाल किया तो वन विभाग ने इसे भूलवश पौधे लगाने की बात स्वीकार की लेकिन उनका कहना था कि वर्ष 1948-49 में उक्त क्षेत्र को राजपत्र में भी दर्शाया गया है और जब वन विभाग ने वर्ष 1987-88 में बांस रोपण किया तब उन्होंने गांव में मुनादी कराकर इश्तेहार भी दिया था कि यदि किसी को बांस रोपण करने आपत्ति है तो वह अपनी आपत्ती दर्ज करा सकते हैं, लेकिन यहाँ एक बात गौर करने वाली है कि यदि वन विभाग ने इश्तेहार दिया था तो उनको भी पता था कि उक्त भूमि राजश्व की है लेकिन राजस्व विभाग से बिना अनुमति लिए बिना भूमि स्वामी से मिले ही उक्त भूमि पर बांस रोपण कर उसे रिजर्व फ़ॉरेस्ट घोषित कर दिया, वहीं इस संबंध में पीड़ित(भूमि स्वामी) पक्ष ने कलेक्टर जनदर्शन में भी कई बार आवेदन पेश किया गया जिला वनमंडलाधिकारी जशपुर के समक्ष भी आवेदन पेश किए लेकिन हर बार नतीज़ा सिफर रहा,  थकहार कर वास्तविक भूमि स्वामी ने पत्थलगांव तहसील का शरण लिया और मामले में न्याय दिलाने की अपील की पीड़ित पक्ष ने आवेदन पर तहसील कोर्ट पत्थलगांव द्वारा उक्त भूखंड का तकरीबन 7 बार सीमांकन किया गया लेकिन प्रत्येक बार वह भूमि कृतनारायण सिंह के वारिश के नाम से ही दिखाई दिया, वन विभाग के वनपाल श्री भंवर सिंह धुर्वे भी सीमांकन के दौरान मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने पंचनामा में अपने हस्ताक्षर भी किये हैं कि उक्त भूमि वास्तव भी निजी है लेकिन वन विभाग द्वारा भूलवश पौधा रोपण कर दिया गया है,, लेकिन फिर भी उस भूमि का विवाद नहीं थम रहा,

आपको बता दें कि किसी भी भूमि का वास्तविक आधार उसका मिशल और अधिकार अभिलेेेख होता हैै जो कि वास्तविक भमि स्वामी के पास वर्ष 1930-31 के हैं, जो कि राजस्व रिकार्ड में आज भी सुरक्षित है। आपको यहां एक चीज बता दें कि पत्थलगांव शहर की तकरीबन सारी भूमि सिर्फ स्व. कृतनारायण सिंह राजपूत के नाम था जिसमें से आज बहुत सारी जमीनों को बेच दिया गया है और जो बचा हुआ है वह आज उनकी बेवा प्रतिमा देवी और वारिस बाबू आदिल सिंह के नाम है आज भी स्व. कृतनारायण सिंह राजपूत का परिवार रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ में निवासरत हैं, लेकिन जमीनों की देखरेख के अभाव में उनकी भूमि वर्षों तक खाली पड़ी रही और आज भी पत्थलगांव के नंदनझरिया के अलावा बस स्टैंड के  साथ साथ पत्थलगांव के कई जगहों पर उनकी भूमि है, कुछ भूमि पर भूमि स्वामी के आदेश पर ही कई किसान खेती करते हैं वहीं कुछ भूमि खाली हैं तो किसी भूमि पर कुछ लोग कब्जा कर लिए हैं, अगर सही जांच हो जाय तो पत्थलगांव में कई घर टूट जाएंगे जो कि उनके ज़मीन पर काबिज हैं, आपको बता दें कि आज से 30-40 वर्ष पूर्व पत्थलगांव में ज़मीन की उतनी उपयोगिता नहीं थी चूंकि स्व. कृतनारायण सिंह के पास अकूत भूमि थी लेकिन फसल नहीं लेने से अधिकांश वर्षों तक भूमि रिक्त पड़ी रही, जिसपर आज कई लोग कब्जा कर बैठे हैं इसी कड़ी में वन विभाग ने भी नंदनझरिया स्थित भूमि जिसका खसरा नम्बर 361/1194 में कुल 0.567 हेक्टेयर में से 0.243 और 361/1195 में 0.283 हेक्टेयर है, जिसका कुल रकबा 0.526  हेक्टेयर है जिसपर वन विभाग ने भी कब्जा कर लिया है।

भूमि क्रेता ने पत्थलगांव तहसील में आवेदन देकर लगाई इंसाफ की गुहार


पत्थलगांव तहसील में जब मामला पहुंचा तब मामले की संजीदगी को देखते हुए राजस्व विभाग ने वन विभाग को कई बार नोटिस भेजकर उक्त भूमि के सम्बंध में उनका जवाब मांगा लेकिन 5 से भी अधिक बार नोटिश भेजने पर भी उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, चूंकि उक्त भूखण्ड राजस्व रिकार्ड में स्व. कृतनारायण के वारिस बाबू आदिल सिंह समेत समालित खाता में नज़र आ रहा था और 7 बार उक्त भूमि का सीमांकन भी हो चुका था और प्रत्येक बार वह आवेदक के हक़ में रहा, राजस्व विभाग ने जब वन विभाग को नोटिश भेजा उस दौरान उनका कोई भी अधिकारी य कर्मचारी तहसील न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ जिसपर राजस्व विभाग ने छ. ग. भू. रा. संहिता 1959 की धारा 250 में निहित प्रवधान के तहत आवेदक के पक्ष में 21 सितंबर वर्ष 2017 को फैसला सुनाया।

भूमि स्वामी के पक्ष में आदेश के बाद कब्जा के दौरान वन विभाग का हंगामा

जब राजस्व विभाग ने उक्त भूमि को लेकर अपना फैसला सुनाया तो आवेदक काफी खुश नजऱ आये लेकिन अभी इनकी इस खुशी में वन विभाग ने पुनः सेंध लगा दी, आपको बता दें कि आदेश उपरांत कब्जा के दौरान मौके पर उपस्थित रहने के लिए वन विभाग को कई बार नोटिश भेजा गया लेकिन वन विभाग मौके पर नहीं पहुंची चूंकि राजस्व से फैसला आ चुका था और कब्जा के लिए कई बार वन विभाग को नोटिश दिया गया लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए तो अभी मार्च 2018 में पुनः कब्जा की प्रक्रिया शुरु हुई हरबार की तरह इस बार भी वन विभाग को नोटिश भेजा गया लेकिन वह मौके पर उपस्थित नहीं लेकिन राजस्व और पुलिस विभाग की मौजूदगी में भूमि स्वामी को कब्जा दिया गया, लेकिन उसके अगले दिन जब भूमि स्वामी अपनी भूमि के पास पहुंचे और सड़क किनारे की अपनी भूमि को सड़क में गुजर रहे ट्रैक्टर और जेसीबी को रोककर उनसे अपने खेत को समतल करने की बात कही जिस पर वह मान गए और उनके जेसीबी और ट्रैक्टर से भूमि सुधार का कार्य करने लगे इसी दौरान पत्थलगांव वन विभाग के रेंजर श्री कृपासिंधु पैंकरा अपनी टीम के साथ कार्यस्थल पर पहुंचे और काम रोकने को लेकर दबाव बनाया और जब भूमि स्वामी ने अपने पास रखे राजस्व के फैसले की प्रति उन्हें दिखाया तो रेंजर ने भूमि स्वामी से 3 दिन का समय दस्तावेज मंगाने और उसके बाद पुनः सीमांकन कराने के लिए मांगा, भूमि स्वामी ने रेंजर कृपासिंधु पैंकरा के कहने पर 3 दिन तक काम बंद करने की बात मान जाने पर भूमि समतलीकरण का कार्य 3 दिनों तक बंद रहा इस दौरान बाहर से काम करने के लिए रुके जेसीबी और ट्रैक्टर अपने गंतव्य की ओर चले गए लेकिन इधर तीन दिन बीत जानेपर भी पत्थलगांव के रेंजर द्वारा कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया, और एसडीएम कोर्ट पत्थलगांव में तहसीलदार के आदेश के खिलाफ अपील दायर की साथ ही वास्तविक भूमि स्वामी के खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया,,,

गहिरा गुरु संस्कृत विद्यालय परिसर में खड़े 3 ट्रैक्टर वाहनों को जबरन उठा लाया वन विभाग


इधर एक बड़ा ही संजीदा मामला है कि एक ओर जब राजस्व विभाग ने वन विभाग से भूमि संबंधित दस्तावेज मांगे तब उन्होंने कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया वहीं अब फैसला भूमि स्वामी के हक़ में आने के बाद भी उस जमीन पर अपना कब्जा दिखा रहे हैं, बताया जाता है कि अपनी गलती छिपाने के लिए वन विभाग द्वारा जबरन विद्यालय परिसर में खड़े ट्रैक्टरों को अपने कार्यालय में खड़ा कर दिया गया है, और वह सभी ट्रैक्टर वाहन उक्त भूमि पर कार्य नहीं कर रहे थे बावजूद इसके जबरन ही उनके ट्रैक्टरों को वन विभाग कार्यालय में खड़ा किया गया है।

ट्रैक्टर मालिक करेंगे वन विभाग का घेराव


इधर विद्यालय परिसर में खड़े ट्रैक्टरों को वन विभाग द्वारा जबरन उठा लाने पर ट्रैक्टर मालिक क्षुब्ध हो चुके हैं और बिना किसी गलती के उनके ट्रैक्टरों को महीने भर से वन विभाग अपने कब्जे में लेकर रखी है जिससे आक्रोशित होकर ट्रैक्टर मालिकों द्वारा भारी संख्या में वन विभाग कार्यालय का घेराव करने की रणनीति भी बनायी है।

सोमवार को कलेक्टर से मिलने पहुंचेंगे जशपुर

नंदनझरिया के पास स्थित भूमि को लेकर राजस्व विभाग के फैसले पर अपनी भूमि पर कार्य कर रहे भूमि स्वामी को रोकने और उसके खिलाफ मामला दर्ज करने से परेशान भूमि स्वामी और उसके परिजन सोमवार को जिला कलेक्टर प्रियंका शुक्ला से मिलकर इंसाफ दिलाने की गुहार लगाएंगे वहीं जिन लोगों के ट्रैक्टर वन विभाग ने जबरन अपने कब्जे में लिए हैं वे भी भारी संख्या में कलेक्टोरेट पहुंचेंगे और अपनी व्यथा सुनाएंगे।

न्याय नहीं मिलने से जाएंगे हाई कोर्ट

इधर भूमि स्वामी का कहना है कि यदि उन्हें कलेक्टर महोदया द्वारा उचित न्याय नहीं मिलता है तो वह हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने पर वन विभाग के खिलाफ याचिका दायर करेंगे।

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