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 संविलियन एक विचार

संविलियन : शिक्षाकर्मियों की समस्याओं का समग्र व स्थाई समाधान
सरकार का बड़ा नीतिगत प्रभावोत्पादक व दूरगामी निर्णय

सफल क्रियान्वयन के लिए सकारात्मकता ,गंभीरता व धैर्य आवश्यक

छत्तीसगढ़ सरकार ने संविलियन की घोषणा करके राज्य के शिक्षाकर्मियों की समस्याओं के समग्र व स्थाई समाधान की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है, सरकार की यह घोषणा एक ऐतिहासिक, प्रभावी, दूरगामी, नीतिगत निर्णय है जिसके सफल वह अविलंब क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित पक्षों को सकारात्मक सोच व धैर्य के साथ गंभीरतापूर्वक आगे बढ़ना होगा।प्रशासनिक पक्ष तेजी के साथ संविलियन के क्रियान्वयन के लिए आगे बढ़ रहा है ।
संविलियन का क्रियान्वयन शिक्षा व्यवस्था में 1994 /95 से लागू दोहरी व भेदभाव पूर्ण व्यवस्था को समाप्त कर शिक्षाकर्मियों को न केवल वर्तमान समस्याओं से निजात दिलाएगा बल्कि भविष्य के लिए अपार संभावनाओंं का मार्ग प्रशस्त करेगा।
यद्यपि शिक्षाकर्मियों ने विगत वर्षों में प्रायः अप्रिय स्थितियों का ही सामना किया है, इसलिए संविलियन को लेकर उनके मन में अनेक शंका, कुशंका स्वभाविक रुप से उत्पन्न हो रही है, किंतु अपने पुरुषार्थ और पराक्रम के बल पर शिक्षाकर्मी संवर्ग संविलियन की दहलीज पर पहुंच चुका है, तो संविलियन को सफल बनाने के लिए भी आश्वस्त रहना चाहिए,
नए शिक्षा सत्र का प्रारंभ हमारे लिए बड़ा परिवर्तन व नवीनता लेकर आए इसके लिए हम सब को गंभीरता पूर्वक, सकारात्मक सोच के साथ अच्छा वातावरण बनाना चाहिए । काल्पनिक सवालों व कुतर्कों से बचते हुए अपनी परिपक्वता साबित करनी चाहिए कि स्कूल शिक्षा विभाग में हम निकट भविष्य में प्रधान पाठक, प्राचार्य व उच्च पदों की जिम्मेदारी का क्षमता पूर्वक निर्वहन करेंगे तथा राज्य की शिक्षा व्यवस्था व गुणवत्ता में ऊंची छलांग लगाएंगे। हमारे संविलियन का लाभ केवल हमें ही नहीं बल्कि स्कूल शिक्षा विभाग राज्य समाज विद्यालय व विद्यार्थियों को भी होगा मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि नए सत्र के प्रारंभ होने के साथ ही शिक्षा व्यवस्था तथा हमारे जीवन में एक बड़ा सुखद व सकारात्मक परिणाम आने वाला।

आपका
धर्मेश शर्मा

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