September 24, 2021
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बस्तर दशहरा 75 दिनों चलने वाले दशहरे पर्व का डेरी गड़ाई रश्म सांसद दिनेश कश्यप की उपस्थिति में सम्पन्न

सिरासार भवन में  डेरी गड़ाई विधान पूरा किया गया।

हरित छत्तीसगढ़ जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व की अमावस्या के दिन पाटजात्रा रस्म के साथ शुरुआत के उपरांत सिरासार भवन में मोगरी मछली की बलि के साथ डेरी गड़ाई विधान पूरा किया गया। जिसमें प्रमुख रूप से बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष दिनेश कश्यप उपस्थित थे।इस अवसर परपरंपरा अनुसार साल वृक्ष की लकड़ी का मंदिर के प्रधान पुजारी द्वारा पूजा अर्चना किया गया। इसके बाद दो खंबों के लिए गढ्ढे खोदे गए।इसमें सिंदूर, हल्दी व चंदन से अभिषेक किया गया। ग़ढ्ढों में जीवित मोगरी मछली का अर्पण करने के बाद विधिवत डेरी गड़ाई की गई।

क्या है डेरी गड़ाई
रियासतकाल में दशहरा रस्म की शुरुआत के बाद रथ के कारीगरों के रहने तथा काम करने के लिए छांयादार एक मंडप का निर्माण करवाया जाता था जिसमें निर्माण कार्य व शयन होता था। मंडप बनाने के लिए गाड़े जाने वाले खंबों को डेरी गड़ाई कहा गया। तब से ही यह रस्म के रूप में चलन में है। इसके पूर्व रथ निर्माण के लिए लाई गई सरई लकड़ी के पूजन को पाटजात्रा विधान कहा जाता है। यह दशहरा पर्व की पहली मानी जाता है। काबिले गौर है कि दशहरा पर्व 75 दिनों तक चलने वाला विश्व का सबसे बड़ा लोकपर्व माना जाता है। डेरीगड़ाई रस्म के बाद बकावंड जनपद के झारउमरगांव के कारीगरों का दल रथ निर्माण की प्रक्रिया आरंभ करेगा।

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