July 25, 2021
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तड़प तड़प कर मर गया चालक किसी ने नही ली सुध

हरित छत्तीसगढ़,विवेक तिवारी, पत्थलगांव।
शराब पीकर शराब से लदी ट्रक को दुर्घटनाग्रस्त करने वाले शराबी चालक की गम्भीर हालत के बावजूद ठेकेदार और आबकारी अमला द्वारा किसी प्रकार की देखरेख नही करने से आखिरकार शराबी चालक की अस्पताल में ही मौत हो गई। मृतक का नाम हुकुम चंद है और वह बिलासपुर निवासी है जो सरकारी शराब परिवहन ठेकेदार के वाहन में चालक था बीते दिनों शराब के नशे में धुत होकर शराब से लदी ट्रक को सवारी बस से टकरा गया जिससे उसकी हालात नाजुक बनी हुई थी वही पुलिस द्वारा घायल चालक को सिविल अस्पताल पत्थलगांव में भर्ती कराया गया जिसके बाद से घायल की सुध लेने वाला कोई नही था चिकित्सक भी प्राथमिक उपचार कर चालक के गम्भीर स्थिति को देखते हुए बाहर रिफर करने परिजन की बांट जोहते नजर आए वही सम्बंधित ठेकेदार को सूचना दिए जाने के बाद भी चालक की सुध नही लिया गया इतना ही नही इस पूरे मामले में ट्रक में बचे शराब को दूसरे वाहन की व्यवस्था कर शिफ्टिंग करने में ततपरता दिखाने वाली आबकारी अमला भी मानवीय संवेदना को दरकिनार करत्ते हुए घायल की सुध लेन तो दूर घायल की स्थिति के बारे में पूछताछ तक करना जरूरी नही समझी। सोते रहे अस्पताल के स्टाॅफ़ घंटो फर्श पर पड़ा रहा शव
शासन का करोड़ों रुपया खर्च होने के बावजूद पत्थलगांव के सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बीमार ही नजर आती हैं। सिविल अस्पताल स्वयं ही हमेशा अपनी व्यवस्थाओं के कारण बदनामी का दंष झेल रहा है। विभाग के चिकित्सक एवं स्टाॅप की रात के समय ड्युटी किस तरह से निभाते हैं, इसका अंदाजा तो फर्ष पर घंटो अकड़े फर्ष पर पड़े शव को देखकर ही लगाया जा सकता है। इस अस्पताल का ऐसा हाल की मानों सिविल अस्पताल से रात में  कोई वास्ता ही नहीं है। रात के गष्ती के दौरान देर रात करीब 2 बजे पुलिस के जवान जब अस्पताल में प्रवेष किये तो वार्ड में ट्रक चालक का शव फर्ष पर ही अकड़ा हुआ पड़ा था। जिसे देखते ही उनके द्वारा वार्ड बाॅय एवं अन्य स्टाॅप को उठाकर शव कक्ष में सुरक्षित रखवाया गया।
सूचना के बाद भी पहुंचना गंवारा नही समझा ट्रांसपोर्टर
पत्थलगांव के जषपुर रोड लाखझार के पास यात्री बस एवं बिलासपुर की शराब से लदी दुबे ट्रांसपोर्ट की ट्रक आमने सामने भिडंत हो जाने से ट्रक चालक की ईलाज के दौरान मौत हो गई। उक्त घटना 6/9 करीबन दोपहर 3 बजे की है 7/9 के करीब 12 बजे तक उसका सुध लेने वाला कोई नही पहुच पाया था। उक्त चालक को जब अस्पताल में भर्ती कराया गया था तब से उसकी हालत गंभीर बताई जा रही थी। नगर के युवाओं के द्वारा वाहन में अंकित मोबाइल नम्बर से ट्रांसपोर्टर एवं उसके मैनेजर को दुरभास के जरिये संपर्क साधकर यथास्थिति से रुबरु कराया गया। परन्तु ट्रांसपोर्टर उसके मौत हो जाने एवं समाचार लिखे जाने तक यहां पहुंचना या अपने किसी स्टाॅप को भेजना तक गंवारा नही समझा। क्या पता अगर वह मानवता दिखाते हुये अपने कर्मचारी के प्रति थोड़ी जवाबदारी समझता तो उसकी जान बच सकती थी।

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