Sharing is caring!

आरटीई पोर्टल में स्कूलों का नाम नही, जिम्मेदार कौन?


राजनांदगांव। शिक्षा का अधिकार कानून का लाभ वीवीआईपी जिले में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को कम से कम मिले इसके लिये शिक्षा विभाग ने पूरी तैयारी की है।
जिले में संचालित कई प्राईवेट स्कूलों का नाम आरटीई पोर्टल से गायब है तो कई स्कूलों ने इस बार कम आरक्षित सीट बताई है। पोर्टल में स्कूलों की जानकारी कुछ इस तरह से अपलोड किया गया है ताकि कोई इसे खोज न पाये।
शासन व प्रशासन के जिम्मेदार लोग यह नही चाहते कि गरीब का बच्चा भी नामचिन निजी स्कूलों में अच्छी शिक्षा पाये।
जिन प्राईवेट स्कूलों का नाम आरटीई पोर्टल में नही है अब उन स्कूलों को स्कूल संचालित करने की अनुमति नही मिलना चाहिये और उन स्कूलों पर तत्काल शिक्षा का अधिकार की धारा 18 एंव 19 के तहत् कार्यवाही किया जाना चाहिये।
लेकिन ज्यादातर स्कूले तो बड़े लोगो के है जो राजनिति से भी जुड़़े हुये है तो फिर उनकी स्कूलों को बन्द कौन करवा सकता है।
लोगों को मालूम है कि गरीब अपने बच्चों के अधिकार के लिये नही लड़ेगा, ना विरोध करेगा और जो करेगा वह भरेगा।
वीवीआईपी जिला होने का लाभ गरीबों न मिले इसे बिडंबना ही कहा जा सकता है, जिन लोगों को इसका लाभ मिल रहा है वे गरीब नही है। शासन ने कई पत्र जारी किये है कि गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले लेकिन यह सभी आदेश सिर्फ पढने में अच्छे लगते है, जमिनी हकिकत तो कुछ और है।
जिले के जिन प्राईवेट स्कूलों का नाम आरटीई पोर्टल में नही है और वे जिले में खुलेआम संचालित हो रहे है इसके लिये कौन जिम्मेदार है इसकी जांच होनी चाहिये क्योंकि अब जब मामले का खुलासा हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारीयों को बचाना गरीबों के साथ अन्यया होगा।
वर्सन…………
जिले के कलेक्टर हो इस संबंध मे तत्काल हस्ताक्षेप कर जिम्मेदार अधिकारीयों के खिलाफ कार्यवाही करना चाहिये। गरीबों को आरटीई का पूरा लाभ मिलना चाहिये।
क्रिष्टोफर पॉल, प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ पैरेंटस एसोसियेशन

Sharing is caring!