September 24, 2021
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अब नहीं मारे जाएंगे आर्मी से रिटायर हुए कुत्ते, मिलेगा प्यार और घर

अब नहीं मारे जाएंगे आर्मी से रिटायर हुए कुत्ते, मिलेगा प्यार और घर
अब जिप्सी, गनर, टैंक और प्लूटो रिटायर होने को बाद भी अच्छी जिंदगी जी पाएंगे. आपको बता दें कि हम आर्मी डॉग्स की बात कर रहे हैं और जो अब रिटायर होने के बाद भी जिंदगी जी सकेंगे और इसके बाद वो ओल्ड-एज होम में रह सकेंगे जिसे कुछ समय पहले सरकार ने आर्मी डॉग्स के लिए खोला है.1 साल पहले तक रिटायर होने के बाद इन डॉग्स को गोली मार दी जाती थी या इच्छामृत्यु दी जाती थी, पहले चोट या बीमारी के कारण रिटायर हुए कुत्तों के साथ ऐसा ही किया जाता था, जब तक कि उन्होंने वीरता पुरस्कार नहीं जीते हों, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.   एक आर्मी अफसर ने बताया कि अब ऐसा नहीं होगा, सभी सर्विस डॉग्स को रिटायर होने के बाद भी पहले की ही तरह प्यार मिलता रहेगा. उन्होंने बताया कि हम इन कुत्तों की नीलामी के बारे में भी सोच रहे हैं, जो लोग इनसे जुड़ाव महसूस करते हैं और इनका (कुत्तों का) खर्च उठाने में जिन्हें परेशानी नहीं होगी वो इन्हें अडॉप्ट कर सकते हैं.हालांकि साथ ही उन्होंने बताया कि सभी कुत्तों की नीलामी नहीं की जा सकती. उन्होंने बताया कि हमलावर कुत्ते, जिनका इस्तेमाल आतंकवादी विरोधी ऑपरेशंस में होता है उन्हें घरों में बच्चों के साथ नहीं रखा जा सकता

एक वेबसाइट के मुताबिक अमेरिका और ब्रिटेन में मिलिट्री डॉग्स को या तो ओल्ड- ऐज होम में रखा जाता है या फिर उन्हें रिटायर हुए मिलिट्री अफसरों द्वारा गोद ले लिया जाता है. एनएसजी के प्रवक्ता राकेश कुमार ने बताया कि देश में इन कुत्तों की नीलामी ठीक तरह से विज्ञापनों के द्वारा की जाती है.

साल 2016 में हुए पठानकोट हमले में एंटी- टेरर हमले का हिस्सा रहे रॉकी के लिए लेना मेडल की सिफारिश की गई थी. उन्होंने बताया कि अवॉर्ड जीतने वाले कुत्तों को हम महीने 15,000 से लेकर 20,000 रुपये प्रति महीने दिया जाता है जिसे उनके खाने से लेकर सेहत तक पर खर्च किया जा सकता है. (सभी तस्वीरें प्रतीकात्मक हैं)

खबर श्रोत आज तक

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