September 25, 2021
Breaking News

फिर हो गया रेल हादसा,रेलमंत्री बदल गए, फिर भी रुक नहीं रहे हैं हादसे

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर रेल हादसा हुआ है. गुरुवार सुबह सोनभद्र जिले में शक्तिपुंज एक्सप्रेस के 7 डिब्बे पटरी से उतर गए हैं. अभी इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. देश का रेलमंत्री तो बदल गया लेकिन हादसे रुक नहीं रहे हैं.

पिछले दिनों लगातार हुए रेल हादसों के बाद सुरेश प्रभु ने पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद कैबिनेट विस्तार हुआ और पीयूष गोयल को रेलमंत्री बनाया गया. लेकिन अभी पद संभाले एक हफ्ता भी नहीं हुआ कि रेल हादसा हो गया.
7 डिब्बे पटरी से उतरे. इस ट्रेन में कुल 21 डिब्बे थे. यूपी में लगातार रेल हादसे सामने आए हैं. इससे पहले नागपुर में भी रेल हादसा हुआ था. रेल हादसे थमते नजर नहीं आ रहे हैं. सोनभद्र से पहले पिछले एक माह में तीन और रेल हादसे हो चुके हैं.

19 अगस्त को मुजफ्फरनगर में हुआ हादसा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में रेल हादसा हुआ था. पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन मुजफ्फरनगर के खतौली रेलवे स्टेशन के पास पटरी से उतर गई थी. ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतरकर अगल-बगल के घरों और एक स्कूल में घुस गए. ये ट्रेन पुरी से हरिद्वार जा रही थी. हादसा 19 अगस्त शनिवार की शाम 5 बजकर 46 मिनट पर हुआ. ट्रेन का नंबर 18477 था. इस हादसे में 23 लोगों की मौत हो गई थी.

यह ट्रेन पुरी से हरिद्वार जाती है. कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस इस सफर में कई राज्यों से होकर गुजरती है. इनमें उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा शामिल हैं. यह ट्रेन रोजाना रात 9 बजे पुरी से चलती है.

23 अगस्त को औरैया में हुआ था

खतौली रेल हादसे के होने के 5 दिन के अंदर कानपुर और इटावा के बीच औरैया जिले में एक और हादसा हुआ. ये ट्रेन आजमगढ़ से दिल्ली आ रही 12225 (अप) कैफियत एक्सप्रेस औरैया के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई. मानव रहित फाटक पर देर रात ट्रेन एक डंपर से टकरा गई थी. उत्तरी-मध्य रेलवे के प्रवक्ता के मुताबिक दुर्घटना की वजह से ट्रेन के इंजन सहित 10 डिब्बे पटरी से उतर गए थे.

29 अगस्त को महाराष्ट्र में भी हुआ था हादसा

29 अगस्त को महाराष्ट्र के टिटवाला में भी रेल हादसा हुआ था, जहां नागपुर-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस का इंजन और नौ डिब्बे पटरी से उतर गए थे. इस ट्रेन में कुल 18 डिब्बे थे. यह दुर्घटना उस समय हुई जब अधिकतर यात्री सो रहे थे. महाराष्ट्र के वासिंद और आसनगांव स्टेशनों के बीच सुबह 8.36 बजे हुए इस हादसे की पीछे भूस्खलन को जिम्मेदार बताया जा रहा था.

पद संभालने के बाद क्या बोले थे गोयल

हाल ही में हुए एक के बाद एक एक्सीडेंट के बाद रेलवे सवालों के घेरे में आ गया है. ऐसे में गोयल की सबसे बड़ी जिम्मेदारी वापस से लोगों का भरोसा रेलव में लाने की होगी. पदभार संभालने के बाद गोयल ने ट्वीट किया कि भारत के लोगों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी, गतिशीलता और सेवा की दिशा में काम करने का लक्ष्य है.

है कांटों भरा ताज!

रेल मंत्रालय का काम संभालना किसी कांटों भरे ताज से कम नहीं है. 23 अगस्त को प्रधानमंत्री से मुलाकात करने के बाद से प्रभु कार्यालय नहीं आए और पिछले महीने हुई दुर्घटनाओं के बाद इस्तीफे की पेशकश की थी. गोयल को इस तथ्य से मदद मिलेगी कि प्रभु ने लंबी अवधि के वित्त प्रबंधन और रेल विकास प्राधिकरण स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए हैं. उन्होंने ऐसी नींव रखी है जिसके आधार पर गोयल आधुनिकीकरण, क्षमता विस्तार और तकनीकी उन्नयन का निर्माण तेज कर सकते हैं, जो कि धन की कमी के कारण लेट हुई.

नौकरशाही को संभालना चुनौती

हालांकि, नौकरशाह को संभालना गोयल के लिए सबसे बड़ी चुनौती होने वाली है. नौकरशाह का अच्छे से इस्तेमाल ही उनकी सफलता की कुंजी होगी. नौकरशाह का काम करने का तरीका आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में बाधा है. प्रभु लगातार प्रयासों के बावजूद रेल नौकरशाही को वश में करने में विफल रहे. गोयल ने कहा कि तीन साल में भारी निवेश किया गया है जो निश्चित रूप से रेलवे को विकास की ओर ले जाएगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *