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कहते है कि शिक्षक ही जीवन की वह कुंजी होती है जो कि किसी भी छात्र का बेहतर चरित्र बना सकता है। यही काम 28 वर्षीय जी. भगवान भी करते है। अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषय के शिक्षक होने के कारण उन्होंने बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने के लिए बहुत कुछ स्कूल में किया। तभी तो जब उनका ट्रांसफर हुआ तो आंसूओं का सैलाब निकल पड़ा जो कि ये तस्वीरें बया कर रही है। आपको बता दें कि जी भगवान तिरुवल्लूर जिले के वेलीगरम गांव स्थित सरकारी हाई स्कूल में पढ़ाते है। महज 24 साल की उम्र में सेवा में आने के बाद उन्होंने बच्चों को आधुनिक तरीके से पढ़ाना शुरू किया।टीचर का तबादला हुआ तो धरने पर बैठे छात्र, रोते हुए पैर पकड़कर रोकने लगेतिरुवल्लुर जिले में सरकारी हाईस्कूल के 28 वर्षीय इंग्लिश टीचर जी भगवान. कुछ दिन पहले तबादला दूसरे इलाके में कर दिया गया. बुधवार को वे स्कूल से बाहर निकले तो स्टूडेंट्स ने रोक लिया और घेरकर रोने लगे. यहां तक कि वे धरने पर बैठ गए. असर ये हुआ कि सरकार ने टीचर के ट्रांसफर पर 10 दिन के लिए रोक लगा दी. स्टूडेंट्स का कहना था, ‘वह स्कूल के सबसे सपोर्टिव स्टाफ मेंबर्स में से एक हैं. टीचर जब स्कूल छोड़कर जाने लगे तो सभी स्टूडेंट्स उनको पीछे से रोक रहे थे और खूब रो रहे थे. टीचर जी भगवान भी फूट-फूटकर रो रहे थे. 

सरकार ने 10 दिन के लिए ट्रांसफर रोक दिया गया है. इन दस दिन में सरकार फैसला लेगी कि वो तिरुवल्लुर में ही रहेंगे या फिर किसी नए स्कूल में जाएंगे. जी भगवान ने कहा- ये मेरी स्कूल में पहली जॉब है. मैं 2014 में सरकारी हाईस्कूल में अपॉइंट हुआ था. असल में यहां जरूरत से ज्यादा टीचर हैं और उनमें से मैं एक हूं. इसलिए उन्होंने फैसला लिया कि मुझे ऐसे स्कूल में भेजा जाए जहां स्टाफ काफी कम है. इसलिए मेरा ट्रांसफर टिरुट्टनी में हुआ. 
भगवान 6वीं क्लास से लेकर 10वीं क्लास तक के बच्चों को इंग्लिश पढ़ाते हैं. जैसे ही पता चला कि उनके टीचर का ट्रांसफर हो गया तो बच्चे धरने पर बैठ गए और स्कूल न आनेकी बात कहने लगे. बच्चों के माता-पिता ने उनकी इस बात पर साथ दिया. भगवान ने कहा- ”वो मेरे गले लग रहे थे. मेरे पैर छू रहे थे. मुझे जाने के लिए रोक रहे थे. जिसको देखकर मैं भावुक हो गया. जिसके बाद मैं उन्हें हॉल में ले गया और कहा कि मैं कुछ दिन में आ जाऊंगा.”जब जी. भगवान के ट्रांसफर की बात स्कूली बच्चों को पता चली तो वह उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया और टीचर को रोकने का भरसक प्रयास किया। बच्चों के दर्द ने प्रशासन को झुकना पड़ा और उन्होंने 10 दिनों तक ट्रांसफर रोक दिया है। वर्तमान में जब सरकारी स्कूलों की हालत बहुत खराब हो रही है तो आज समाज को ऐसे ही शिक्षकों की जरूरत है।

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