September 17, 2021
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शिक्षक दिवस विशेष ::समाज में शिक्षकों की भूमिका/महत्ता भारतीय संस्कृति का एक सूत्र वाक्य प्रचलित है “तमसो मा ज्योतिर्मय”

HARIT CHHATTISGARH

समाज में शिक्षकों की भूमिका/महत्ता भारतीय संस्कृति का एक सूत्र वाक्य प्रचलित है “तमसो मा ज्योतिर्मय” इसका अर्थ है अंधेरे उजालो की ओर जाना।
इस प्रक्रिया को वास्तविक अर्थो में पूरा करने के लिए शिक्षा,शिक्षक और समाज की बड़ी भूमिका होती है।
भारतीय समाज शिक्षा और संस्कृति के मामले में प्राचीनकाल से बहुत समृद्ध रहा हैं। भारतीय समाज जहा शिक्षा को शरीर,मन और आत्मा के विकास का साधन माना गया है,वही शिक्षक को समाज के समग्र व्यक्तित्व विकास का उत्तरदायित्व सौपा गया है।
शिक्षक की महत्ती भूमिका को इस प्रकार प्रकट किया जा सकता है कि “शिक्षक राष्ट्र की संस्कृति के माली के समान होते है जो संस्कारो की जड़ो में खाद देते है और श्रम से सींचकर उन्हें शक्ति में निर्मित करते है।
वर्तमान परिवेश में समाज,सरकार और शिक्षक में सुदृढ़ सामंजस्य के अभाव के कारण शिक्षको की सामाजिक प्रतिष्ठा में भारी गिरावट आयी है।
शिक्षको के महत्ती कार्य की भूमिका के अतिरिक्त शिक्षको के द्वारा अन्यान्य उद्देश्यों की पूर्ति सबंधी कार्य के कारण से शिक्षा के स्तर में भारी गिरावट देखी जा रही है।
शिक्षा,शिक्षक,समाज और शासकीय नीतियों में सामंजस्य अत्यंत आवश्यक हो गया है।
भारतीय समाज के प्रत्येक घर तक शिक्षा को घर तक पहुचाने के भगीरथ प्रयासों के साथ-साथ शिक्षको की मनःस्तिथि का विश्लेषण होना उतना ही अनिवार्य होना चाहिए। शिक्षको को भी वह सम्मान मिलना चाहिए जिसके वे अधिकारी है। शिक्षक,शिक्षा (ज्ञान) और विद्यार्थी के मध्य एक सेतु का कार्य करता है। यदि यह सेतु ही निर्बल होगा तो समाज को खोखला होने में देरी नही लगेगी। आज प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा की आधारमुल संरचना व प्रवीण तथा सुयोग्य शिक्षको की भर्ती पर सर्वाधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
एक समर्पित व निष्ठावान शिक्षक ही देश की शिक्षा प्रणाली को सुंदर व सुदृढ़ बना सकता है। इसके लिए शिक्षको को एक सम्मानजनक स्थान देना होगा जिससे 21वी सदी के ज्ञानोन्मुख समाज के लिए हम उनको सही ढंग से प्रशिक्षित और प्रेरित कर पाएंगे तभी एक ऐसे भारत के निर्माण की ईमानदार कोशिश हो सकेगी जो निरक्षरता,भ्रष्टाचार,गरीबी,भुखमरी व मूल्यों में निरंतर पतन जैसे कलंकों से मुक्त होगा और जहा शिक्षा का तात्पर्य धन ऐश्वर्य का अर्जन न होकर देश के प्रति सच्चा प्रेम व सेवा भाव होगा।
वंदन”
गुरुदेव के श्री चरणों मे
श्रद्धा सुमन संग वंदन
जिनकी कृपा नीर से
हमारा जीवन हुआ चंदन
धरती कहते अम्बर कहते
गुनगुनाते यही तराना
हे गुरुदेव!
आप ही वो प्रज्वलित दीप हैं
जिनसे रोशन हुआ जमाना।
राजेन्द्र कुमार पाण्डेय
प्राचार्य
सरस्वती शिशु मंदिर उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय,
लक्ष्मीपुर रायगढ़

2 thoughts on “शिक्षक दिवस विशेष ::समाज में शिक्षकों की भूमिका/महत्ता भारतीय संस्कृति का एक सूत्र वाक्य प्रचलित है “तमसो मा ज्योतिर्मय”

  1. वाह बहुत बढ़िया शिक्षक ही समाज का निर्माता है ।

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