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7 में से 1 स्लाइड: चांदभारत में 27 जुलाई को एक सदी का सबसे लंबा और पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने वाला है। इस चंद्र ग्रहण को वैज्ञानिक ने ब्लड मून का नाम दिया है। इस चंद्र ग्रहण की अवधि एक घंटे और 43 मिनट की होगी। इस दौरान चंद्रमा खूबसूरत लाल या भूरे रंग का दिखाई देगा। इसका नजारा भारत, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और पश्चिम एशिया में देखा जा सकता है। वैज्ञानिकों ने इस बारे में कहा कि ये चंद्र ग्रहण ब्रिटेन के समय के अनुसार 9.22 मिनट पर तेजी से चमकेगा। महामाया मंदिर के पुजारी मनोज शुक्ला की माने तो इस अवसर पर दान करना चाहिए। चंद्रग्रहण पर लोगों को सोने, चांदी व तांबे के नाग का काले तिल तांबे की प्लेट में रखकर दान करना शुभ माना जाता है।इस दिन पड़ेगा सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण, मचा सकता है तबाही 1 / 12 21वीं सदी का सबसे लंबा खग्रास चंद्रग्रहण जुलाई में होने वाला है. यह एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है. इसकी महत्ता को ऐसे भी समझा जा सकता है कि इसके आगे-पीछे 13 जुलाई और 11 अगस्त 2018 को दो खंडग्रास सूर्यग्रहण पड़ेंगे. लगातार तीन ग्रहणों में खग्रास चंद्रग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव गहरा होना संभावित है.

विशेषतः कर्क रेखा क्षेत्र में विनाशकारी भूकंप, सुनामी, चक्रवात, ज्वालामुखी विस्फोट एवं आगजनी की घटनाएं हो सकती हैं. इसके अतिरिक्त पृथ्वी की कक्षा में मौजूद विभिन्न देशों के हजारों सैटेलाइट्स इससे प्रभावित होकर बिगड़ सकते हैं. नियंत्रण खो सकते हैं. ऐसे में विश्वभर में सैटेलाइट्स सेवाएं कठिनाई में आ सकती हैं. चाहे वे संचार संबंधी हों या अन्य सुरक्षा और सुविधा संबंधी. विमान सेवा भी प्रभावित हो सकती है.

27 को होगा सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण, ऐसे बनाए शुभखुली आंखों से देख सकेंगे –

चंद्र ग्रहण होने के बावजूद इस बार चांद काला नहीं बल्कि, तांबे के रंग जैसा नारंगी या गहरा लाल दिखाई देगा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सूर्य और चांद के बीच में पृथ्वी आ जाती है, जिस वजह से चांद पर पूरा प्रकाश नहीं पहुंच पाता है। सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होती है। चंद्र ग्रहण का नजारा खुली आंखों से देखा जा सकता है। यह पूरी तरह सुरक्षित है। जबकि, सूर्य ग्रहण के दौरान सोलर रेडिएशन से आंखों के नाजुक टिशू डैमेज हो जाते है।

ये होता है ब्लड मून –

पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूरज और चांद के बीच पृथ्वी आ जाती है। इससे चांद पर पूरी रोशनी नहीं पड़ पाती है। ऐसे में वायुमंडल से होते हुए कुछ रोशनी चांद पर पड़ती है। सूर्य की रोशनी चांद पर पड़ने से वह हल्का लाल हो जाता है। जब चांद पृथ्वी के ठीक पीछे पहुंचता है तो उसका रंग और गहरा हो जाता है।

7 में से 3 स्लाइड: चांदपूर्व माहों में ऐसी घटनाएं हो भी चुकी हैं. नेपाल में हुए विमान हादसे के अलावा इस वर्ष लगभग आधा दर्जन विमान हादसे हो चुके हैं. एक वर्ष के अंदर इसरो के दो सैटेलाइट लांच फेल हो चुके हैं. चीन का स्पेस स्टेशन गिरा है. रूस का उपग्रह खोया है. वर्ष 2017 और 2018 में इस तरह की घटनाएं होने की भविष्यवाणी ज्योतिषाचार्य पंडित अरुणेश कुमार शर्मा ने कर दी थी. वर्ष 2017 में ग्लेशियर टूटने से लेकर भूकंप की कई घटनाएं हुईं. वैज्ञानिकों ने भी माना है कि पृथ्वी की गति में कई आई है जो भूकंपीय घटनाओं को बढ़ा सकती है.

26 जुलाई को ज्योतिष में चंद्रमा का पुत्र माना जाने वाला बुध ग्रह वक्री होगा. यह परिवर्तन सदी के सबसे लंबे चंद्रग्रहण के को और प्रभावी बनाएगा. 27 जुलाई को सदी का सबसे लंबा खग्रास चंद्रग्रहण होगा. यह विभिन्न विनाशकारी भौगोलिक घटनाओं का कारक हो सकता है.

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