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भाजपा के चार वर्ष पूर्ण होने पर पत्थलगांव में विधायक के नेतृत्व में चलाया स्वच्छता अभियान

हरितछतीसगढ़- विवेक तिवारी

पत्थलगांव- भारतीय जनता पार्टी के केन्द्र में चार वर्ष पूर्ण होने पर विधायक शिवशंकर साय पैंकरा के नेतृत्व में 26 मई से 11 जून तक विभिन्न  कार्यक्रम का आयोजन किया जाना है। उसी क्रम में 28 मई को सुबह 7 बजे पत्थलगांव मण्डी प्रांगण में स्थित शनि मंदिर के आसपास स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस स्वच्छता अभियान में विधायक के  साथ-साथ हरजीत भाटिया, संजू लोहिया, अजय बंसल, टोको साहू, सुनील गर्ग, श्यामनाराण गुप्ता, रुपसिंह राठिया, रेवा धिवर, प्रदीप गुप्ता, गोल्डी जायसवाल, खुर्शीद आलम, पवन अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, शोभनाथ बेहरा, जयो खुंटिया, गिरधारी, बालश्याम चैहान, बनमाली, युवा मोर्चा के अवधेश गुप्ता, राहुल अग्रवाल, ज्योतिस बड़ा, सुरेश बड़ा, जयप्रताप सिंह, जयपाल सिंह, राजेन्द्र चैहान, संजू, सोनू रजक, हेमन्त यादव सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
विदित हो कि महात्मा गाँधी ने “स्वच्छ भारत” का सपना देखा था जिसके लिए वह चाहते थे कि भारत के सभी नागरिक एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए कार्य करें। महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के स्वप्न को पूरा करने के लिए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडो में खुलती है शुरू किया और इसके सफल कार्यान्वयन हेतु भारत के सभी नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की है।

शासन प्रषासन के साथ-साथ हमारी भी नैतिक जिम्मेदारी
गन्दगी फैलाने में समाज का हर वर्ग अपने आधार पर गन्दगी फैलाने का जिम्मेदार है। हमें अपने जीवन में स्वच्छता पर भी विचार करने की जरूरत है कि स्वच्छता के प्रति हमारी सामाजिक भागीदारी भी है, और हम स्वच्छता के लिए उतने की जिम्मेदार हैं जितना सरकारी या अर्द्धसरकारी कर्मचारी। हमारी सोच साफ-सफाई में केवल घर के चार दिवारी तक ही सिमित रहती है। घर की सफाई के बाद उस कचरे को सड़को, नालियों या घर के बाहर कहीं भी डाल देते हैं। हमारी सोंच है कि घर के बाहर कचरा फेंकना ही हमारी जिम्मेदारी है, उसके बाद उस कचरे से होने वाली गंदगी एवं उससे होने वाली बिमारी का जिम्मेदार हम शासन प्रषासन को दे देते हैं। कहने का मतलब गन्दगी या कचरा फैलाकर वातावरण को प्रदूषित करने व बीमारी फैलने के लिये कभी न तो सोचते हैं और न तो इसके प्रति कभी अपनी जिम्मेदारी को ही समझते हैं। ऐसे में स्वच्छता के प्रति हम कैसे स्वयं को समर्पित कर पाएंगे, यह समझने की आवश्यकता है। वहीं अन्य देषों के बारे में देखने व सुनने को मिला ही होगा कि चाहे मन्त्री, अफसर हो या साधारण व्यक्ति सभी में स्वच्छता के प्रति एक ही विचार पाया जाता है कि गन्दगी को वहाँ फेकें जहाँ फेंकने का इसका स्थान है, न कि गन्दगी करके भाग खड़े हों बल्कि उसे सही जगह पर ही डालें। ऐसे ही शुद्ध विचार अपने आप को भी रखने की आवष्यकता है।

 

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