October 26, 2021
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भारत का रक्षा बजट पहली बार दुनिया के शीर्ष पांच बजट में शामिल

भारत का रक्षा बजट पहली बार दुनिया के शीर्ष पांच बजट में शामिल

दुनियाभर में कई देशों के बीच खुद को ताकतवर बनाने की होड़ सी लग गई है। हर एक देश दूसरे से आगे निकलने की होड़ में अपनी शक्ति बढ़ाने में लगा हुआ है और दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच अपना स्थान चाहता है। अमेरिका और चीन जैसी कई बड़े देश अपनी सेनाओ पर अरबों-खरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं जिनका रक्षा बजट कई देशो की अर्थव्यस्था के बराबर है। वहीं इस दौड़ में भारत और सऊदी अरब जैसे देश भी शामिल हो गए हैं। स्वीडन के स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर रक्षा खर्च का 60 प्रतिशत इन पांच देशों द्वारा ही किया जा रहा है। जानिए उन 5 देशों के बारे में जो रक्षा पर पानी की तरह पैसा बहाते हैं।

अमेरिका का रक्षा बजट सबसे अधिक 

रिपोर्ट के अनुसार 2017 में सेना पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों में पहले नंबर पर अमेरिका है। वह अपनी सैन्‍य शक्‍ति पर बाकी देशों की तुलना में दस गुना ज्‍यादा करीब 612 बिलियन डॉलर खर्च करता है। उसके पास अत्‍याधुनिक हथियारों के साथ-साथ 2,130 क्रूज मिसाइल, 450 बैलिस्टिक मिसाइल और 19 विमान वाहक हैं जो हवा से हवा में वार करने में सक्षम हैं। यूएस के पास सबसे बड़ी नेवी है जिसके पास 500 जहाज हैं। इसके पास दुनिया की सबसे ज्यादा प्रशिक्षित विशिष्ट सैनिकों की बड़ी फौज है।

चीन ने रक्षा बजट में किया 10 गुना इजाफा 

चीन आज दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसकी सेना सबसे ताक़तवर सेनाओं में से एक गिनी जाती है। वह अपने रक्षातंत्र को दिन-प्रतिदिन मजबूत कर रहा है। पिछले 25 वर्षों में चीन अपने रक्षा बजट में 10 गुना इजाफा कर चुका है। इस वर्ष उसने अपने रक्षा बजट में 8.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। वहीं थल सेना के मामले में भी चीन दुनिया में शीर्ष पर है। वह तेजी से सैन्य सुधार और आधुनिकीकरण की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। वह दुनिया के कई देशों में मिलिटरी बेस बनाने की योजना पर काम कर रहा है। चीन के पास 23 लाख सशस्त्र सैनिक हैं तो 5 लाख 10 हजार रिजर्व सैनिक भी हैं। यही नहीं, अर्धसैनिक बलों के रूप में उसके पास 6 लाख 60 हजार सैनिक हैं। चीन के मुकाबले यूएस के पास 14 लाख सक्रिय सैनिक हैं।

सऊदी अरब ने रूस को छोड़ा पीछे 

सीपरी की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने रक्षा बजट के मामले में रूस को पीछे छोड़ दिया है। तेल का उत्पादन करने वाला देश सऊदी अरब का कुल रक्षा बजट 87.2 बिलियन डॉलर है जो कि उसकी कुल जीडीपी का 13.2 फीसदी है। उसने पिछले वर्ष रक्षा ख़र्चो पर 69 अरब 40 करोड़ डालर ख़र्च किए। 2012-16 तक इसमें हथियारों का आयात पिछले पांच की तुलना में 212 फीसदी बढ़ गया था। साल 2016 में उसका रक्षा खर्च 30 फीसदी गिरावट के साथ 63.7 अरब डॉलर का रहा।

रुस ने कम किया अपना रक्षा बजट 

पश्चिमी देशों के साथ तनाव झेल रहे रूस का सैन्य खर्च पिछले साल घटकर 66.3 अरब डॉलर पर आ गया। यह 2016 के मुकाबले 20 प्रतिशत कम है। रूस 2014 से आर्थिक मुश्किलें झेल रहा है। हालांकि उसने अभी तक अपने रक्षा बजट को प्रभावित नहीं होने दिया जो अभी भी दुनियाभर में चौथे स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार रक्षा बजट को उच्च स्तर पर बनाए रखना अब रूस के लिए संभव ही नहीं रहा है इसलिए उसे एक कदम पीछे हटना पड़ेगा।

भारत ने बढ़ाई अपनी ताकत 

ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए भारत का रक्षा बजट पहली बार दुनिया के शीर्ष पांच बजट में शामिल हो गया है। भारत 2017 में 52.5 अरब डॉलर के खर्च के साथ रक्षा बजट के मामले में  पांचवे स्थान पर पहुंच गया। वर्ष 2016 में 51.1 अरब डॉलर का रक्षा बजट था। भारत के पास 37 युद्धपोत 1 एयरक्राफ्ट कैरियर और 11 विध्वंसक हैं। देश के पास 500 से अधिक लड़ाकू विमान हैं और 3,300 से अधिक टैंक हैं। भारत के पास 16 पनडुब्बियां हैं जिनमें से 2 परमाणु संपन्न हैं।

वहीं भारत की सेना विश्व की दूसरी सबसे बड़ी थल सेना है। इसकी स्थापना सन 1947 में भारत को आजादी मिलने के तुरंत बाद ही हुई थी। आगे आने वाले समय में उम्मीद है कि भारत अपनी सैन्य सेनाओं को और मजबूती प्रदान करने के लिए रक्षा बजट पर ज्यादा पैसे खर्च कर सकती है। देश धनुष तोप, मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम पिनाका, इंन्सास राइफल, बुलेटप्रूफ जैकेट-हेलमेट, सेना के लिए विशेष ट्रक-गाड़ियां, मिसाइल, अरिहंत पनडुब्बी, एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे तमाम हथियार और सैन्य उपकरण बना रहा है।

स्रोत- पंजाब केसरी

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