September 25, 2021
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चन्द्रपुर नगर में वायरल फिबर के साथ साथ डेंगू , मलेरिया का खतरा..

हरित छत्तीसगढ़ बसन्त चन्द्रा डभरा
 नगर में नाली व गली की साफ-सफाई का ध्यान नही..
नगर में फागिंग मशीन का नामो निशान तक नही..
नगर में अबतक न ही बन पाया S.L.R.M. सेंटर ..
नगर में न ही हो पा रहा डोर टू डोर कचरा कलेक्शन ..
 नगर में स्वक्ष भारत मिशन बस सपना बन कर रह गया..

चन्द्रपुर-नगर पंचायत वर्तमान में भगवान भरोसे संचालित हो रहा है। एक ओर अल्प वर्षा से कृषि संग उमस से जिना मुहाल हो रहा वही छुटपुट बरसात से मौसमी वायरल फिबर का प्रकोप है। जगह जगह कचरे के ढेर संग नालियों की सफाई न होने से यहाँ मच्छरों का प्रकोप भी सर पर है। रात मच्छरों के भिन भिन में कट रही तो उनसे मलेरिया व डेंगू की आशंका भी बढ़ रही। इस के बाद भी नगर में साफ सफाई को लेकर पुख्ता व्यवस्था न नजर आ रही, ऐसा लगता है साफ सफाई व्यवस्था शून्य है। नवपदस्थ सीएमओ संग कर्मचारी व परिषद के जिम्मेदार लोगों का अधिकांश समय बिल टेंडर में ही उलझे होने से साफ सफाई के प्रति उदासीन रवैया होने के कारण नगर में साफ सफाई का काम ठप्प सा पड़ा है। नालियो में प्लास्टिक और कचरा भरा पड़ा है और साफ सफाई के अभाव में सड़ती नालिया बजबजा रही है। चाहे बात वीडियो हाल के पास , स्टेट बैंक, अग्रसेन भवन के पास या मेन रोड हो या हॉस्पिटल वाली गली, देवांगन मोहल्ला हो या अन्य कोई जगह नगर की लगभग सभी गलियों का एक सा ही हाल है। जिसके कारण से पूरे शहर में मच्छरो का आतंक बढ़ गया है। अभी तक न नगर पंचायत में फाग मशीन दिखी है न चली है और ना ही किसी दिन पाऊडर का छिडक़ाव किया गया है। पूरा शहर मच्छरो के आतंक से त्रस्त है किन्तु नगर पंचायत को परवाह नही है। स्वक्ष भारत मिशन के शौचालय व साफ सफाई सिर्फ औपचारिकता पूर्ण कागजो में ही हो रहे। वही नाली, गली, साफ सफाई के नाम पर टेंडर का खेल ही संपन्न हो रहा है। जिसके कारण से हजारो नगरवासियो के बीच मलेरिया, डेंगू बुखार व प्रदूषण जनित महामारी का खतरा मंडराने लगा है।
ऐसे में चन्द्रपुर में नगर पंचायत की व्यवस्था साफ सफाई के मामले में भी हर मोर्चे पर विफल है। ऐसा लगता है, इस नगर की व्यवस्था अंधेर नगरी चौपट राजा की कहानी जैसी है। सफाई कर्मचारियो पर कोई लगाम नही है। साफ सफाई जैसे मूलभूत सुविधाओ पर केंद्र सरकार की बड़ी योजनाओं के बाद भी कोई ध्यान नगर पंचायत का नही है। वही स्थिति इस कदर बिगड़ी हुई है कि वार्डो मे नालियो मे मलबा भरा पड़ा है, कही कही तो नाली का पानी सड़क पर है जिस से मच्छरो का प्रकोप व्यापक रूप से बढ़ गया है। ऐसे समय के लिए हर नगरपंचायत में फाग मशीन होती है तथा उसका उपयोग किया जाता है। पर यहाँ ये सब न, न ही मच्छर पाऊडर है, न ही अब तक किसी वार्ड में पाऊडर का छिडक़ाव किया गया है । वार्डो मे साफ सफाई की स्थिति बदहाल होने की असली वजह नगर पंचायत के जिम्मेदार कर्मचारियों की लापरवाही है। सबसे बड़ी समस्या ठहरे हुए गंदे पानी में मच्छरो का पनपना है और ऐसे में नगर के खैया तालाब, नंद सागर तालाब की गंदगी उन्हें पनपने का भरपूर मौका दे रही । कुछ समय पहले महिला समूह आदि के संग बैठक कर सेमिनार लगा यहा पर डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का कार्य शुरू किये जाने की बात हुई थी जो अब तक पूरे नगर में कही भी नजर से परे है। नही किसी वार्ड मे कोई भी डोर-टू-डोर कचरा एकत्रित करने के लिये आता है। यहा पर स्वच्छता मिशन के लाखो रूपये के फर्जी बिल बनाने के लिये स्वक्ष भारत मिशन को कागजो पर ही संपन्न कराया जा रहा है। वही अन्य मदो से लाखो रूपये के डस्टबिन की खरीदी कर खर्च का कार्य संपन्न किया जा रहा है । अब तक किसी भी वार्ड में डस्टबिन का समुचित उपयोग साफ-सफाई के लिये नही हो रहा है। नगर की इस लचर व्यवस्था से लगता है जनप्रतिनिधियों के पास इच्छा शक्ति की भारी कमी है। वही शासन द्वारा एक सीधे साधे व्यक्ति को प्रभारी अधिकारी बना दिये जाने से कर्मचारियो पर कोई दबाव नही है तथा किसी भी प्रकार से कोई कार्य नगर पंचायत के कर्मचारी समय पर नही कर रहे है। जिसका परिणाम नगर वासियो को भुगतना पड़ रहा है। ऐसे में तेज तर्रार अधिकारी के तेवर समेत जनप्रतिनिधियों की सजगता अत्यावश्यक है। वरना ऐसे ही साफसफाई का आलम रहा तो नगर महामारी की चपेट में होगा, आने वाले कुछ दिनों में नवरात्र का पर्व भी है पर नगरीय अव्यवस्था चरम पर है।

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