October 18, 2021
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छत्तीसगढ़ में वन वासियों को नहीं मिल रहा है तेंदूपत्ता तोड़ने का काम ग्रामीण परेसान

छत्तीसगढ़ में वन वासियों को नहीं मिल रहा है तेंदूपत्ता तोड़ने का काम ग्रामीण परेसान

पप्पू जायसवाल रिपोर्टिंग बिहारपुर
जिले के दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्र में आदिवासी एवं वनवासी लोगों को छत्तीसगढ़ शासन की योजना का लाभ नहीं मिल रहा है वही लंबे समय से निवास कर रहे 5 गांव की तेंदूपत्ता तोड़ने से दूर रखा जाता है सूरजपुर जिले के दूर अंचल क्षेत्र चांदनी बिहारपुर के ऐसे 5 गांव है जहां घना जंगल होते हुए भी 5 गांव में तेंदूपत्ता नहीं तोड़ा जाता है ना ही कोई अन्य वनोपज प्राप्त करने दिया जाता है जो कि वहां के ग्रामीण काफी चिंतित में है 99% गांव में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पण्डो एवं चेरवा जाति गांव में निवास करते हैं आज तक तेंदूपत्ता तोड़ने से कोसों दूर पर है जो कि जंगल वासियों की आय का प्रमुख स्त्रोत तेंदूपत्ता सीजन ही है जबकि 15 गांव पूरी तरह से जंगल से घिरे हुए हैं इसके बावजूद भी इन्हें जंगल का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है और इनके पास आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है

इन गांव में नहीं मिल रहा है छत्तीसगढ़ शासन की योजना का लाभ
जिला मुख्यालय से लगभग 145 किलोमीटर दूर पर स्थित ग्राम पंचायत ग्राम पंचायत खोहीर के आश्रित गांव बैजन पाठ लुल्ह भुण्डा दुधवनिया एवं ग्राम पंचायत रामगढ़ की तेलाई पाठ इन गांव में तेंदूपत्ता की तुड़ाई नहीं किया जाता है वही देखा जाए तो वन वन जंगल के मामले में सूरजपुर जिले से सबसे ज्यादा घना जंगल है यहां तेंदूपत्ता भी भारी संख्या में मिलता है लेकिन छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इन गांवों के ग्रामीणों को तेंदूपत्ता का लाभ नहीं मिलता है काफी चिंतित में है इन गांव के ग्रामीण वही इस गांव से लगे पड़ोसी गांव में तेंदूपत्ता की संग्रहण का कार्य चलता है जोकि तेंदूपत्ता के माध्यम से बहुत बड़ा आर्थिक लाभ एक बड़ा लाभ मिल जाता है वही इस गांव के ग्रामीणों ने इतने घने जंगल होने के बावजूद भी इन गांव में नहीं तोड़ा जाता है


छत्तीसगढ़ से तेंदूपत्ता मध्य प्रदेश के ग्रामीणों द्ववारा तोड़ के ले जा रहे हैं लेकिन छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है सीमा से लगा छत्तीसगढ़ के बॉर्डर से मध्य प्रदेश के ग्रामीणों द्वारा छत्तीसगढ़ के जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ के मध्य प्रदेश में भेज दिया जा रहा है लेकिन छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों को 5 गांव में नहीं मिल रहा है तेंदूपत्ता तोड़ने का लाभ

*इन गांव में 99% लोग आदिवासी जनजाति के लोग जीवन यापन करते हैं इन्हें नहीं मिल रहा है शासन का लाभ*
राष्ट्रपति दत्तक पुत्र पंडो जनजाति के लोग यहां ज्यादा जीवन यापन कर रहे हैं लेकिन इन्हीं प्रशासन द्वारा तेंदूपत्ता तोड़ने का कार्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है के ग्रामीण भूखा और प्यासा जीवन यापन करने से मजबूर है राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र गरीब परिवार ही पाए जाते हैं जो कि काफी चिंतित में है कि गांव में तेंदूपत्ता कि आज तक कभी संग्रहण का कार्य नहीं हुआ है नहीं हुआ है जबकि बाहर से लोग आकर वहां तेंदूपत्ता छोड़ कर चले जाते हैं वहां के क्षेत्रवासी कुछ नहीं कर पाते चुपचाप देखते रह जाते हैं और फायदा बाहर वाले उठाकर ले जाते हैं

*इन पांच गांव में तेंदूपत्ता से वंचित हैं आदिवासी*
ग्राम पंचायत खोहीर के आश्रित गांव बैजन पाठ लुल्ह दुधवनिया भुण्डा
वही ग्राम पंचायत रामगढ़ के आश्रित गांव तेलाई पाठ गांव में आज तक कभी नहीं तोड़ा गया तेंदूपत्ता गरीबी में जी रहे हैं हम लोग आदिवासी राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र को नहीं मिल रहा है छत्तीसगढ़ शासन योजना का लाभ गरीबी से जलने से है मजबूर वही छत्तीसगढ़ शासन योजना से लाखों कोर्ट की दूरी पर हैं क्योंकि जमीनी हकीकत देखा जाए तो यहां गरीबों गरीबी से चल रहे हैं ग्रामीण उन्हें छत्तीसगढ़ शासन का कई योजना का लाभ नहीं मिल रहा है तेंदूपत्ता के अलावा भी कई योजना से भी वंचित हैं सड़क पानी बिजली जैसी मूल सुविधाओं से वंचित हैं कहां के निवासी आज भी आदिम जाति की जिंदगी जी रहे हैं ग्रामीणों ने

*छत्तीसगढ़ शासन एवं सूरजपुर कलेक्टर केसी देव सेनापति महोदय से तत्काल इस वर्ष तेंदूपत्ता की तुड़ाई की मांग की है राष्ट्रपति दत्तक पुत्र पर ध्यान आकर्षित करने की मांग की है*

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