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पंचायत ने इंकार किया तो ग्रामीण चंदा कर खुदवाएँगे तालाब

सारंगढ़।* शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर ग्राम छोटे खैरा में ग्रामीणों ने निस्तारी संकट से निपटने शासन-प्रशासन का मुंह ताकने से बेहतर खुद इसका बीड़ा उठाने का फैसला लिया है हर साल की समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत से गुहार लगाई, लेकिन वहां से भी सहयोग नहीं मिला तो चंदा एकत्र कर तालाब गहरीकरण का काम जनसहयोग से शुरू करने का मन बनाया है।

लगभग तीन हजार की आबादी वाले खैरा छोटे गांव में वैसे तो छोटे-छोटे तालाब हैं। लेकिन गांव के मध्य एक मात्र सबसे बड़ा तालाब होने के कारण वहां के ज्यादातर लोग इसी तालाब में निस्तारी करते हैं। यह तालाब करीब 50 साल पुराना है और उसके बाद से कभी मिट्टी नहीं निकाली गई है। इस कारण कीचड़ और मिट्टी से तालाब पट गया है। गर्मी की दस्तक के साथ ही ग्रामीणों ने बैठककर निस्तारी संकट से निपटने का रास्ता निकाला और गहरीकरण कराने का फैसला लिया गया है ।

*रोजगार गारेंटी योजना से संभव नहीं*

इस बार लोग चाहते थे कि रोगायो से गहरीकरण कराया जाए, लेकिन काम मशीन से ही कराने की बात पर पंचायत ने नियमों का हवाला देकर हाथ खड़ा कर दिया। इस कारण ग्रामीणों ने अपने दम पर गहरीकरण शुरू कराने निर्णय लिया ।वही सरपंच सिदार सिंह सिदार ने गहरीकरण में अपनी व्यक्तिगत रुचि दिखाने से इनकार कर दिया ।

*क्या कहते है सरपंच*
रोजगार गारेंटी योजना से काम स्वीकृत होने पर ही गहरीकरण का कार्य संभव है इसके अलावा मैं व्यक्तिगत इसमें कुछ नही कर सकता ।

 *सिदार सिंह सिदार*
*सरपंच खैरा छोटे*

सारंगढ से गोविन्द बरेठ के साथ प्रवीण थॉमस

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