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बड़े राजनीती दल भी एकसाथ चुनाव नहीं चाहते, विधि आयोग के प्रस्ताव पर नहीं दिया जवाब

General Electionविधि आयोग ने 17 अप्रैल को लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराने के मुद्दे पर राजनीतिक दलों से 8 मई अपने विचार देने को कहा था। लेकिन आयोग के दो शीर्ष अधिकारियों ने बताया कि कोई भी बड़ा दल इस मुद्दे पर सामने नहीं आया। अधिकारियों ने बताया कि 17 अप्रैल को आयोग की ओर से ‘एक साथ चुनाव- संविधान एवं कानूनी पक्ष’ शीर्षक से कार्यपत्र जारी किया था। इसमें आयोग की ओर से कई कानूनी एवं संवैधानिक बदलाव प्रस्तावित किए गए थे, जो एक साथ चुनाव कराने के लिए जरूरी हैं। साथ ही सभी पक्षकारों, राजनीतिक दलों और आम लोगों से 8 मई तक अपनी राय देने को कहा था। साथ ही संबंधित परिचर्चा पत्र विधि मंत्रालय को भी भेजा गया था।

एक अधिकारी ने कहा, 8 मई तक किसी भी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल ने कोई सुझाव या टिप्पणी आयोग को नहीं भेजा। हालांकि, हम जल्द ही उन्हें इस मुद्दे पर बातचीत के लिए आमंत्रित करेंगे।

हमारा रुख स्पष्ट : भाजपा 
एकसाथ चुनाव के विचार को प्रस्तावित करने वाली भाजपा ने औपचारिक रूप से विधि आयोग को अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, पार्टी नेता व सांसद जीवीएल नरसिम्ह राव ने कहा, भाजपा का रुख पहले ही स्पष्ट है। हम कई मंचों पर यह व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा, विरोधी दलों को प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का डर है और उन्हें लगता है कि भाजपा को इससे फायदा होगा। जबकि हकीकत यह है कि इससे खर्च घटेगा और पार्टियों को बराबरी का मौका मिलेगा।

नरायणसामी जवाब देने वाले एकमात्र मुख्यमंत्री 
पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नरायणसामी एक मात्र मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने विधि आयोग के कार्यपत्र का लिखित में जवाब दिया है। उन्होंने एकसाथ चुनाव का विरोध किया और कहा कि यह संविधान और संघीय ढांचे के खिलाफ है।

चुनाव आयोग चाहता अतिरिक्त सुविधाएं
चुनाव आयोग के प्रतिनिधियों के साथ इस मुद्दे पर 16 मई को बैठक हुई। बैठक में शामिल दोनों अधिकारियों ने कहा, आयोग ने एकसाथ चुनाव कराने के लिए अपनी कई रणनीतिक जरूरतों की सूची दी। इनमें ईवीएम की संख्या को दोगुनी करना शामिल है।

आयोग चाहता विस्तृत चर्चा 
विधि आयोग चाहता है कि इस मुद्दे पर विस्तृत दायरे में चर्चा हो। इसलिए वह सरकार को रिपोर्ट सौंपने से पहले विभिन्न पक्षकारों और विशेषज्ञों से विचार-विमर्श कर रहा है। आयोग नहीं चाहता कि केवल कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाए।

प्रधानमंत्री मोदी ने चर्चा शुरू की 
सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ कराने की बहस को फिर से शुरू किया। सरकार ने 2015 में चुनाव आयोग को पत्र लिखा और मामले पर उसकी राय मांगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी इस साल बजट सत्र के पहले दिन  संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते एक साथ चुनाव कराने पर जोर दिया।

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