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देश के चौथे स्तंभ पर हमले से प्रदेश के पत्रकारों की राजधानी रायपुर में दहाड़ सरकार पर बनाया दबाव।

 

*राज्य के 27 जिलों से बड़ी संख्या में पहुचे पत्रकारो ने एक लाइन में की पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग।*

*अलग-अलग संगठनों के पत्रकारों के साथ समाजसेवी, साहित्यकार, सहित राजनितिक दलों, के नेता भी हुए आन्दोलन में शामिल।*

*दिनांक:-14-05-2018*


*संवाददाता:-मोहम्मद जावेद खान हरित छत्तीसगढ़।*

*रायपुर:-**पत्रकारों की सुरक्षा एवं उनके खिलाफ कायम हो रहे अपराधिक मामलों जैसे विषयों को लेकर आज प्रदेश की राजधानी रायपुर में एक सर्वदलीय धरना प्रदर्शन का आयोजन पूरे प्रदेश भर के पत्रकारों के द्वारा दिया गया, धरनास्थल पर प्रदेश भर से पत्रकार साथी बड़ी संख्या में पहुंचे, राज्य के 27 जिलों से पत्रकार साथी धरना स्थल पर पहंचे थे,रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष के.के. शर्मा ने इस प्रदेश स्तरीय पहल की प्रशंसा की और पत्रकार सुरक्षा कानून तथा पत्रकारों की सुरक्षा के लिए तब तक संघर्ष की बात की जब तक पत्रकार सुरक्षा कानून लागू ना हो जाए।


सुचना के अधिकार के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहे कुनाल शुक्ला ने भी धरना स्थल पर पहुंच कर पत्रकारों की मांग का समर्थन किया, कार्यक्रम में सभी वक्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में पत्रकारों का काम कितना कठीन होता जा रहा है,पूरे विस्तार से प्रकाश डाला, उन्होंने कहा की पहले तो खबरों की सच्चाई केवल सरकारी अधिकारी छुपाते थे, अब सरपंच से लेकर ऊपर बैठे मुखिया तथ्यों को छुपाने में लगे रहते है,साधारण परिक्षा में नकल की रिर्काडिंग को भी शासकीय काम में हस्तक्षेप मान कर केन्द्रअध्यक्ष द्वारा पत्रकार के विरूद्ध एफआईआर करा देता है, खनिज ओवर लोडिंग जैसे मामलों में काम करना तो जान जोखिम में डालने जैसा वाला कार्य हो गया है, प्रदेश भर में कार्यरत पत्रकार संगठनों ने अपने-अपने बैनर के साथ धरना प्रदर्शन में समर्थन दिया पूर्व कार्यक्रम के अनुसार धरने के बाद राजभवन तक पैदल मार्च का कार्यक्रम होना था और राजभवन पर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा जाना था,पर पुलिस एवं विशेष शाखा ने जो सुचनाएं राजभवन तक दी उस कारण राज्यपाल के प्रतिनिधि ने धरना स्थल पर आकर पत्रकारों से ज्ञापन प्राप्त किया,पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करवाने प्रतिबद्ध पत्रकारों के इस धरना प्रदर्शन में वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला, शंकर पाण्डेय, राजकुमार सोनी, व्यास पाठक, गोविन्द शर्मा, राकेश प्रताप सिंह परिहार, सुधीर तम्बोली, शराफत अली, उत्पल सेनगुप्ता, अमित सन्तवानी, प्रशांत इल्मीकार, नाहिदा कुरैशी, व्यास मुनि, रमेश चन्द्रकुमार, सतीश पांडेय, केके शर्मा, मोहन तिवारी, अजीत कुमार शर्मा, धीरेन्द्र गिरी गोस्वामी, शैलेष कुमार शर्मा, डीपी गोस्वामी, जावेद खान, संजय बंजारे, विकास तिवारी, रोहित साहू विजय सुमन, फरहान राज, दिनेश चंद्र, दिगम्बर तिवारी सहित प्रदेश भर से आये हुए पत्रकार व संगठन के लोग शामिल हुये।


*पूर्व मुख्यमंत्री जनता कांग्रेस के सुप्रीमो अजीत जोगी सहित आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर संकेत ठाकुर सामाजिक कार्यकर्ता वह पूर्व भाजपा नेता वीरेंद्र पांडे का भी मिला समर्थन*- छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के सुप्रीमों प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी स्वयं पत्रकारों के धरना स्थल पर पहुंचे तथा उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए यह आश्वासन दिया की राज्य ने उनकी सरकार आने पर पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाएगा अजीत जोगी ने कहा की उनकी पार्टी ने पत्रकारों के हित के लिए बहुत सारी बातें अपने घोषणा पत्र में रखी है, जो की पत्रकारों से प्रत्यक्ष रूप से चर्चा करके ली गई है, पत्रकार सुरक्षा कानून पत्रकारों की वर्तमान कार्य परिस्थिति को देख कर जरूरी है की पत्रकार सुरक्षा कानून को लागू किया जाए, पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने धरना स्थल पर अपने डाॅ की आराम करने की सलाह को दरकिनार करते हुए स्वयं धरना स्थल पर पहुंच गए थे, प्रदेश की राजनीति में उभरकर सामने आए आम आदमी पार्टी के प्रदेशध्यक्ष डॉक्टर संकेत ठाकूर ने भी पत्रकारों का समर्थन किया पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की बात उन्होंने कहीं आज के हालातों को देखते हुए पत्रकारिता करना काफी मुश्किल हो गया है उन्होंने बस्तर के पत्रकारों का हवाला देते हुए कहां की बस्तर एवं नक्सली इलाकों में पत्रकार अपनी जान जोखिम मैं डाल कर न्यूज़ कवर करते हैं,न्यूज़ चैनल में काम करने वाला कोई भी पत्रकार सिर्फ उसी को दिखाता है ,जो समाज में चल रहा है,यह कोई काल्पनिक कहानी नही है,यदि समाज में दैनिक जीवन में बुराईयां इतनी गहरा गई है ,तो उन्हें बताना पत्रकार की पेशेगत मजबूरी है,समाज में कुछ बुरा चले और देश का चौथा स्तंभ कहे जाने वाला पत्रकारिता और पत्रकार उसे न दिखा पाए तो इसे आदर्श स्थिति नही कहा जा सकता, आम आदमी पार्टी एक राजनीतिक दल होने के नाते पत्रकार सुरक्षा कानून का समर्थन करता है,और उसे जल्द से जल्द विधानसभा के मानसून सत्र में लागू करवाने के लिए का पत्रकारों के हित में समर्थन दिया वहीं पर सामाजिक कार्यकर्ता वाह पूर्व भाजपा नेता वीरेंद्र पांडे ने भी धरना स्थल पर पत्रकार सुरक्षा कानून पर अपना समर्थन दिया साथ ही वर्तमान परिस्थिति में पत्रकारों के साथ होने वाली घटना का भी जिक्र किया वर्तमान सरकार चाहे प्रदेश में हो या देश में एक प्रकार से अघोषित आपातकाल लगा के रखा हुआ है अगर सरकार की चाटुकारिता करो तो ठीक है ,अगर सरकार के खिलाफ कुछ लिखो तो वह अपराध बन गया है, आगे उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि देश के चौथे स्तंभ के साथ अगर इस तरह का व्यवहार किया जाएगा तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा आज मीडिया संस्थान को बड़े-बड़े औद्योगिक घराने के लोग चला रहे हैं, ईमानदारी से काम कर रहे पत्रकारों को नौकरी से निकाल दिया जा रहा है, उन्होंने कुछ पत्रकारों का उदाहरण भी दिया, कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने भी मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह पर सीधा हमला बोला विकास यात्रा के दौरान बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा पत्रकारों की सुरक्षा के सवाल करने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री का कहना कि प्रदेश में पत्रकार सुरक्षित हैं,पत्रकार सुरक्षा कानून की आवश्यकता नहीं है, इस तरह का जवाब प्रदेश के मुखिया के छोटी मानसिकता को दर्शाता है ,अगर पत्रकारों को सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है, तो फिर प्रदेश के मुखिया सहित उन तमाम जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों को भी सुरक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है ,आखिर जनता से उन्हें भय कैसा आखिर उसी जनता जनार्दन ने सत्ता पर आसीन किया है, फिर सुरक्षा का यह तामझाम व्हीआईपी कल्चर क्यों।

मुख्य विपक्षी कांग्रेस पार्टी का पत्रकारों के धरना-आन्दोलन से दूर रहना चर्चा का विषय रहा

-राजधानी में प्रदेशभर के पत्रकारों द्वारा पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर एकदिवसीय महाधरना का आयोजन किया गया जिसमे बड़ी संख्या में पत्रकारों के अलावा समाजसेवी, साहित्यकार, राजनितिक दल के नेताओ के साथ-साथ कई पत्रकार संगठनो ने अपना समर्थन दिया मगर पूरे आन्दोलन के दौरान प्रदेश की मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस वह कांग्रेस के बड़े नेता नदारद रहे, पत्रकार हितो को लेकर लड़ी जा रही इस लड़ाई में कांग्रेस द्वारा समर्थन नहीं किये जाने को लेकर पत्रकारों के बीच चर्चा का विषय रहा वहीं पर दूसरी तरफ जनता कांग्रेस के सुप्रीमो अजीत जोगी सहित आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा समर्थन देना इस बीच प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल का समर्थन ना देना पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर कहीं ना कहीं विपक्ष की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है।

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