November 29, 2021
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नक्सलियों को हथियार बनाने के लिए रायपुर निवासी ने दिए थे वेल्डिंग व लैथ मशीन, अब दस—दस साल की सजा

हरित छत्तीसगढ़ जगदलपुर
रायपुर निवासी स्क्रेप कारोबारी अरुण अग्रवाल सहित सभी आरोपितों पर नक्सलियों को हथियार बनाने लेथ मशीन व वेल्डिंग मुहैया कराने जैसे आरोप के मामले में जगदलपुर विशेष सत्र न्यायालय ने दस दस साल की सजा सुनाई है।न्यायालय ने मामले में रायपुर निवासी स्क्रैप कारोबारी अरुण अग्रवाल, उसके मुंशी पप्पू खान सहित 8 लोगों को दोषी पाया है.दोषियों को दस—दस साल के कारावास की सजा सुनाई गई है.पुलिस अफसरों का दावा है कि अरुण समय-समय पर माओवादियों को डेटोनेटर, बारूद, जेनरेटर, वेल्डिंग मशीन आदि सामान की सप्लाई करता था।

दर्ज प्रकरण के अनुसार मुताबिक अरुण अग्रवाल लौह अयस्क से भरी रेलगाड़ियों के दुर्घटनाग्रस्त होने पर उसकी खरीदी करता था.अरुण के संबंध नक्सली कमांडर संजय कड़ती से होने की बात भी कही गई है.दर्ज प्रकरण के मुताबिक अरुण के मुनाफे के लिए कथित नक्सली कमांडर संजय दंतेवाड़ा क्षेत्र में पटरियां उखाड़कर मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त करता था. राजधानी के स्क्रैप कारोबारी अरुण अग्रवाल और उसके वाहन चालक बलराम नायक के नेटवर्क बस्तर के नक्सली कमांडरों से पिछले पांच साल से जुड़े निकले हैं। अरुण ने ही नक्सली कमांडर के कहने पर एमजी रोड की एक दुकान से लेथ मशीन, वेल्डिंग मशीन समेत अन्य मशीनों और औजारों की खरीदी कर जंगल में सप्लाई कराई थी। यह सामान पिकअप वाहन से ले जाते दंतेवाड़ा पुलिस ने बासनपुर जंगल में जब्त कर मामले में 2 लोगों को हिरासत में लिया था। उनसे हुई पूछताछ में अरुण का नाम सामने आया। इसके बाद एसआईबी की टीम ने मुंबई से रायपुर फ्लाइट से उतरते ही एयरपोर्ट पर अरुण अग्रवाल और उसके बिजनेस पार्टनर घनश्याम अग्रवाल को हिरासत में ले लिया था। पूछताछ के बाद घनश्याम अग्रवाल को छोड़ दिया गया, जबकि अरुण को साथ लेकर टीम दंतेवाड़ा रवाना हो गई थी। अरुण मूलतः कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ का रहने वाला है। वह यहां राजधानी के पंडरी इलाका स्थित डाल्फिन प्लाजा में पांच साल से सपरिवार रह रहा था, जबकि घनश्याम अंबिकापुर का निवासी है। अरुण दंतेवाड़ा जिले में कई सालों तक स्क्रैप की खरीद-बिक्री का काम करता रहा है। इसी दौरान उसका संपर्क नक्सली कमांडर से हुआ था। तब से वह लगातार फोन पर नक्सली कमांडर समेत कई बड़े माओवादियों से बातचीत करता रहा है।इस बीच कथित नक्सली कमांडर संजय ने हथियार बनाने के लिए अरुण से वेल्डिंग व लैथ मशीन सप्लाई करने कहा. रायपुर निवासी अरुण ने मशीन भेज दी.मामले का खुलासा होने पर तत्कालीन एसडीओपी मिर्जा जियारत बेग ने जांच शुरू की.मामले में बीते मंगलवार को जगदलपुर विशेष सत्र न्यायालय ने फैसला सुनाया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक अपने व्यवसाय को ठीक से चलाने के लिए वह माओवादियों की मदद लेता था और बदले में उन्हें हथियार बनाने में काम आने वाली मशीनें सप्लाई करता था। पुलिस अफसरों का दावा है कि अरुण समय-समय पर माओवादियों को डेटोनेटर, बारूद, जेनरेटर, वेल्डिंग मशीन आदि सामान की सप्लाई करता था।

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